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    गुजरात और महाराष्ट्र से भी आगे निकला झारखंड, राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक में देश के टॉप 3 राज्यों में मिली जगह

    Updated: Mon, 16 Mar 2026 12:24 PM (IST)

    झारखंड ने नीति आयोग के राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक (FHIs)-2026 में 50.5 अंकों के साथ देश के शीर्ष तीन राज्यों में स्थान बनाया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोर ...और पढ़ें

    आर्थिक प्रबंधन और वित्तीय अनुशासन के क्षेत्र में झारखंड का नया कीर्तिमान। (फोटो- फाइल)

    आर्थिक प्रबंधन और वित्तीय अनुशासन के क्षेत्र में झारखंड का नया कीर्तिमान। (फोटो- फाइल)

    HighLights

    1. 50.5 अंकों के साथ ओडिशा और गोवा के साथ स्थान।

    2. नियंत्रित राजकोषीय घाटा, मजबूत कर राजस्व प्रमुख कारण।

    राज्य ब्यूराे, रांची। झारखंड ने आर्थिक प्रबंधन और वित्तीय अनुशासन के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। नीति आयोग द्वारा जारी राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक (FHIs)-2026 की रिपोर्ट में झारखंड ने 50.5 अंकों के साथ देश के शीर्ष तीन राज्यों में अपना स्थान सुरक्षित किया है। 
     
    इस प्रतिष्ठित सूची में झारखंड के साथ ओडिशा और गोवा शामिल हैं। यह उपलब्धि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य की सुदृढ़ होती वित्तीय स्थिति और विकासपरक नीतियों का परिणाम मानी जा रही है। 
     

    वित्तीय अनुशासन में पड़ोसी राज्यों से बहुत आगे 

    वित्तीय वर्ष 2023-24 के आंकड़ों के विश्लेषण पर रिपोर्ट जारी की गई है, जिसमें देश के 18 प्रमुख राज्यों के प्रदर्शन को जांचा गया था। झारखंड ने इस रैंकिंग में न केवल बेहतर प्रदर्शन किया है, बल्कि अपने पड़ोसी राज्यों बिहार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश को भी काफी पीछे छोड़ दिया है। 
     
    इतना ही नहीं, दक्षिण भारत के विकसित माने जाने वाले राज्य और गुजरात जैसे आर्थिक दिग्गज भी इस सूचकांक में झारखंड से पीछे रह गए हैं। यह राज्य के लिए अचदी खबर है। 
     

    रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड का वित्तीय प्रदर्शन दो मुख्य स्तंभों पर टिका है

    • नियंत्रित राजकोषीय घाटा: राज्य ने अपने राजकोषीय घाटे को सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के 3 प्रतिशत से नीचे रखने में सफलता पाई है, जो आर्थिक स्थिरता का एक बड़ा मानक है।
    • मजबूत करराजस्व: राज्य के कुल राजस्व में कर राजस्व की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से अधिक रही है। यह दर्शाता है कि सरकार ने कर संग्रह प्रणाली को प्रभावी और पारदर्शी बनाया है। 

    विकास कार्यों पर संतुलित व्यय 

    नीति आयोग ने रेखांकित किया है कि झारखंड का व्यय ढांचा अब पहले से कहीं अधिक संतुलित है। सरकार ने प्रशासनिक खर्चों के बजाय आधारभूत संरचना (Infrastructure), सामाजिक सुरक्षा और जनकल्याणकारी योजनाओं पर निवेश बढ़ाया है। 
     
    इसके साथ ही, कर्ज प्रबंधन (Debt Management) के मामले में भी राज्य की स्थिति संतोषजनक पाई गई है। रिपोर्ट में Capital Expenditure की गुणवत्ता में और सुधार करने तथा निवेश को आकर्षित करने के लिए और अधिक प्रोत्साहन देने की सलाह दी गई है। 
     
    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि झारखंड इसी वित्तीय अनुशासन के साथ आगे बढ़ता रहा, तो वह जल्द ही देश की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में अग्रणी होगा। यह रैंकिंग न केवल राज्य की आर्थिक छवि को वैश्विक स्तर पर मजबूत करेगी, बल्कि आने वाले समय में निवेशकों के भरोसे को भी बढ़ाएगी।