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झारखंड में कहीं कमरे में बंद हैं 30 वेंटिलेटर तो कहीं खराब, RIMS को छठ बाद मिलेंगी 45 मशीनें

Published: Fri, 06 Nov 2026 02:25 PM (IST)

झारखंड के सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर उपलब्ध होने के बावजूद डॉक्टर व तकनीकी कर्मियों की कमी और बंद आईसीयू के कारण उनका उपयोग नहीं हो पा रहा है।

कहीं कमरे में बंद हैं 30 वेंटिलेटर तो कहीं खराब

कहीं कमरे में बंद हैं 30 वेंटिलेटर तो कहीं खराब

HighLights

  1. झारखंड के कई जिलों में वेंटिलेटर स्टाफ की कमी से बेकार।

  2. रांची रिम्स को छठ के बाद 45 नए वेंटिलेटर मिलेंगे।

  3. कोडरमा, लोहरदगा जैसे जिलों में वेंटिलेटर धूल फांक रहे।

जागरण संवाददाता, रांची। राज्य के सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर की उपलब्धता और उनके इस्तेमाल की तस्वीर स्वास्थ्य व्यवस्था की दोहरी चुनौती सामने ला रही है। 

एक ओर गंभीर मरीजों के इलाज के लिए वेंटिलेटर की जरूरत बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर कई जिलों में लाखों रुपये की लागत से खरीदी गई मशीनें डॉक्टर और प्रशिक्षित तकनीकी कर्मियों के अभाव में धूल फांक रही हैं। 

कहीं आईसीयू बंद होने से मशीनों का इस्तेमाल नहीं हो रहा, तो कहीं लंबे समय तक रखे रहने के कारण उनके खराब होने की आशंका है। इस बीच राजधानी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स को छठ के बाद 45 नए वेंटिलेटर मिलने की उम्मीद है। लंबे इंतजार और प्रयास के बाद इनकी खरीदारी का टेंडर फाइनल हुआ है।

पहले चरण में 100 वेंटिलेटर खरीदने की योजना 

रिम्स में पहले चरण में 100 वेंटिलेटर खरीदने की योजना थी, लेकिन फिलहाल 45 मशीनों की खरीद पर सहमति बनी है। इनका इस्तेमाल पीडियाट्रिक्स सहित अन्य वार्डों में किया जाएगा। इसके बाद ट्रामा सेंटर के लिए भी अलग से वेंटिलेटर मंगाने की योजना है। 

यानी एक तरफ रिम्स अपनी जरूरत पूरी करने के लिए नए उपकरण खरीद रहा है, तो दूसरी ओर जिलों में पहले से उपलब्ध मशीनों का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। रिम्स अधीक्षक डा. हीरेंद्र बिरुआ बताते हैं अस्पताल में वेंटिलेटर की जरूरत को देखते हुए खरीदारी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। 

पहले चरण में 45 वेंटिलेटर मंगाए जा रहे हैं। इन्हें पीडियाट्रिक्स सहित अन्य जरूरत वाले वार्डों में लगाया जाएगा। इसके बाद ट्रामा सेंटर के लिए भी वेंटिलेटर की व्यवस्था करने की योजना है।

कई जिलों में मशीनें हैं, पर संचालन की व्यवस्था नहीं

लोहरदगा, कोडरमा, पलामू, चतरा और गढ़वा में वेंटिलेटर उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को इनका अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है। इन अस्पतालों में आईसीयू संचालन, प्रशिक्षित डॉक्टर और तकनीकी कर्मियों की कमी बड़ी बाधा बनी हुई है। इसके उलट गुमला सदर अस्पताल में उपलब्ध दोनों वेंटिलेटर चालू हालत में हैं और जरूरत पड़ने पर गंभीर मरीजों के उपचार में इस्तेमाल किए जाते हैं।

