झारखंड में एलपीजी संकट पर रार; सीएम हेमंत ने केंद्र को घेरा, स्कूलों में मध्याह्न भोजन को लेकर बढ़ी चिंता
पश्चिम एशिया युद्ध के कारण झारखंड में एलपीजी संकट गहरा गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं, कहा कि गरीब और मध्यम वर्ग सबस ...और पढ़ें

HighLights
झारखंड के 40 लाख बच्चों के मध्याह्न भोजन पर संकट।
शिक्षा विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था और निगरानी का आश्वासन दिया।
मुख्यमंत्री का हमला: गरीब और मध्यम वर्ग सबसे अधिक प्रभावित
असम दौरे से लौटने के बाद रांची में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गैस संकट के प्रबंधन पर आश्चर्य जताया। उन्होंने कहा कि आमतौर पर किसी भी बड़े संकट की आशंका होने पर संबंधित विभाग पहले ही अलर्ट जारी करते हैं, ताकि जनता मानसिक रूप से तैयार रहे। लेकिन इस मामले में संकट पहले आ जाता है और सूचना बाद में मिलती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश का आम आदमी, जो छोटी-मोटी रोजी-रोटी के सहारे परिवार चलाता है, वह पहले से ही महंगाई की मार झेल रहा है। मौजूदा हालात ऐसे बन गए हैं कि लोग न खुद ठीक से खा पा रहे हैं और न दूसरों की मदद कर पा रहे हैं।
पीएम पोषण योजना पर संकट? 40 लाख बच्चों का सवाल
- वैकल्पिक व्यवस्था: सचिव के अनुसार, चूंकि अधिकांश स्कूल ग्रामीण क्षेत्रों में हैं, इसलिए आवश्यकता पड़ने पर स्थानीय स्तर पर उपलब्ध अन्य ईंधनों (जैसे लकड़ी या अन्य विकल्प) का उपयोग कर भोजन पकाया जा सकता है।
- निरंतर निगरानी: विभाग स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए है। यदि समस्या गंभीर होती है, तो उच्चस्तरीय बैठक बुलाकर वैकल्पिक योजना पर निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल, अभिभावकों और छात्रों को पैनिक होने की आवश्यकता नहीं है।