यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 13, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Jharkhand Liquor Price: झारखंड में फिर MRP से ज्यादा कीमत पर बिक रही शराब, दुकानदारों ने बताई अपनी-अपनी वजह
झारखंड में शराब की बिक्री को लेकर एक बार फिर से कीमत बढ़ चुकी है। राज्य के सभी जिलों में अधिकतर शराब दुकानदार एमआरपी से ज्यादा कीमत पर शराब की बिक्री ...और पढ़ें

HighLights
- सचिव व आयुक्त के दावे के बावजूद राज्य में नहीं रुक रही शराब दुकानदारों की मनमानी
- आए दिन शराब दुकानदारों की ग्राहकों से होती रहती है तीखी नोकझोंक
- दुकानदारों भी बताने लगने कीमत बढ़ाने को लेकर अपनी वजह
राज्य ब्यूरो, रांची। राज्य में शराब की बिक्री में अनियमितता फिर आरंभ हो गई है। एमआरपी से अधिक कीमत पर शराब की बिक्री हो रही है। यह शिकायत सिर्फ रांची ही नहीं, बल्कि सभी जिलों में है।
आए दिन दुकानदारों से ग्राहकों की नोकझोंक होती रहती है। दुकानदारों में कार्रवाई का कोई भय नहीं। वे अब खुलकर बोलने लगे हैं कि उन्हें छह से आठ महीने तक से वेतन नहीं मिल रहा है।
अधिक कीमत पर भी लोग खरीद रहे शराब
दुकान का किराया, एसी, फ्रीज के चलते बिजली का बिल आदि का भुगतान भी करना है। एमआरपी से अधिक वसूली नहीं करने पर परेशानी होगी। शराब के शौकीन ज्यादा देर तक बहस करने के बजाय अधिक कीमत देकर शराब खरीद रहे हैं।
उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के पूर्व सचिव मुकेश कुमार ने एमआरपी से अधिक वसूली करने वालों के विरुद्ध सख्ती की और चेतावनी दी थी कि शिकायत मिलने पर प्लेसमेंट एजेंसी पर कार्रवाई करेंगे। उनके स्थानांतरण के बाद उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग में मनोज कुमार नए सचिव बनाए गए हैं।
कितने रुपये बढ़े शराब पर
राज्य में लगभग सभी शराब दुकानों में बीयर पर एमआरपी से दस रुपये, क्वार्टर पर दस, हाफ पर बीस व फुल पर 40 रुपये तक की अवैध वसूली हो रही है। यह खुलेआम हो रहा है। इससे हर दिन राज्य में करीब 50 लाख रुपये तक की अवैध वसूली जारी है। विभाग के अधिकारी मौन हैं। शराब दुकानदारों को कार्रवाई का कोई भय भी नहीं है।
कर्मियों का वेतन नहीं मिलना समझ से परे- आयुक्त
उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के आयुक्त सह झारखंड राज्य बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (जेएसबीसीएल) प्रबंध निदेशक अमीत प्रकाश ने बताया कि सभी प्लेसमेंट एजेंसी पहले कर्मियों का भुगतान करती है और उसके बाद विभाग में बिल जमा कर विभाग से भुगतान लेती है। विभाग के पास किसी भी प्लेसमेंट एजेंसी का कोई बकाया नहीं है।
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इसके बावजूद शराब दुकानों में कार्यरत कर्मियों को छह महीने से वेतन भुगतान क्यों नहीं हुआ, यह जांच का विषय है। अब तक किसी भी दुकानदार की तरफ से कोई शिकायत विभाग में नहीं आई है। शिकायत मिलने पर उसकी जांच कराई जाएगी और संबंधित प्लेसमेंट एजेंसी के संचालक पर कार्रवाई की जाएगी।