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    झारखंड में आंधी-बारिश से बिजली व्यवस्था बेपटरी, रांची समेत कई जिलों में ब्लैकआउट; अलर्ट मोड में निगम

    Updated: Fri, 01 May 2026 01:55 AM (IST)

    तेज आंधी और बारिश के कारण झारखंड के कई जिलों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) अलर्ट मोड पर आ गया है। ...और पढ़ें

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    राज्य ब्यूरो, रांची। तेज आंधी और भारी बारिश के बाद राज्य के कई जिलों में बिजली आपूर्ति बाधित होने पर झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। निगम के सीएमडी के. श्रीनिवासन ने सभी एरिया बोर्ड के महाप्रबंधकों को युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य चलाने का निर्देश दिया है। 

    उन्होंने स्पष्ट कहा है कि उपभोक्ताओं को जल्द से जल्द सामान्य बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराना फिलहाल विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    राजधानी रांची सहित गुमला, हजारीबाग, धनबाद, बोकारो और पलामू के कई इलाकों में तेज हवा और वर्षा के कारण बिजली के तार टूटने, पोल क्षतिग्रस्त होने और ट्रांसफार्मरों में खराबी आने की सूचना मिली है। कई क्षेत्रों में पेड़ गिरने से फीडर लाइन प्रभावित हुई, जिससे शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में आपूर्ति व्यवस्था चरमरा गई।

    अतिरिक्त मैनपावर की स्वीकृति, निदेशक स्वयं कर रहे निगरानी

    सीएमडी के निर्देश के बाद निगम मुख्यालय ने सभी प्रभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त तकनीकी मैनपावर की स्वीकृति दे दी है। फील्ड स्तर पर अभियंताओं, लाइनमैन और तकनीकी कर्मचारियों की अतिरिक्त टीमों को लगाया गया है ताकि खराबी की पहचान कर तत्काल सुधार किया जा सके। 

    बिजली वितरण निगम के निदेशक प्रभात कुमार श्रीवास्तव स्वयं स्थिति की लगातार निगरानी कर रहे हैं। वे एरिया बोर्ड के महाप्रबंधकों और कार्यपालक अभियंताओं से लगातार संपर्क में हैं और हर कुछ घंटे पर प्रगति रिपोर्ट ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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    ट्रांसफार्मर बदलने की समय सीमा तय

    निगम ने ट्रांसफार्मर खराब होने की स्थिति में स्पष्ट समय सीमा भी तय की है। शहरी क्षेत्रों में खराब ट्रांसफार्मर को छह से आठ घंटे के भीतर बदला जाएगा। 

    ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतम 48 घंटे के भीतर नया ट्रांसफार्मर लगाया जाएगा। इसके लिए क्षेत्रीय गोदामों में अतिरिक्त ट्रांसफार्मर और जरूरी उपकरण उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं। इससे लंबी अवधि तक बिजली बाधित रहने की समस्या कम करने की कोशिश की जा रही है।

    अस्पतालों और जलापूर्ति केंद्रों पर विशेष चौकसी

    बिजली निगम ने अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और पेयजल आपूर्ति केंद्रों को संवेदनशील श्रेणी में रखा है। इन स्थानों पर बिजली बाधित न हो, इसके लिए अलग से निगरानी व्यवस्था बनाई गई है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जहां भी ऐसी सेवाएं प्रभावित हों, वहां मरम्मत कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। 

    निगम का मानना है कि गर्मी के मौसम में जलापूर्ति और अस्पतालों की निर्बाध बिजली व्यवस्था बनाए रखना आम लोगों के लिए बेहद जरूरी है, इसलिए इन संस्थानों पर विशेष फोकस किया जा रहा है।

    मांग और आपूर्ति का दबाव भी चुनौती

    राज्य में पहले से बढ़ती गर्मी के कारण बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में राज्य में औसतन 1500 से 1700 मेगावाट बिजली की मांग दर्ज की जा रही है। ऐसे में मौसम जनित तकनीकी खराबी ने स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। 

    रांची शहरी क्षेत्र में अकेले लगभग 350 से 400 मेगावाट बिजली की जरूरत पड़ रही है। वहीं औद्योगिक जिलों धनबाद और बोकारो में भी मांग बढ़ी हुई है। निगम अधिकारियों का कहना है कि मरम्मत कार्य पूरा होते ही आपूर्ति संतुलन बेहतर होगा।

    निदेशक प्रभात कुमार श्रीवास्तव ने आम नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है। उन्होंने कहा कि जहां भी तार टूटने, पोल गिरने या ट्रांसफार्मर से चिंगारी जैसी समस्या दिखे, लोग तुरंत स्थानीय बिजली कार्यालय या हेल्पलाइन को सूचना दें। 

    उन्होंने कहा कि हमारी पूरी कोशिश है कि खराब मौसम के बावजूद बिजली व्यवस्था जल्द सामान्य हो। फील्ड में सभी टीमें सक्रिय हैं और उपभोक्ताओं को राहत देना हमारी पहली जिम्मेदारी है।