कोयले की बादशाहत के बाद झारखंड की नई तैयारी, अब लिथियम-पन्ना समेत महत्वपूर्ण खनिजों पर बढ़ेगा फोकस
झारखंड के खान सचिव अरवा राजकमल ने खनिज अन्वेषण में बदलाव पर जोर दिया, जिसमें कोयला आधारित अर्थव्यवस्था से हटकर महत्वपूर्ण और पर्यावरण अनुकूल खनिजों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

झारखंड में लिथियम-पन्ना समेत अन्य खनिजों पर बढ़ेगा फोकस।
HighLights
कोयला से हटकर महत्वपूर्ण व पर्यावरण अनुकूल खनन पर जोर।
खनिज अन्वेषण में AI और मशीन लर्निंग का उपयोग होगा।
राज्य ब्यूरो, रांची। खान एवं भू-तत्व विभाग के सचिव अरवा राजकमल ने बुधवार को खनिज अन्वेषण से जुड़े विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड की पहचान उसकी समृद्ध खनिज संपदा से है, लेकिन इस संपदा को आर्थिक विकास में बदलने के लिए विभाग को कई बदलाव करने होंगे।
पारंपरिक कोयला आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर महत्वपूर्ण खनिजों, उच्च मूल्य वाले खनिजों और पर्यावरण अनुकूल खनन की दिशा में हमें कदम बढ़ाना होगा। राजकमल खनिज अन्वेषण से जुड़े अधिकारियों, विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे थे।
पिछले कुछ महीनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतिनिधियों और महत्वपूर्ण लोगों की झारखंड में रुचि बढ़ी है। अमेरिका के वाणिज्य दूतावास की ओर से अधिकारियों ने झारखंड का दौरा किया और राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला का भी भ्रमण किया। इसके बाद कनाडा के वाणिज्यिक मंत्री ने भी राज्य का दौरा किया और खनिज प्रसंस्करण तथा उत्पादन के क्षेत्र में संभावित सहयोग पर चर्चा हुई।
इससे दुनिया में झारखंड की खनिज क्षमता को नई पहचान मिली है। खनिजों की खोज के बाद उन्हें कितनी तेजी से व्यावसायिक गतिविधियों में बदला जाए, खनन को आर्थिक रूप से कितना व्यवहार्य बनाया जाए, यह संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।
झारखंड खनजि में संपन्न, फिर भी आर्थिक चुनौतियां
अरवा राजकमल ने कहा कि झारखंड को अक्सर एक समृद्ध खनिज राज्य के रूप में देखा जाता है, लेकिन आर्थिक विकास के कई पैमानों पर राज्य अभी भी पीछे है। उन्होंने कहा कि राज्य की बड़ी आबादी की आजीविका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खनन पर निर्भर है।
जलवायु परिवर्तन और कार्बन उत्सर्जन को लेकर दुनियाभर में नीतियां तेजी से बदल रही हैं। यूरोप सहित कई क्षेत्रों में कम कार्बन उत्सर्जन वाले उत्पादन पर जोर बढ़ रहा है। ऐसे में आने वाले समय में पारंपरिक कार्बन आधारित अर्थव्यवस्था के सामने नई चुनौतियां खड़ी होंगी।
अभी से तय करिए, कोयले के बाद क्या होगा
सचिव ने अपने संबोधन में कहा कि झारखंड फिलहाल कोयला उत्पादन में अच्छा प्रदर्शन कर रहा है और इसमें वृद्धि भी हो रही है, लेकिन कोयला उत्पादन हमेशा इसी गति से नहीं बढ़ सकता। एक समय ऐसा आएगा जब उत्पादन अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचेगा और इसके बाद इसमें गिरावट शुरू हो सकती है।
बैठक के दूसरे सत्र में खनिज अन्वेषण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग के उपयोग पर चर्चा की गई। इसमें अन्वेषण की प्रक्रिया को अधिक तेज, प्रभावी और सटीक बनाने के लिए उपलब्ध नई तकनीकों पर चर्चा की गई।