लोहरदगा : पांच वेंटिलेटर, लेकिन आइसीयू बंद

लोहरदगा सदर अस्पताल में पांच वेंटिलेटर उपलब्ध हैं। सभी मशीनें आईसीयू में रखी हैं, लेकिन आईसीयू हमेशा बंद रहता है। कोरोना काल के बाद से इनका इस्तेमाल नहीं हुआ है। अस्पताल में न तो इनके संचालन के लिए डॉक्टर हैं और न ही आईसीयू टेक्नीशियन। स्थिति यह है कि लंबे समय से जांच नहीं होने के कारण मशीनें चालू हालत में हैं या खराब, इसकी जानकारी भी नहीं है।

कोडरमा : 24 बेड की व्यवस्था, अधिकतर मशीनें खराब

कोरोना काल में कोडरमा सदर अस्पताल में 24 वेंटिलेटर युक्त बेड की खरीदारी की गई थी। लेकिन टेक्नीशियन के अभाव में वेंटिलेटर कभी चालू ही नहीं हो सके। रखे-रखे अधिकतर मशीनें खराब हो गईं। फिलहाल इन्हें अस्पताल से हटा दिया गया है। उपकरणों की खरीद के बावजूद मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल सका।

गुमला : दोनों वेंटिलेटर चालू, जरूरत पर मरीजों को सुविधा

गुमला सदर अस्पताल में दो वेंटिलेटर उपलब्ध हैं और दोनों चालू हालत में हैं। कोरोना काल में लगाए गए इन उपकरणों को आईसीयू वार्ड में रखा गया है। जरूरत पड़ने पर गंभीर मरीजों के उपचार में इनका इस्तेमाल किया जाता है। जिले में उपलब्ध वेंटिलेटर के उपयोग की स्थिति अन्य जिलों की तुलना में बेहतर है।

पलामू : आठ नई मशीनें, आईसीयू बंद रहने से इस्तेमाल नहीं

मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आठ नए वेंटिलेटर उपलब्ध हैं। सभी मशीनें आईसीयू में रखी गई हैं, लेकिन आईसीयू हमेशा बंद रहने के कारण इनका उपयोग नहीं हो पा रहा है। जानकारी के अनुसार, वेंटिलेटर संचालन के लिए 10 डॉक्टरों को रिम्स में प्रशिक्षण दिया गया है। डॉक्टरों ने स्वास्थ्यकर्मियों को भी प्रशिक्षित किया है। इसके बावजूद आइसीयू का संचालन नहीं होने से गंभीर मरीजों को सुविधा नहीं मिल रही है।

चतरा : 30 वेंटिलेटर ऊपरी तल्ले पर रखे

चतरा सदर अस्पताल में 30 वेंटिलेटर उपलब्ध हैं। सभी मशीनें अस्पताल के ऊपरी तल्ले पर रखी हुई हैं। कोरोना काल के बाद से इनका इस्तेमाल नहीं हुआ है। अस्पताल में न तो प्रशिक्षित डॉक्टर हैं और न ही वेंटिलेटर चलाने के लिए तकनीकी कर्मी। ऐसे में गंभीर मरीजों को जरूरत पड़ने पर इन मशीनों का लाभ मिलना मुश्किल है।

गढ़वा : 19 वेंटिलेटर कमरे में बंद, इस्तेमाल पर संशय

गढ़वा सदर अस्पताल में कोरोना काल के दौरान कुल 19 वेंटिलेटर उपलब्ध कराए गए थे। इनमें पांच मशीनें पुराने भवन के एक वार्ड में लगाई गई थीं, लेकिन एनेस्थेटिस्ट की कमी के कारण इनका इस्तेमाल नहीं हो सका। बाद में वार्ड को कैदी वार्ड में बदलने पर मशीनें हटा दी गईं। शेष 14 मशीनें भी बिना इस्तेमाल के पड़ी रहीं। फिलहाल सभी 19 वेंटिलेटर अस्पताल के प्रथम तल के एक कमरे में रखे हैं। लंबे समय से उपयोग नहीं होने के कारण इनके खराब होने की आशंका है। हालांकि, वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

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