माओवादियों के सफाए के लिए बढ़ सकती है 31 मार्च की डेडलाइन, झारखंड में 44 हार्डकोर नक्सली अब भी चुनौती
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा निर्धारित 31 मार्च 2026 तक माओवादियों के सफाए की समय सीमा झारखंड में बढ़ सकती है। राज्य में अभी भी 44 हार्डकोर माओ ...और पढ़ें

सारंडा वन क्षेत्र में सुरक्षा बलों का संयुक्त अभियान जारी है।
HighLights
माओवादी सफाए की 31 मार्च 2026 की समय सीमा बढ़ सकती है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से मिली हुई है डेडलाइन।
नौ दिनों के भीतर 44 हार्डकोर माओवादियों से निपटने की है चुनौती।
राज्य ब्यूरो, रांची। माओवादियों के सफाए को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का दिया गया 31 मार्च 2026 का डेडलाइन आगे बढ़ सकता है। 31 मार्च में नौ दिन शेष हैं और अब भी सुरक्षा बलों के सामने झारखंड में 44 हार्डकोर माओवादियों से निपटने की चुनौती है।
इन माओवादियों में एक-एक करोड़ के दो माओवादियों के अलावा 25 लाख, 15 लाख व 10 लाख रुपये के इनामी माओवादी भी शामिल हैं।
पूर्व में माओवाद के मुद्दे पर आयोजित बैठकों में केंद्रीय गृह मंत्री ने यह दावा किया था कि झारखंड सहित पूरे देश में 31 मार्च 2026 तक माओवादियों का सफाया हो जाएगा। झारखंड पुलिस व केंद्रीय बलों की संयुक्त बैठक में भी इसपर दावा किया जा चुका है। इसे लेकर सुरक्षा बलों का संयुक्त अभियान भी तेज है।
सारंडा वन क्षेत्र में घेराबंदी जारी
झारखंड में माओवादियों के विरुद्ध अंतिम लड़ाई पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा वन क्षेत्र में चल रही है। यहां सीआरपीएफ, कोबरा, झारखंड जगुआर व जिला बल के जवानों की घेराबंदी विगत कई महीनों से जारी है।
माओवादियों की घेराबंदी के लिए सुरक्षा बलों ने घने जंगल क्षेत्र तक में अपना अस्थाई कैंप बना रखा है, ताकि माओवादियों के सप्लाई चेन को तोड़ा जा सके। उनके गोला-बारूद व खाने-पीने के सामान की आपूर्ति की चेन भी तोड़ डाली गई है।
खबरें और भी
जंगल में आखिरी लड़ाई चल रही है, लेकिन अब भी पूरी तरह सफलता मिलने में वक्त लगने की संभावना जताई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि अभियान तेज है, जल्द ही पुलिस अपने लक्ष्य को पूरा करेगी।
केंद्र से झारखंड को मिल चुके हैं 60 करोड़ रुपये
झारखंड को उग्रवाद मुक्त करने को लेकर अति उग्रवाद प्रभावित जिलों में सुरक्षा के दृष्टिकोण से आकस्मिक प्रकृति की योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए 2017-18 में विशेष केंद्रीय सहायता नामक योजना की शुरुआत की गई थी।
वर्तमान में राज्य के एक जिला पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) व तीन लिगेसी आफ थर्स्ट जिला बोकारो, चतरा व लातेहार में माओवादी विरोधी अभियान व विकास योजनाएं संचालित हो रही हैं।
इन माओवादी विरोधी अभियान व विकास योजनाओं को जारी रखने के लिए केंद्रीय सहायता योजना (सेंट्रल असिस्टेंस स्कीम) के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए भी 60 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। यानी, अभियान आगे भी चलता रहेगा।
ये माओवादी, जो अब भी बने हुए हैं पुलिस के लिए चुनौती
एक करोड़ का इनामी माओवादियों का पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा, एक करोड़ का इनामी सेंट्रल कमेटी सदस्य असीम मंडल उर्फ आकाश, 25 लाख का इनामी सैक सदस्य अजय उर्फ अजय महतो, 15 लाख का इनामी मोछू उर्फ मेहनत, रीजनल कमेटी सदस्य मदन महतो उर्फ शंकर शामिल है।
इसके साथ आरसीएम संजय महतो उर्फ संतोष, रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन मार्डी, नितेश यादव उर्फ इरफान, बेला सरकार उर्फ पंचमी, सहदेव महतो उर्फ सुभाष, मृत्युंजय उर्फ फरेश, मनोहर गंझू, गोदराय यादव, सालुका कायम, पुष्पा महतो उर्फ शकुंतला व चंदन लोहरा आदि भी चुनौती बने हुए हैं।