अरवा राजकमल ने कहा कि झारखंड के खनिज संसाधनों की खोज करने वाले तकनीकी विशेषज्ञ ही राज्य को भविष्य की दिशा दिखा सकते हैं। इसलिए अन्वेषण से लेकर खनन और खनिजों के आर्थिक उपयोग तक पूरी प्रक्रिया को नई तकनीक और बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप विकसित करना जरूरी है।
देश-विदेश के उद्योगों को खनिज उपलब्ध करा रहा झारखंड
खान निदेशक राहुल सिन्हा ने कहा कि झारखंड ने वर्षों से देश-विदेश के कई उद्योगों के साथ-साथ पावर प्लांटों को खनिज उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आने वाले वर्षों में राज्य को खनिज उत्पादन और अन्वेषण को और अधिक बढ़ाने की दिशा में काम करना होगा।
इसके लिए अगले 10, 20 वर्ष और उससे आगे की दीर्घकालिक नीतियां बनानी जरूरी हैं, ताकि सतत और पर्यावरण-अनुकूल खनन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि खनन प्रक्रिया की शुरुआत भूतात्विक अन्वेषण से होती है।
यदि अन्वेषण और रिपोर्ट तैयार करने के चरण में ही वन क्षेत्र, भूमि, सीमांकन और पर्यावरण से जुड़ी संभावित समस्याओं की स्पष्ट पहचान कर ली जाए, तो आगे नीलामी और खनन लीज की प्रक्रिया में काफी सहूलियत होगी।
उन्होंने कहा कि खदान शुरू करने के साथ उसके फाइनल माइन क्लोजर प्लान पर भी ध्यान देना जरूरी है, ताकि खनन समाप्त होने के बाद पर्यावरणीय संतुलन और स्थानीय लोगों के हित सुरक्षित रह सकें।
पिछले दस वर्षों में 15 ब्लॉक किए गए तैयार
झारखंड में खनिज संपदा के वैज्ञानिक दोहन और राज्य के राजस्व में बढ़ोतरी के उद्देश्य से भूवैज्ञानिक अन्वेषण के कार्यों में तेजी आई है। भूतत्व निदेशालय और विभिन्न केंद्रीय अन्वेषण एजेंसियों द्वारा पिछले 10 वर्षों के दौरान राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में प्रमुख खनिजों की खोज और उनके भंडार का आकलन किया गया है।
इस दौरान कई खनिज ब्लॉकों की पहचान की गई है, जिनमें से कुछ की नीलामी हो चुकी है, जबकि कई अन्य नीलामी के लिए तैयार हैं। वहीं, नीलामी के लिए तैयार ब्लाकों में चूना पत्थर एवं डोलोमाइट के पांच, लौह अयस्क एवं मैंगनीज के चार, बाक्साइट के दो, तांबे का एक और ग्रेफाइट का एक ब्लाक शामिल है।
पन्ना और यूरेनियम के क्षेत्र में भी प्रगति
राज्य में पन्ना के दो ब्लॉकों में भूवैज्ञानिक अन्वेषण का कार्य पूरा किया जा चुका है। खान मंत्रालय के सुझाव के आधार पर खनिज एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 17(ए) के तहत इन ब्लाकों को झारखंड राज्य खनिज विकास निगम लिमिटेड के लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव है।
दूसरी ओर, परमाणु खनिज प्रभाग के अनुरोध पर बानाडूंगरी यूरेनियम ब्लॉक का सटीक सीमांकन और भूमि वर्गीकरण का कार्य भी भूतत्व निदेशालय द्वारा पूरा कर लिया गया है।
पिछले एक दशक में किए गए अन्वेषण कार्यों का ब्यौरा
| खनिज | अन्वेषण कार्य |
|---|---|
| लौह अयस्क एवं मैंगनीज | 33% |
| बॉक्साइट | 19% |
| ग्रेफाइट | 16% |
| चूना पत्थर एवं डोलोमाइट | 16% |
| तांबा | 4% |
| लिथियम | 4% |
| सोना | 4% |
| पन्ना | 3% |
| यूरेनियम | 1% |
