सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: प्राइमरी शिक्षकों को टीईटी पास करने के लिए मिला अतिरिक्त समय
सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सहित अन्य राज्यों के प्राइमरी शिक्षकों को टीईटी पास करने की समय सीमा 31 अगस्त, 2028 तक बढ़ा दी है। पहले यह सीमा 2027 थी। कोर्ट ...और पढ़ें
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बच्चों की शिक्षा गुणवत्ता पर कोर्ट का जोर।
HighLights
टीईटी पास करने की समय सीमा 2028 तक बढ़ी।
झारखंड के चालीस हजार शिक्षकों को मिला लाभ।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड सहित अन्य राज्यों, शिक्षक संगठनों और व्यक्तिगत शिक्षकों की ओर से दाखिल की गईं 60 से अधिक समीक्षा याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अपना निर्णय सुनाते हुए अधिकांश याचिकाएं खारिज कर दीं।
अदालत ने शिक्षकों के भविष्य और बच्चों की शिक्षा के व्यावहारिक पहलुओं को देखते हुए टेट (टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट) उत्तीर्ण करने की पिछली समय सीमा को बढ़ा दिया है। इस आदेश का असर झारखंड के करीब चालीस हजार प्राइमरी शिक्षकों पर पड़ेगा।
तीन साल का अतिरिक्त समय
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि सेवारत शिक्षकों के लिए टेट पास अनिवार्य होना संविधान के अनुच्छेद 21ए के तहत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है।
कोर्ट ने पहले के फैसले (अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र सरकार) में दिए गए दो साल के समय को बढ़ाते हुए अब तीन साल का समय दिया है।
इसका मतलब है कि जिन शिक्षकों के पास पांच साल से अधिक की सेवा शेष है, उन्हें अब 31 अगस्त, 2028 तक टेट उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। पहले यह समय सीमा 31 अगस्त, 2027 थी।
कोर्ट ने क्या कहा
अदालत ने 36 पन्नों के निर्णय में स्पष्ट किया कि आरटीई अधिनियम, 2009 की धारा 23 के प्रविधान पूर्वव्यापी रूप से लागू नहीं होते, बल्कि वे सेवारत शिक्षकों को शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने के लिए पर्याप्त समय देते हैं।
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कोर्ट ने कहा कि आरटीई अधिनियम बाल-केंद्रित कानून है। शिक्षकों की सेवा बच्चों की शैक्षिक भविष्य की कीमत पर नहीं आ सकती।
कोर्ट ने यह भी कहा कि रिव्यू याचिकाओं का दायरा बहुत सीमित है। रिव्यू याचिका को अपील का दूसरा रूप नहीं बनाया जा सकता। लेकिन अदालत ने इन याचिकाओं की विस्तृत सुनवाई की।
राज्यों और शिक्षकों की दलीलें खारिज
झारखंड के कई शिक्षक संघ और अन्य राज्य सरकारों का यह तर्क था कि टेट की अनिवार्यता सेवा की शर्तों में पूर्वव्यापी बदलाव है और इससे बड़े पैमाने पर शिक्षक बेरोजगार हो सकते हैं, लेकिन अदालत इसे खारिज कर दिया।
पीठ ने कहा कि आरटीई अधिनियम लागू हुए लगभग डेढ़ दशक से अधिक का समय बीत चुका है और यह पर्याप्त अवधि है।
साथ ही, एनसीटीई अधिनियम की धारा 12ए के तहत दी गई छूट के तर्क को भी कोर्ट ने यह कहते हुए नकार दिया कि अधिनियम के प्रविधान साफ हैं और उनकी अवहेलना नहीं की जा सकती।
राहत तो मिली, लेकिन शर्तों के साथ
सुप्रीम कोर्ट ने सभी रिव्यू याचिकाएं खारिज कर दीं, लेकिन अनुच्छेद 142 के तहत दी गई इस राहत के साथ कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश भी दिए हैं। अदालत ने कि राज्य और संबंधित प्राधिकारी टेट की परीक्षाएं समय-समय पर कराएं।
वर्ष में दो बार भी किया जा सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि समय सीमा बढ़ाने के लिए अब कोई और याचिका स्वीकार नहीं की जाएगी।
अपने आदेश के अंत में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें समीक्षा योग्य कोई त्रुटि नहींदिखती। इसलिए सभी रिव्यू याचिकाओं को समय सीमा में विस्तार के साथ खारिज किया जाता है।