झारखंड में मानक पूरे नहीं करने वाले सभी नर्सिंग कॉलेज होंगे बंद, नामांकन पर रोक के आदेश
अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने झारखंड के उन नर्सिंग कॉलेजों को बंद करने का निर्देश दिया है, जिन्होंने तीन साल से नामांकन लेने के बावजूद निर्धारित मा ...और पढ़ें

झारखंड में नियमों का पालन नहीं करने वाले नर्सिंग कालेजों पर लगेगा अधिकतम दंड।
HighLights
अपर मुख्य सचिव ने नामांकन रोकने और जुर्माना लगाने के निर्देश दिए।
झारखंड में तीन साल से मानक पूरे न करने वाले कॉलेज बंद होंगे।
एनओसी से पहले अनिवार्य निरीक्षण और ऑनलाइन प्रक्रिया होगी।
राज्य ब्यूरो, रांची। राज्य के वैसे नर्सिंग कालेज, जो तीन वर्ष से नामांकन तो ले रहे हैं, लेकिन अभी तक निर्धारित मानकों को पूरा नहीं किया है, उन्हें बंद किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि ऐसे संस्थानों के निलंबन पर विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने ऐसे कालेजों को शो-काज नोटिस जारी करने तथा फिलहाल नामांकन पर रोक लगाने का निर्देश दिया। अपर मुख्य सचिव ने सोमवार को नर्सिंग कालेजों को मान्यता प्रदान करने को लेकर आयोजित निष्पादन समिति की बैठक में ये निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि नियमों का पालन नहीं करने वाले कालेजों पर अधिकतम जुर्माना लगाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने विभिन्न कमियों के आधार पर जुर्माने की राशि तय की गई है। बैठक में राज्य के 61 नर्सिंग कालेजों द्वारा एनओसी के लिए दिए गए आवेदनों की समीक्षा की गई।
इन आवेदनों पर सरकार के अनुमोदन के बाद योग्य पाये जानेवाले संस्थानों को एनओसी प्रदान किया जाएगा। अपर मुख्य सचिव ने काउंसिल की बैठक 15 दिनों के भीतर आयोजित करने का निर्देश दिया।
इस क्रम में उन्होंने कालेजों की आधारभूत सुविधाओं की जानकारी लेते हुए अधिकारियों से पूछा कि संबंधित संस्थान अपनी जमीन पर संचालित हैं या लीज पर, कितनी जमीन उपलब्ध है, कितने कमरे हैं तथा कालेज नया है या पहले से संचालित है।
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उन्होंने निर्देश दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित कालेजों के लिए जमीन की रसीद और शहरी क्षेत्रों में होल्डिंग टैक्स की स्थिति की भी जांच की जाए। यदि किसी कालेज को पहले से मौका दिया गया है तो उसे अब तक अपना भवन निर्माण कर लेना चाहिए था।
ऐसे मामलों में लीज या किराये की व्यवस्था की नवीनीकरण स्थिति की भी समीक्षा करने का निर्देश दिया गया। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि किसी भी कालेज को एनओसी देने से पहले अनिवार्य रूप से निरीक्षण किया जाए।
निरीक्षण के दौरान चार अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य होगी, जिनमें संबंधित जिले के सिविल सर्जन, रजिस्ट्रार, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर और अपर समाहर्ता सम्मिलित होंगे। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी निरीक्षण की फोटो ऑनलाइन अपलोड की जाएं और निरीक्षण में संबंधित अधिकारी की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
बैठक में निदेशक प्रमुख डा. सिद्धार्थ सान्याल, संयुक्त सचिव सीमा कुमारी उदयपुरी, उपसचिव ध्रुव प्रसाद सहित विभाग के कई अधिकारी
उपस्थित थे।
पायलट प्रोजेक्ट के तहत पांच सीएचसी में शुरू होगी नर्सिंग की पढ़ाई
बैठक में अपर मुख्य सचिव ने नर्सिंग छात्रों के बेहतर प्रशिक्षण के लिए कालेजों को सरकारी या निजी अस्पतालों तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) से जोड़ने का निर्देश दिया। उन्होंने पायलट प्रोजेक्ट के रूप में कम से कम पांच सीएचसी में तत्काल नर्सिंग की कक्षाएं शुरू करने का भी निर्देश दिया, ताकि भविष्य में इस व्यवस्था का विस्तार किया जा सके।
ऑनलाइन होगी आवदेन की प्रक्रिया
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि अब ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएं और पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जाए। उन्होंने सभी नर्सिंग कालेजों में फैकल्टी का एचआर ऑनलाइन प्रदर्शित करने, बायोमेट्रिक अटेंडेंस लागू करने तथा सीसीटीवी कैमरे लगाने के भी निर्देश।
बता दें कि झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य में क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि बिना निबंधन के कोई भी अस्पताल, नर्सिंग होम या क्लीनिक संचालित नहीं होगा। मरीजों को 72 घंटे में मेडिकल रिकॉर्ड उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।