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    गढ़वा में 100 से अधिक छात्राएं हुईं थी बीमार, अब कस्तूरबा स्कूल खरौंधी में क्यों पसरा है सन्नाटा?

    Updated: Tue, 07 Jul 2026 05:23 PM (IST)

    कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय खरौंधी में 26 जून को फूड प्वाइजनिंग के बाद से पढ़ाई ठप है। अभिभावक सुरक्षा चिंताओं के कारण छात्राओं को वापस भेजने को तै ...और पढ़ें

    खरौंधी कस्तूरबा विद्यालय में फूड प्वाइजनिंग के बाद पढ़ाई ठप छात्राएं नहीं लौटीं।

    खरौंधी कस्तूरबा विद्यालय में फूड प्वाइजनिंग के बाद पढ़ाई ठप छात्राएं नहीं लौटीं।

    HighLights

    1. 26 जून को फूड प्वाइजनिंग से सौ से अधिक छात्राएं बीमार हुईं।

    2. घटना के बाद से कस्तूरबा विद्यालय खरौंधी में पढ़ाई 11 दिनों से ठप।

    3. अभिभावक सुरक्षा सुनिश्चित होने तक छात्राओं को वापस नहीं भेज रहे।

    संकेत कुमार श्रीवास्तव, खरौंधी (गढ़वा)। झारखंड के गढ़वा जिले में स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय खरौंधी में विभागीय लापरवाही का बड़ा खामियाजा छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है।

    बीते 26 जून को हुए फूड प्वाइजनिंग कांड के बाद से पिछले 11 दिनों से स्कूल में पठन-पाठन पूरी तरह ठप है। स्कूल के अंशकालिक (पार्ट-टाइम) शिक्षक तो हर दिन आ रहे हैं, लेकिन स्कूल का ताला खोलने और पढ़ाई शुरू करवाने में खुद को असहाय पा रहे हैं।

    12वीं की छात्राओं को नहीं मिल रहा सर्टिफिकेट

    स्कूल बंद होने का सबसे बुरा असर बोर्ड परीक्षा पास कर चुकीं छात्राओं पर पड़ रहा है। इस विद्यालय से इस बार 44 छात्राओं ने 12वीं की बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण की है।

    अब आगे के कॉलेजों में दाखिला लेने के लिए ये छात्राएं अपना टीसी (अंक पत्र और प्रमाण पत्र) लेने के लिए इधर-उधर भटक रही हैं। इसके अलावा, जिन छात्राओं की कंपार्टमेंटल परीक्षा होनी है, उनके फॉर्म भरने को लेकर भी संशय बना हुआ है क्योंकि स्कूल का मुख्य कार्यालय बंद है।

    क्या था पूरा मामला?

    • 26 जून की घटना: कस्तूरबा विद्यालय खरौंधी में रात का खाना खाने के बाद एक साथ 100 से अधिक छात्राएं फूड प्वाइजनिंग का शिकार होकर गंभीर रूप से बीमार हो गई थीं।
    • अधिकारियों की कार्रवाई: जांच टीम की रिपोर्ट के बाद गढ़वा उपायुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा ने कड़ी कार्रवाई की। उन्होंने वार्डन, पूर्णकालिक शिक्षिका, लेखपाल और रसोइया (कुक) समेत 5 लोगों को तुरंत प्रभाव से सेवामुक्त (बर्खास्त) कर दिया।
    • सन्नाटे की वजह: इस सामूहिक कार्रवाई के बाद स्कूल का प्रबंधन संभालने वाला कोई नहीं बचा, जिससे स्कूल में प्रशासनिक गतिरोध पैदा हो गया है।

    डर के मारे बेटियों को स्कूल नहीं भेज रहे अभिभावक

    कस्तूरबा स्कूल में कुल 375 छात्राएं नामांकित हैं। घटना की रात बच्चियों की हालत देखकर डरे-सहमे अभिभावक उन्हें अपने साथ घर ले गए थे। अब दो हफ्ते बीतने को हैं, लेकिन विभाग स्कूल में नई व्यवस्था बहाल नहीं कर सका है।

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    स्थानीय अभिभावक अजय प्रसाद गुप्ता, रीना कुंवर और कमलेश चौधरी ने बताया कि लगभग दो सप्ताह से स्कूल बंद है। बच्चियां घर पर पढ़ाई के बजाय खेल रही हैं। जब तक विभाग स्कूल में सुरक्षा, साफ खाना और शुद्ध पानी का पुख्ता इंतजाम नहीं करता, तब तक हम अपनी बेटियों को वापस भेजने का जोखिम नहीं ले सकते। विभाग को पहले हमारा भरोसा जीतना होगा।"

    शिक्षकों का दर्द: 'आ रहे हैं, पर हाजिरी तक नहीं बन रही'

    स्कूल की अंशकालिक शिक्षिकाओं सीमा कुमारी, पूजा कुमारी, रुबी कुमारी, शशि कुमारी, रंजना कुमारी, कविता कुमारी और शिक्षक अमरनाथ चौबे ने बताया कि वे सभी नियम से स्कूल पहुंच रहे हैं। लेकिन स्कूल का मुख्य दफ्तर बंद होने के कारण उनकी न तो मैनुअल और न ही ऑनलाइन उपस्थिति (बायोमेट्रिक) बन पा रही है।

    वे केवल आगंतुक पंजी (विजिटर रजिस्टर) में दस्तखत कर पा रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि अभिभावक रोज फोन कर टीसी और कंपार्टमेंटल परीक्षा के बारे में पूछ रहे हैं, लेकिन अधिकारियों की तरफ से कोई गाइडलाइन न होने के कारण वे कोई जवाब नहीं दे पा रहे हैं।

    विभाग के सामने बड़ी चुनौती

    इस समय शिक्षा विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती खरौंधी कस्तूरबा स्कूल में नया स्टाफ नियुक्त कर बुनियादी व्यवस्थाओं (भोजन, पानी और सुरक्षा) को दुरुस्त करना है, ताकि अभिभावकों के मन से डर निकले और 375 बच्चियों की रुकी हुई पढ़ाई दोबारा शुरू हो सके।