Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    झारखंड शराब घोटाला मामले में 1 साल बाद भी ACB की जांच अधूरी, जमानत पर रिहा सभी आरोपी

    Updated: Sun, 10 May 2026 09:56 AM (IST)

    झारखंड के शराब घोटाला मामले में एसीबी एक साल बाद भी आरोप पत्र दाखिल नहीं कर पाई है, जिसके चलते निलंबित आईएएस विनय कुमार चौबे सहित सभी 17 आरोपी डिफॉल्ट ...और पढ़ें

    सांकेतिक तस्वीर

    सांकेतिक तस्वीर

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) में दर्ज शराब घोटाला केस के एक साल पूरे होने वाले हैं। एसीबी में 20 मई 2025 को इससे जुड़ी दर्ज प्राथमिकी में एसीबी का अनुसंधान अब तक किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंच सका।

    इस एक साल की अवधि में निलंबित आइएएस विनय कुमार चौबे सहित 17 अधिकारी, शराब कारोबारियों को एसीबी ने गिरफ्तार कर जेल तक तो पहुंचाया, लेकिन उनके विरुद्ध चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी।

    इसका नतीजा यह हुआ कि एक-एक कर सभी आरोपितों को डिफाल्ट बेल का लाभ मिल गया। एसीबी ने गिरफ्तारी में जितनी तेजी दिखाई, उन आरोपितों पर चार्जशीट करने में उतनी ही उदासीन बनी रही। एसीबी के अधिकारी यह कहते रहे कि उनकी तैयारी अधूरी रही, जिसके चलते चार्जशीट दाखिल नहीं की जा सकी।

    20 मई 2025 को प्राथमिकी दर्ज होने के साथ ही एसीबी ने निलंबित आइएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे, उत्पाद विभाग के संयुक्त आयुक्त उत्पाद गजेंद्र सिंह व प्लेसमेंट एजेंसी मेसर्स मार्शन के स्थानीय प्रतिनिधि नीरज कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इसके बाद एक-एक कर 14 अन्य गिरफ्तार होते गए थे।

    गिरफ्तारी के बाद कोर्ट में पेश करते वक्त एसीबी ने गिरफ्तार आरोपितों के विरुद्ध भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूत का दावा किया था, जिसके आधार पर गिरफ्तार आरोपितों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। इसके बावजूद चार्जशीट दाखिल नहीं कर एसीबी ने सबको डिफाल्ट बेल का लाभ दिला दिया। आइएसस विनय कुमार चौबे वर्तमान में दूसरे केस में जेल में बंद हैं।

    खबरें और भी

    नियमों को ताक पर रखकर फर्जी बैंक गारंटी देने वाली प्लेसमेंट एजेंसी को दिया गया था मैनपावर आपूर्ति का ठेका

    पूर्व में वर्ष 2022 की उत्पाद नीति में फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर अपने चहेते प्लेसमेंट एजेंसियों को सरकारी खुदरा शराब दुकानों में मैनपावर आपूर्ति का ठेका दिया गया था। इसमें अधिकारियों व उनके सिंडिकेट पर आरोप लगा था और एसीबी ने अपनी जांच में इसकी पुष्टि का दावा भी किया था।

    एसीबी का दावा था कि साल 2022 में झारखंड की नई उत्पाद नीति को छत्तीसगढ़ के शराब सिंडिकेट के साथ मिलकर तैयार किया गया था जिससे राज्य के खजाने को भारी नुकसान हुआ और निजी कंपनियों को अनुचित लाभ मिला। शुरुआत में यह घोटाला 38 करोड़ का बताया गया था, जो अब बढ़कर 750 करोड़ रुपये तक पहुंचा था।

    ये गिरफ्तार कर भेजे गए थे जेल, चौबे को छोड़ सभी हैं जेल से बाहर

    निलंबित आईएएस विनय कुमार चौबे, तत्कालीन संयुक्त आयुक्त उत्पाद गजेंद्र सिंह, जेएसबीसीएल के महाप्रबंधक वित्त सुधीर कुमार दास, महाप्रबंधक अभियान सुधीर कुमार, मेसर्स मार्शन प्लेसमेंट एजेंसी के स्थानीय प्रतिनिधि नीरज कुमार सिंह, पूर्व आयुक्त उत्पाद अमित प्रकाश, प्लेसमेंट एजेंसी सुमित फैसिलिटी के निदेशक अमित प्रभाकर सलौंकी, श्री ओम साईं ब्रिवरीज छत्तीसगढ़ के निदेशक अतुल कुमार सिंह व मुकेश मनचंदा, शराब कारोबारी सिद्धार्थ सिंघानिया, प्रिज्म होलोग्राफी के निदेशक विधु गुप्ता, प्लेसमेंट एजेंसी विजन के निदेशक परेश अभेसिंह ठााकोर, विक्रमासिंह अभे सिंह ठाकोर, शराब आपूर्ति कारोबारी राजेंद्र जायसवाल उर्फ चुन्नू जायसवाल, मेसर्स मार्सन प्लेसमेंट एजेंसी के निदेशक जगन तुकाराम देसाई व छत्तीसगढ़ का शराब कारोबारी नवीन केडिया।