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    झारखंड में थैलेसीमिया मरीजों की जिंदगी संकट में, 50 बच्चों का इलाज अटका; सरकार का 15 लाख देने का वादा नहीं हुआ पूरा

    Updated: Sat, 28 Mar 2026 08:24 AM (IST)

    झारखंड में थैलेसीमिया और सिकल सेल एनीमिया के 50 मरीज बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए आर्थिक सहायता का इंतजार कर रहे हैं। सरकार द्वारा 15 लाख रुपये की मदद ...और पढ़ें

    थैलेसीमिया पीड़ितों के इलाज में देरी पर 50 बोनमैरो ट्रांसप्लांट अटके। (AI Generated Image)

    थैलेसीमिया पीड़ितों के इलाज में देरी पर 50 बोनमैरो ट्रांसप्लांट अटके। (AI Generated Image)

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    जागरण संवाददाता, रांची। झारखंड में थैलेसीमिया और सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित बच्चों के इलाज को लेकर गंभीर स्थिति सामने आई है। राज्य में लगभग 50 मरीज बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए तैयार हैं, लेकिन आर्थिक सहयोग के अभाव में उनका इलाज शुरू नहीं हो पा रहा है। इस देरी ने पीड़ित परिवारों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि चिकित्सकों के अनुसार ट्रांसप्लांट एक सीमित समयावधि में ही संभव होता है।

    सरकार ने प्रत्येक मरीज को बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए 15 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया था। यह घोषणा 9 दिसंबर 2025 को विधानसभा के चालू सत्र में स्वास्थ्य मंत्री द्वारा विधायक दल के नेता प्रदीप यादव के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जवाब में की गई थी।

    हालांकि, तीन महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई है। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े संगठनों का कहना है कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो कई बच्चों के लिए ट्रांसप्लांट की संभावना समाप्त हो सकती है।

    सदर अस्पताल में प्रस्तावित ट्रांसप्लांट यूनिट का इंतजार

    रांची के सदर अस्पताल में बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट खोलने की योजना पहले ही सामने आ चुकी है और इसे लेकर तैयारी की भी की जा रही है। लेकिन अब तक यह सुविधा शुरू नहीं हो सकी है, जिससे मरीजों को राज्य के बाहर महंगे इलाज के लिए जाना पड़ रहा है। सिविल सर्जन डा. प्रभात कुमार बताते हैं कि जल्द इस यूनिट को शुरू किया जाएगा, कई स्तर पर काम चल रहा है।

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    जरूरी दवाओं की भी किल्लत

    थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए आयरन नियंत्रण की दवाएं बेहद जरूरी होती हैं, जिन्हें नियमित रूप से लेना पड़ता है। वर्तमान में यह दवाएं सदर अस्पताल में उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण परिजनों को बाहर से महंगे दामों पर इन्हें खरीदना पड़ रहा है। मरीजों को प्रतिदिन लगभग 6 टैबलेट लेनी होती हैं, जो एक महीने में खत्म हो जाती हैं। यह प्रक्रिया जीवनभर चलती है, जिससे गरीब परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

    संगठनों ने सरकार से लगाई गुहार

    लहू बोलेगा रक्तदान संगठन और झारखंड थैलेसीमिया पीड़ित एसोसिएशन ने राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन के संस्थापक नदीम खान ने अपील करते हुए कहा है कि मरीजों को जरूरी दवाएं निश्शुल्क उपलब्ध कराई जाएं और बोन मैरो ट्रांसप्लांट योजना को जल्द लागू किया जाए।

    उन्होंने यह भी मांग की कि पूर्व में सौंपे गए ज्ञापन पर कार्रवाई करते हुए अस्पतालों को आवश्यक संसाधनों से सुसज्जित किया जाए, ताकि मरीजों को समय पर जीवनरक्षक उपचार मिल सके।

    सरकार के रुख पर टिकी निगाहें

    अब देखना होगा कि सरकार इस गंभीर स्वास्थ्य मुद्दे पर कितनी जल्द कार्रवाई करती है। फिलहाल, पीड़ित परिवार और सामाजिक संगठन प्रशासन के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं, जबकि हर गुजरता दिन मरीजों के लिए जोखिम बढ़ा रहा है।

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