'नौकरी छिन गई, अब तुम भी रिश्ता खत्म कर सकती हो'; CM सोरेन के फैसले पर JSSC पास संदीप का छलका दर्द
हेमंत सरकार द्वारा जेएसएससी-सीजीएल और अन्य परीक्षाओं को रद करने से जहां कुछ छात्रों ने जश्न मनाया, वहीं लगभग 2,000 ...और पढ़ें

CM सोरेन के फैसले पर JSSC पास संदीप का छलका दर्द
HighLights
हेमंत सरकार ने जेएसएससी-सीजीएल और अन्य परीक्षाएं रद कीं।
लगभग 2,000 चयनित अभ्यर्थियों में नौकरी जाने का डर।
अभ्यर्थियों ने नौकरी खोने और भविष्य की चिंता व्यक्त की।
डिजिटल डेस्क, रांची। हेमंत सरकार ने जब सोमवार को जेएसएससी-सीजीएल और अन्य परीक्षाओं को रद करने की घोषणा की, तो एक तरफ जहां कुछ लोगों ने जश्न मनाया, वहीं दूसरी तरफ गहरी निराशा छा गई। रांची की सड़कों पर ऐसे युवा दिखाई दिए जिनकी आंसू नहीं रुक रहे थे।
दरअसल, राज्य सरकार ने यह फैसला छात्रों के करीब महीने भर चले विरोध प्रदर्शन के बाद लिया। छात्र TDPL द्वारा आयोजित जेएसएससी-सीजीएल और अन्य राज्य स्तरीय सरकारी परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं के कारण इन्हें रद करने की मांग कर रहे थे।
हालांकि, इस फैसले से उन लगभग 2,000 लोगों में भारी आक्रोश है जिनका चयन JSSC-CGL 2024 के माध्यम से हुआ था और अब उन्हें अपनी नौकरी जाने का डर सता रहा है।
एक टीवी न्यूज चैनल से बात करते हुए चतरा निवासी राघवेंद्र ने कहा कि मुख्यमंत्री ने खुद मुझे मेरा नियुक्ति पत्र सौंपा था, और अब वही मेरी नौकरी छीन रहे हैं।
बता दें कि राघवेंद्र मंगलवार को झारखंड सचिवालय के बाहर भारी बारिश के बीच विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। राघवेंद्र ने सीजीएल परीक्षा पास की थी और वह सचिवालय में कार्यरत हैं। इससे पहले, वह बिहार के गया में एक शिक्षक के रूप में काम करते थे, जहां वे सामाजिक विज्ञान पढ़ाते थे।
उन्होंने बताया, "जब सीजीएल भर्ती के परिणाम घोषित हुए, तो मुझे जॉइन करने को लेकर कुछ शंकाएं थीं, लेकिन जब 5 जनवरी, 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने भर्ती रद न करने का फैसला सुनाया, तो मैंने 8 जनवरी को गया में अपने शिक्षक पद से इस्तीफा दे दिया। अब मैं अन्य भर्ती परीक्षाओं के लिए उम्र सीमा पार कर चुका हूं। अगर सरकार को इसे पहले ही रद करना था, तो मैं इसमें शामिल ही नहीं होता। अब मेरे पास कुछ नहीं बचा है - मैं न इधर का रहा, न उधर का।"
वहीं, कोडरमा के रहने वाले संदीप यादव निगरानी विभाग में कार्यरत थे और हर दिन सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक प्रोजेक्ट भवन स्थित अपने कार्यालय में काम करते थे, लेकिन मंगलवार को उन्हें उसी कार्यालय में प्रवेश करने से रोक दिया गया।
'मुझे खैरात में नहीं मिली नौकरी...'
संदीप ने बताया कि गार्ड ने मेरा आईडी कार्ड चेक किया और कहा कि मुझे अंदर जाने की अनुमति नहीं है। मैंने परीक्षा पास करने के बाद पिछले साल ही जॉइन किया था। मुझे यह नौकरी किसी की खैरात में नहीं मिली है, फिर भी आज मुझे अंदर जाने की इजाजत नहीं है। सरकार ने भीड़ के दबाव में आकर यह फैसला लिया है।
'शादी पर पड़ेगा असर...'
सिर्फ दो महीने पहले शादी के बंधन में बंधे संदीप यादव को डर है कि नौकरी जाने का सीधा असर उनकी शादी पर भी पड़ेगा।
उन्होंने कहा, "जब मैं घर गया, तो मैंने मेरी पत्नी से कहा, 'तुमने मुझसे इसलिए शादी की थी, क्योंकि मेरे पास एक अच्छी नौकरी थी। अब मेरे पास कोई नौकरी नहीं है। अगर तुम चाहो, तो इस रिश्ते को यहीं खत्म कर सकती हो।"
देवघर के ललन पांडे का चयन सहायक अनुभाग अधिकारी (ASO) के पद पर हुआ था और उनकी तैनाती जमशेदपुर में थी। वह अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य हैं। उनके परिवार में उनके माता-पिता, पत्नी और दो बच्चे हैं।
अपना दुख सुनाते हुए उन्होंने कहा कि मैं किसी भी नई भर्ती परीक्षा में बैठने की उम्र सीमा पार कर चुका हूं। मेरे छोटे बच्चे हैं। उनकी पढ़ाई का क्या होगा? यह हमारे साथ घोर अन्याय है। इससे तो अच्छा होता कि सरकार हमें सीधे गोली मार देती।
