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24 जिलों में एक साथ 30 मिनट तक पढ़ते रहे लोग, झारखंड को मिला 'एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' का सम्मान

Published: Fri, 06 Nov 2026 06:12 PM (IST)

झारखंड को 'रीड-ए-थान' में सर्वाधिक प्रतिभागियों की भागीदारी के लिए एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से मान्यता मिली है। यह उपलब्धि ...और पढ़ें

झारखंड को रीड-ए-थान में सर्वाधिक भागीदारी के लिए एशिया रिकॉर्ड मिला। जागरण

झारखंड को रीड-ए-थान में सर्वाधिक भागीदारी के लिए एशिया रिकॉर्ड मिला। जागरण

HighLights

  1. झारखंड को रीड-ए-थान में सर्वाधिक भागीदारी के लिए एशिया रिकॉर्ड मिला।

  2. 28 लाख से अधिक प्रतिभागियों ने राज्यव्यापी पठन गतिविधि में हिस्सा लिया।

जागरण संवाददाता, रांची। झारखंड को विभिन्न स्थानों पर आयोजित रीड-ए-थान में सर्वाधिक प्रतिभागियों की भागीदारी का रिकार्ड बनाने के लिए एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा मान्यता प्रदान की गई है। यह उपलब्धि बच्चों और समुदायों के बीच पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने के राज्य के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

यह मान्यता 8 सितंबर 2026 को आयोजित राज्यव्यापी रीड-ए-थान के लिए मिली है, जिसका आयोजन ‘मेरे शब्द, मेरी कहानी’ थीम पर आधारित रीडिंग कैंपेन 2026 के अंतर्गत किया गया था। इस दौरान झारखंड के सभी 24 जिलों में बच्चों, शिक्षकों, समुदाय के सदस्यों और जिला अधिकारियों सहित कुल 28,85,734 प्रतिभागियों ने एक साथ पठन गतिविधि में भाग लिया।

ड्रॉप एवरीथिंग एंड रीड (अपने सभी काम रोककर पढ़ें) की अवधारणा से प्रेरित होकर प्रतिभागियों ने अपनी दैनिक दिनचर्या से समय निकालकर सुबह 11 बजे से 11:30 बजे तक 30 मिनट पढ़ने के लिए समर्पित किए। कक्षाओं और विद्यालयों से लेकर घरों, समुदायों और सार्वजनिक स्थलों तक, इस पहल ने एक सामान्य पठन गतिविधि को पढ़ने के आनंद का उत्सव मनाने वाले राज्यव्यापी अभियान में बदल दिया।

उमा शंकर सिंह, सचिव, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने जमीनी स्तर पर कार्यरत टीमों के प्रयासों की सराहना की और बच्चों में आनंददायक पठन की संस्कृति विकसित करने के लिए इस तरह की पहलों को निरंतर जारी रखने के महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने अभियान के क्रियान्वयन में सहयोग देने वाले सभी सीएसओ साझेदारों के प्रति भी आभार व्यक्त किया। रीड-ए-थान में बच्चों, शिक्षकों, परिवारों, सरकारी अधिकारियों, शिक्षा क्षेत्र के साझेदारों और स्थानीय समुदायों की व्यापक भागीदारी देखने को मिली। यह भागीदारी पढ़ने को दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने की सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह पहल केवल एक रिकार्ड बनाने तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसका उद्देश्य नियमित पठन अभ्यासों को संस्थागत स्वरूप देना और झारखंड में एक स्थायी पठन संस्कृति को मजबूत करना भी था।

इसने बच्चों को पढ़ने, कल्पना करने, स्वयं को अभिव्यक्त करने और सीखने के लिए प्रोत्साहित किया। साथ ही, बच्चों की पठन यात्रा में शिक्षकों, परिवारों और समुदायों की भूमिका को भी सशक्त बनाया। यह उपलब्धि झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (जेईपीसी), जिला शिक्षा टीमों, सरकारी अधिकारियों और विभिन्न सीएसओ के साझेदारों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।

इन सभी के समन्वय और जमीनी स्तर पर सक्रिय सहभागिता से राज्य के सभी 24 जिलों में व्यापक भागीदारी सुनिश्चित हो सकी। एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से मिली यह मान्यता स्वतंत्र पाठकों को विकसित करने और ऐसी पठन संस्कृति के निर्माण की दिशा में झारखंड की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जहां पढ़ना आनंददायक हो और दैनिक जीवन का साझा अभ्यास बने। 

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