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झारखंड में जेल सुधारों की बड़ी पहल: सभी कारागारों में नियुक्त होंगे 'गैर-सरकारी आगंतुक', सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एक्शन

Published: Thu, 18 Jun 2026 01:38 AM (IST)

झारखंड सरकार ने जेलों में सुधार और कैदियों के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए 'गैर-सरकारी आगंतुकों' की नियुक्ति की पहल ...और पढ़ें

एआई द्वारा बनाई गई तस्‍वीर।

एआई द्वारा बनाई गई तस्‍वीर।

HighLights

  1. जेलों में 'गैर-सरकारी आगंतुकों' की नियुक्ति, कैदियों के मानवाधिकारों की रक्षा।

  2. जेल प्रबंधन की खामियों और कैदियों की समस्याओं का समाधान होगा।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड की जेलों में व्यापक सुधार करने तथा कैदियों के मानवाधिकारों की रक्षा की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ी पहल शुरू की है। राज्य के सभी कारागारों में अब जल्द ही 'गैर-सरकारी आगंतुकों' (Non-Official Visitors) की नियुक्ति होने जा रही है। 
 
ये आगंतुक जेल प्रबंधन की खामियों, कैदियों की समस्याओं और जेलों की अद्यतन स्थिति को सीधे सरकार के संज्ञान में लाएंगे, ताकि उनका समय पर समाधान निकाला जा सके।
 

जेल आईजी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का दिया हवाला 

इस व्यवस्था को धरातल पर उतारने के लिए जेल महानिरीक्षक (IG Jail) सुदर्शन प्रसाद मंडल ने सभी जिलों के उपायुक्तों (DC) को पत्र लिखकर शीघ्र नियुक्तियां करने का निर्देश दिया है। 
 
जेल आईजी ने अपने पत्र में सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक आदेश और 'झारखंड कारा हस्तक नियम 2025' (Jharkhand Prison Manual 2025) का हवाला दिया है, जिसमें इन आगंतुकों की नियुक्ति को अनिवार्य बताया गया है।
 

सिर्फ नाम बदलने से नहीं आएगा सुधार: सुप्रीम कोर्ट 

आईजी जेल ने पत्र में सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी का विशेष उल्लेख किया है, जिसमें अदालत ने कहा था कि जेलों का नाम बदलकर केवल 'सुधार गृह' कर देने से परिस्थितियां नहीं बदलेंगी। 
 
इसके लिए समाज के प्रतिष्ठित, प्रबुद्ध और संवेदनशील व्यक्तियों को निगरानी व सुधार की प्रक्रिया से जोड़ना बेहद जरूरी है, ताकि बंदियों के पुनर्वास को बढ़ावा मिल सके।
 

कैसे होगी नियुक्ति और क्या है संख्या का नियम? 

इन गैर-सरकारी आगंतुकों की नियुक्ति संबंधित जिले के उपायुक्त या जिला दंडाधिकारी की अनुशंसा पर की जाएगी। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसकी आधिकारिक अधिसूचना राज्य के राजपत्र (Gazette) में प्रकाशित होगी। नियमों के मुताबिक: 

  •     राज्य की प्रत्येक केंद्रीय जेल (Central Jail) में कम से कम छह-छह गैर-सरकारी आगंतुक नियुक्त होंगे।
  •     प्रत्येक जिला जेल (District Jail) में कम से कम तीन-तीन आगंतुकों की तैनाती की जाएगी।


हाईकोर्ट खुद कर रहा है कैदियों की स्थिति की निगरानी

उल्लेखनीय है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर झारखंड हाईकोर्ट इस पूरे मामले में स्वतः संज्ञान लेकर लगातार सुनवाई कर रहा है। अदालत का मुख्य फोकस इस बात पर है कि जेलों में क्षमता से अधिक कैदी न रखे जाएं। 
 
बंदियों को पीने के लिए स्वच्छ पानी, खाने में पौष्टिक भोजन और चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधाएं अनिवार्य रूप से मिलें।
 

क्या होगी इन गैर-सरकारी आगंतुकों की भूमिका? 

जेल मैनुअल के अनुसार, ये गैर-सरकारी आगंतुक जेल प्रशासन और कैदियों के बीच संवाद का एक मजबूत जरिया बनेंगे। वे समय-समय पर जेलों का औचक निरीक्षण करेंगे, कैदियों की शिकायतें और उनकी कानूनी समस्याएं सुनेंगे।
 
उनके मानवाधिकारों के हनन को रोकने के लिए जेल प्रबंधन और सरकार को सीधे अपने सुझाव सौंपेंगे। कारा विभाग ने सभी जिलों से योग्य व सामाजिक रूप से सक्रिय व्यक्तियों के नामों की सूची जल्द से जल्द उपलब्ध कराने को कहा है।

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