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    20वीं किस्त के साथ 51 लाख महिलाओं के खाते में पहुंचा 2500 रुपये, ₹30,000 सालाना कैसे बदल रहा जीवन

    Updated: Wed, 08 Apr 2026 09:37 AM (GMT+05:30)

    झारखंड की मुख्यमंत्री Maiya Samman Yojana की 20वीं किस्त 51 लाख से अधिक महिलाओं के खातों में पहुंचनी शुरू हो गई है। यह योजना महिलाओं के सशक्तिकरण, ग्र ...और पढ़ें

    एक योजना लाखों महिलाओं का जीवन बदल रहा है।

    एक योजना लाखों महिलाओं का जीवन बदल रहा है।

    HighLights

    1. 20वीं किस्त 51 लाख से अधिक महिलाओं के खातों में पहुंची।

    2. योजना से सालाना ₹30,000 मिल रहे, सशक्तिकरण को बढ़ावा।

    3. ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई, स्वरोजगार के अवसर बढ़े।

    डिजिटल डेस्क, रांची। झारखंड सरकार की लोकप्रिय मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना अब सिर्फ सहायता योजना नहीं, बल्कि राज्य की महिलाओं के सशक्तिकरण का सबसे बड़ा माध्यम बन गई है।

    मार्च 2026 की 20वीं किस्त चरणबद्ध तरीके से महिलाओं के बैंक खातों में पहुंचनी शुरू हो गई है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए लाखों परिवारों को राहत मिल रही है, वहीं योजना के प्रभाव से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है।

    20वीं किस्त का ताजा अपडेट: कब और कितनी राशि पहुंची

    सरकार ने 3 अप्रैल 2026 से ही कई जिलों में भुगतान शुरू कर दिया। धनबाद जिले में गुड फ्राइडे के मौके पर 3,52,326 महिलाओं के खातों में 88.08 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए। कुछ जिलों में यह प्रक्रिया 10 अप्रैल तक चलेगी।

    सामान्य लाभार्थियों को 2500 रुपये मिल रहे हैं, जबकि जिन्हें पिछली किस्तें बकाया थीं, उन्हें 5000 रुपये (दो किस्तें) एक साथ दिए जा रहे हैं। भुगतान आधार से लिंक बैंक खातों में हो रहा है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी हुई है।

    अब तक कितनी राशि बांटी गई और सरकार पर कितना वित्तीय लोड

    योजना की शुरुआत जनवरी 2025 में हुई थी। तब से अब तक करीब 20 किस्तें जारी हो चुकी हैं। औसतन 51 से 56 लाख सक्रिय लाभार्थियों के हिसाब से मासिक व्यय 1250 से 1400 करोड़ रुपये के आसपास रहा है।

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    अनुमान के मुताबिक, योजना शुरू होने से लेकर अब तक 24,000 करोड़ रुपये से ज्यादा राशि महिलाओं के खातों में ट्रांसफर हो चुकी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इसके लिए 13,363 करोड़ रुपये का बजट रखा गया था।

    वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में भी 14,065.57 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह योजना राज्य सरकार के सबसे बड़े कल्याण कार्यक्रमों में शामिल है।

    सरकार इसे महिलाओं की आर्थिक स्वावलंबन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का अहम माध्यम मानती है। विपक्ष का आरोप है कि इससे अन्य योजनाओं पर दबाव बढ़ रहा है, लेकिन सरकार ने बजट में इसे प्राथमिकता बनाए रखी है(

    कितनी महिलाओं को मिल रहा लाभ, कितने नाम कटे

    वर्तमान में राज्य भर में 51 लाख से 56 लाख महिलाएं नियमित लाभ ले रही हैं। शुरुआत में यह संख्या 56 लाख से ज्यादा थी। सत्यापन प्रक्रिया के दौरान करीब 4.54 लाख नाम हटाए गए।

    मुख्य कारणों में डुप्लीकेट एंट्री, आयु सीमा से बाहर होना, आधार सीडिंग में कमी, मृत्यु या अयोग्यता शामिल हैं। नाम कटने वाली महिलाएं आधिकारिक पोर्टल पर अपील कर सकती हैं।

