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JSSC CGL के चयनित अभ्यर्थियों को बड़ी राहत, झारखंड हाईकोर्ट ने परीक्षा रद करने का सरकार का फैसला किया निरस्त

Published: Fri, 06 Nov 2026 09:00 AM (GMT+05:30)Updated: Fri, 06 Nov 2026 11:20 AM (GMT+05:30)

झारखंड हाई कोर्ट ने JSSC CGL परीक्षा रद करने के राज्य सरकार के फैसले को पलट दिया है। इस फैसले ...और पढ़ें

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HighLights

  1. हाई कोर्ट ने पलटा JSSC CGL परीक्षा रद करने का सरकारी फैसला।

  2. राज्य सरकार ने गड़बड़ी के आरोप में रद की थी परीक्षा।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा के तहत हुई नियुक्ति को रद करने के राज्य सरकार के फैसले को निरस्त कर दिया है। अदालत ने विज्ञापन संख्या 10/2023 के तहत चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियां बहाल रखते हुए उन्हें बिना किसी सेवा व्यवधान के निरंतर सेवा में मानने का आदेश दिया है।

साथ ही स्पष्ट किया है कि भर्ती रद करने की अधिसूचना के कारण अभ्यर्थियों को किसी भी तरह के अन्य सेवा लाभ से वंचित नहीं किया जाएगा।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अधूरी जांच के आधार पर पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद करना उचित नहीं है। राज्य सरकार ऐसी कोई ठोस तथ्यात्मक जांच और साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी, जिससे यह साबित हो कि पूरी चयन प्रक्रिया सुनियोजित गड़बड़ी से प्रभावित थी। केवल कुछ अभ्यर्थियों के खिलाफ आरोप या जांच लंबित होने के आधार पर सभी चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियां समाप्त नहीं की जा सकतीं।

अदालत ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद ही यह तय किया जा सकता है कि गड़बड़ी में शामिल अभ्यर्थियों की पहचान संभव है या नहीं और निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग किया जा सकता है या नहीं। ऐसे में बिना इस प्रक्रिया को पूरा किए पूरी भर्ती रद करने का फैसला कानूनी कसौटी पर टिकाऊ नहीं है।

अदालत ने यह भी कहा कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों की अनदेखी कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक अपवाद है। राज्य सरकार को यह साबित करना होगा कि अभ्यर्थियों को सुनवाई का अवसर दिए बिना कार्रवाई करना क्यों आवश्यक था। इस मामले में सरकार ऐसा कोई पर्याप्त आधार प्रस्तुत नहीं कर सकी।

अदालत ने पूर्व में पारित हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार उन न्यायिक आदेशों के विपरीत कार्रवाई नहीं कर सकती। पूर्व के आदेशों में नियुक्तियों को लंबित आपराधिक कार्यवाही के अंतिम परिणाम के अधीन रखा गया था। इसलिए जांच पूरी होने से पहले पूरी भर्ती रद करने का निर्णय उचित नहीं था।

हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि भर्ती रद करने की अधिसूचना निरस्त होने से आपराधिक जांच प्रभावित नहीं होगी। जांच निष्पक्ष एवं स्वतंत्र तरीके से अपने तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाई जाएगी। चयनित अभ्यर्थियों को भी जांच में सहयोग करना होगा।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके फैसले में की गई टिप्पणियां केवल वर्तमान याचिकाओं के निस्तारण के उद्देश्य से हैं और उनका लंबित जांच पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। हाई कोर्ट ने 18 अगस्त 2026 की भर्ती रद करने संबंधी अधिसूचना को निरस्त करते हुए याचिकाकर्ताओं को सेवा में निरंतरता और सभी परिणामी सेवा लाभ देने का आदेश दिया।

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