'अध्यक्ष के आदेश पर जारी हुए थे परिणाम..', JPSC घोटाले में उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता का बड़ा खुलासा
सीआईडी पूछताछ में जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि उन्होंने 11वीं व 13वीं जेपीएससी के परिणाम अध्यक्ष एल. खियांग्ते के कहने पर प्रकाशित किए थे।

श्वेता गुप्ता ने अध्यक्ष के कहने पर परिणाम जारी करने का दावा किया।
HighLights
श्वेता गुप्ता ने अध्यक्ष के कहने पर परिणाम जारी करने का दावा किया।
धर्मेंद्र पर प्रश्न पत्र लीक करने का दबाव बनाने का आरोप।
राज्य ब्यूरो, रांची। जेपीएससी मेधा घोटाला मामले की जांच के क्रम में सीआईडी ने जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
सीआईडी की रिमांड पर पूछताछ के दौरान श्वेता गुप्ता ने खुद को निर्दोष बताया था और यह भी कहा था कि अध्यक्ष एल. खियांग्ते के कहने पर ही उसने 11वीं व 13 जेपीएससी परीक्षाफल तैयार किया और परीक्षाफल का प्रकाशन किया।
उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता के अनुसार परीक्षा नियंत्रक असीम किस्पोट्टा के अवकाश पर जाने व कार्मिक में योगदान के बाद आठ जून 2025 को जेपीएससी के अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने उन्हें परीक्षा नियंत्रक का दायित्व सौंपा था।
पूर्व परीक्षा नियंत्रक असीम किस्पोट्टा के कार्यकाल में ही 11वीं से 13वीं जेपीएससी की प्रारंभिक व मुख्य परीक्षा हो गई थी। अध्यक्ष ने इन परीक्षाओं के सफल अभ्यर्थियों के साक्षात्कार की जिम्मेदारी श्वेता गुप्ता को सौंप दी। इसी बीच लोकेश मिश्रा परीक्षा नियंत्रक के रूप में पदस्थापित हुए, लेकिन वे भी अवकाश पर चले गए और अपना अवकाश बढ़ाने लगे।
एक बार फिर अध्यक्ष ने श्वेता गुप्ता को ही 11वीं से 13वीं जेपीएससी के परिणाम की जिम्मेदारी सौंप दी। दस्तावेज के सत्यापन के लिए अध्यक्ष ने जेपीएससी की उप सचिव सरोजनी तिर्की की अध्यक्षता में एक टीम गठित कर दी। श्वेता गुप्ता के अनुसार अध्यक्ष ने उन्हें पीटी व मुख्य परीक्षा के अंक को जोड़कर रिजल्ट प्रकाशित करने को कहा था। उन्होंने रिजल्ट तैयार कर अध्यक्ष को सौंपा था।
वहां से जेपीएससी के तीनों सदस्यों डा. अजिता भट्टाचार्य, डा. जमाल अहमद व डा. अनिमा हांसदा के पास रिजल्ट गया। दस्तावेज सत्यापन हुआ और इसके बाद रिजल्ट जेपीएससी के सचिव के पास भेजा गया। अध्यक्ष के कहने पर रिजल्ट प्रकाशित हुआ।
श्वेता गुप्ता ने सीआईडी को बताया है कि परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसी टीडीपीएल के कर्मी उस्मान, एबाद, संजय कुमार, हेमंत व कंपनी के निदेशक रामवीर तथा सतपाल ही ओएमआर शीट में परिवर्तन व लिखित परीक्षा संचालन संबंधित काम देखते थे।
ओएमआर शीट में हेराफेरी के बाद उसकी स्कैनिंग प्रमोद तिवारी करता था। लिखित परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं का स्कैनिंग भी प्रमोद तिवारी ही करता था।
धर्मेंद्र की शिकायत अध्यक्ष से की थी
कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते का करीबी सहयोगी था। इसके बावजूद उसकी शिकायत श्वेता गुप्ता ने टीडीपीएल के निदेशक रामवीर के कहने पर एल. खियांग्ते से की थी, ताकि उसके विरुद्ध उचित कानूनी कार्रवाई हो सके।
रामवीर ने श्वेता गुप्ता को बताया था कि धर्मेंद्र प्रश्न पत्र आउट करने का दबाव बना रहा है। श्वेता गुप्ता ने सीआईडी को यह जानकारी सीआइडी के पूछे गए सभी 15 प्रश्नों के उत्तर में दी है।
उसने सीआईडी को यह भी बताया है कि टीडीपीएल के ब्लैकलिस्ट होने की जानकारी उसे मौखिक रूप से मिली थी। यह भी पता चला था कि टीडीपीएल का इंपैनलमेंट अध्यक्ष के आदेश पर हुआ था। एजेंसी की वित्तीय स्थिति ठीक थी।
उस्मान को वाट्सएप पर उत्तर भेजे जाने के सवाल पर उसने कहा है कि वह रांची से बाहर रहता था। परीक्षाफल के शीघ्र प्रकाशन के लिए ही उसे उत्तर भेजी जाती थी। स्कैनिंग रूप के सीसीटीवी फुटेज की लाइव निगरानी भी जेपीएससी के अध्यक्ष एल. खियांग्ते करते थे।
