झारखंड में मेडिकल दुकानों और अस्पतालों में लगाना होगा QR कोड, दवा के दुष्प्रभाव की शिकायत कर सकेंगे ग्राहक
झारखंड राज्य फार्मेसी परिषद ने दवाओं के दुष्प्रभाव (एडीआर) की रिपोर्टिंग आसान बनाने के लिए अस्पतालों और मेडिकल दुकानों पर क्यूआर कोड लगाना अनिवार्य कि ...और पढ़ें

एआई जनरेटेड फोटो
HighLights
दवा दुष्प्रभाव रिपोर्टिंग के लिए क्यूआर कोड अनिवार्य।
मरीज सीधे फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम को सूचित कर सकेंगे।
झारखंड में दवा सुरक्षा निगरानी प्रणाली होगी मजबूत।
जागरण संवाददाता, रांची। दवा से होने वाले दुष्प्रभाव (एडीआर) की रिपोर्टिंग अब झारखंड में और आसान होने जा रही है। मरीजों की सुरक्षा को मजबूत करने और दवाओं की निगरानी प्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए झारखंड राज्य फार्मेसी परिषद ने राज्य के सभी अस्पतालों, मेडिकल दुकानों और फार्मेसी महाविद्यालयों में एडीआर क्यूआर कोड प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित करना अनिवार्य किया है।
इस क्यूआर कोड को स्कैन कर कोई भी मरीज, स्वजन, फार्मासिस्ट, चिकित्सक या आम नागरिक किसी दवा से होने वाले संदिग्ध दुष्प्रभाव की सूचना सीधे फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम (पीवीपीआइ) आफ इंडिया को भेज सकेगा। यह पहल परिषद और भारतीय फार्माकोपिया आयोग (आइपीसी) के बीच पूर्व में हुए एमओयू के उद्देश्यों के अनुरूप की जा रही है।
झारखंड राज्य फार्मेसी परिषद के रजिस्ट्रार-सह-सचिव प्रशांत कुमार पांडेय द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि दवाओं से होने वाले संभावित दुष्प्रभावों की समय पर रिपोर्टिंग रोगी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी है।
इससे दवाओं की सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी एकत्र होती है, जिसके आधार पर भविष्य में दवाओं के सुरक्षित और तर्कसंगत उपयोग को और प्रभावी बनाया जा सकता है।
राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी हो सकेगी
उन्होंने बताया कि परिषद का उद्देश्य आम जनता, मरीजों, फार्मासिस्टों, चिकित्सकों तथा अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को एडीआर रिपोर्टिंग के प्रति जागरूक करना और डिजिटल माध्यम से इस प्रक्रिया को सरल, त्वरित एवं सुलभ बनाना है।
उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति क्यूआर कोड स्कैन कर किसी दवा से होने वाले संदिग्ध दुष्प्रभाव की जानकारी सीधे पीवीपीआइ के तहत दर्ज करा सकेगा। इससे राष्ट्रीय स्तर पर दवा सुरक्षा निगरानी प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
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मरीजों और आम नागरिकों में जागरूकता बढ़ाना है
परिषद के अनुसार इस अभियान का मुख्य उद्देश्य राज्य में फार्माकोविजिलेंस की संस्कृति को मजबूत करना, मरीजों और आम नागरिकों में दवा सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना, पंजीकृत फार्मासिस्टों की रोगी सुरक्षा में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना तथा एडीआर रिपोर्टिंग को पूरी तरह डिजिटल और सुलभ बनाना है।
साथ ही मेडिकल शाप, अस्पतालों और फार्मेसी महाविद्यालयों को राष्ट्रीय दवा सुरक्षा अभियान से जोड़ते हुए दवाओं के संभावित दुष्प्रभावों की समय पर पहचान और रोकथाम में सहयोग प्राप्त करना भी इसका लक्ष्य है।
राज्य के सभी मेडिकल शॉप संचालकों, अस्पताल प्रबंधन, फार्मेसी महाविद्यालयों, पंजीकृत फार्मासिस्टों और स्वास्थ्य संस्थानों से परिषद के निर्देशों का पालन करना होगा। यह पहल केवल एक प्रशासनिक निर्देश नहीं, बल्कि रोगी सुरक्षा सर्वोपरि के सिद्धांत को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
क्या है एडीआर?
एडीआर यानी वह हानिकारक प्रभाव है, जो डॉक्टर द्वारा निर्धारित सामान्य मात्रा में दवा लेने के बाद भी मरीज में दिखाई देता है। इसमें एलर्जी, त्वचा पर चकत्ते, सांस लेने में तकलीफ, लीवर या किडनी पर असर जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं शामिल हो सकती हैं।
क्या होगा फायदा?
- दवा के दुष्प्रभाव की ऑनलाइन और त्वरित रिपोर्टिंग
- मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा राष्ट्रीय डाटाबेस होगा मजबूत
- खतरनाक दुष्प्रभाव वाली दवाओं की समय पर पहचान संभव
- डाक्टरों और नियामक एजेंसियों को उपचार संबंधी बेहतर निर्णय लेने में मिलेगी मदद
- राज्य में फार्माकोविजिलेंस और दवा सुरक्षा व्यवस्था होगी अधिक प्रभावी
दवा से होने वाले प्रतिकूल प्रभाव के लिए क्यूआर कोड का व्यापक प्रदर्शन दवा सुरक्षा और रोगी हितों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे आम नागरिक दवाओं के संभावित दुष्प्रभावों की आसानी से रिपोर्ट कर सकेंगे तथा सुरक्षित एवं जिम्मेदार दवा उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। -डॉ बिमलेश कुमार दूबे, अध्यक्ष, झारखंड फार्मेसी काउंसिल