    योजना का जादू: 51 लाख महिलाओं में सशक्तिकरण की नई लहर

    XISS के छात्र और शाेधार्थी आयूष शुक्ला बताते हैं- मंईयां सम्मान योजना अब सिर्फ मासिक सहायता तक सीमित नहीं रही।मैंने कांके ब्लॉक के कुछ गांव में दर्जनों महिलाओं ने बात किया है। प्रभाव निश्चित तौर पर सकरात्मक है। 

    हर पात्र महिला को सालाना 30,000 रुपये सीधे बैंक खाते में मिल रहे हैं। अध्ययनों और लाभार्थियों के अनुभवों के अनुसार महिलाएं इस राशि का बड़ा हिस्सा परिवार की सेहत, बच्चों की पढ़ाई, पोषण और घरेलू जरूरतों पर खर्च करती हैं।

    इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिला है क्योंकि महिलाओं की बढ़ी हुई खरीद क्षमता से स्थानीय बाजार और छोटे व्यवसाय फल-फूल रहे हैं। सरकार का दावा है कि योजना ने महिलाओं को सूदखोरों के चंगुल से बचाया है और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया है।

    लाखों महिलाओं ने पहली बार बैंक खाता खोला, जिससे वे औपचारिक ऋण और बचत की दिशा में आगे बढ़ीं। लाभार्थी अपना स्टेटस mmmsy.jharkhand.gov.in पर आधार नंबर से चेक कर सकते हैं।

    स्वरोजगार और उद्यमिता का बड़ा प्रभाव

    सबसे बड़ा बदलाव स्वरोजगार के क्षेत्र में दिख रहा है। मार्च 2026 तक 67,752 महिलाओं को योजना के तहत पशुपालन, मुर्गी पालन, बकरी पालन और छोटे व्यवसाय शुरू करने में मदद मिली है। 

    सरकार का लक्ष्य 2026 तक इसे एक लाख तक पहुंचाना है। योजना के लाभार्थियों को अब 20,000 रुपये तक बिना गारंटी का सूक्ष्म ऋण भी मिल रहा है।

    रांची, बोकारो, गिरिडीह और पलामू जैसे जिलों में महिलाएं इस राशि से सिलाई केंद्र, किराना दुकान और पशु पालन का काम कर रही हैं। कई लाभार्थियों ने बताया कि पहले वे सिर्फ घरेलू काम करती थीं, अब वे परिवार की आय में सीधा योगदान दे रही हैं।

    शिक्षा, स्वास्थ्य और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ी

    महिलाओं की बढ़ी हुई आर्थिक स्वतंत्रता ने परिवार स्तर पर सकारात्मक बदलाव लाया है। बच्चों की स्कूल फीस, दवाइयां और घरेलू जरूरतें अब आसानी से पूरी हो रही हैं। योजना ने महिलाओं को निर्णय लेने की क्षमता दी है, जिससे घरेलू हिंसा और आर्थिक निर्भरता में कमी आई है।

    सरकार के अनुसार यह योजना शिबू सोरेन के सूदखोरी विरोधी आंदोलन की विरासत को आगे बढ़ा रही है। विश्व बैंक ने भी इसकी सराहना की है कि यह गरीबी उन्मूलन और आर्थिक विकास में योगदान दे रही है।

    एक्सपर्ट बोले- चुनावी गेमचेंजर ही नहीं, सकरात्मक सामाजिक प्रभाव

    वरिष्ठ पत्रकार राकेश परिहार कहते हैं, योजना के प्रभाव सकारात्मक हैं, लेकिन कुछ चुनौतियां भी हैं। सत्यापन के दौरान 4.54 लाख से अधिक नाम कटे, जिससे कुछ पात्र महिलाएं प्रभावित हुईं। भुगतान में कभी-कभी देरी भी हुई।

    2024 के विधानसभा चुनाव में इस योजना को ‘गेम चेंजर’ माना गया। महिलाओं की बढ़ी भागीदारी और समर्थन ने हेमंत सोरेन सरकार को मजबूती दी। 2500 रुपये की मासिक राशि ने महिलाओं को राजनीतिक रूप से भी सक्रिय बनाया।

    सरकार अब सत्यापन को और पारदर्शी बनाने और ‘मंईयां बलवान योजना’ जैसे नए कार्यक्रमों के जरिए स्वरोजगार को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। मंईयां सम्मान योजना झारखंड में महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन गई है। आदिवासी व ग्रामीपण महिलाओं में यह सिर्फ राशि नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, स्वावलंबन और समृद्धि का प्रतीक है। 

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