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    मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनेगी, पंडित से जानिए पुण्य स्नान-दान एवं इसके महत्व

    By Sanjay Krishna Edited By: Kanchan Singh
    Updated: Fri, 09 Jan 2026 10:30 PM (IST)

    हृषिकेश पंचांग के अनुसार मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी, क्योंकि सूर्य 14 जनवरी रात 9:38 बजे मकर राशि में प्रवेश करेगा। इस दिन पवित्र नदियों में ...और पढ़ें

    मकर संक्रांति का पुण्य काल, स्नान दान 15 जनवरी को होगा।

    मकर संक्रांति का पुण्य काल, स्नान दान 15 जनवरी को होगा। 

    HighLights

    1. मकर संक्रांति 15 जनवरी को, सूर्य 14 रात 9:38 बजे मकर में।

    2. पवित्र नदियों में स्नान, तिल-कंबल दान का विशेष महत्व।

    3. खिचड़ी और तिल द्वादशी का भी इस दिन विशेष पुण्य।

    जागरण संवाददाता, रांची। पं रामदेव पांडेय ने हृषिकेश पंचांग के अनुसार बताया कि मकर संक्रांति का पर्व 15 को ही मनेगा। 14 जनवरी को रात 9: 38 पर मकर रेखा पर सूर्य आ रहा है, इसलिए मकर संक्रांति का पुण्य काल, स्नान दान 15 जनवरी को होगा। 

    जबकि षटतिला एकादशी 14 जनवरी को। नदियों मे स्नान, दही, चूड़ा, काला तिल, कंबल आदि का दान 15 जनवरी को होगा। वहीं, बनारस में भी 15 को ही मनाया जाएगा।
    बता दें कि सूर्य की राशि परिवर्तन से प्रकृति में होने वाली क्रांति का पर्व है मकर संक्रांति। इस दिन सूर्य धनु से मकर राशि में गमन करते हैं और उत्तरायण हो जाते हैं।

    सूर्य के उत्तरायण होते ही प्रकृति में परिवर्तन आरंभ हो जाता है। दिन बड़े होने लगते हैं और प्रकाश की अवधि बढ़ने लगती है। साथ ही शीत ऋतु का प्रकोप कम होना आरंभ हो जाता है। प्रकृति की उपासिका भारतीय सनातन संस्कृति इसे पर्व के रूप में मनाती है।

    इस दिन पवित्र तीर्थों में पावन नदियों में स्नान, दानादि को महती पुण्यदायक बताया गया है। बीएचयू के ज्योतिष विभाग में प्रोफेसर डा. सुभाष पांडेय ने बताया कि सामान्य तौर पर गुरुवार को लोग खिचड़ी नहीं खाते, किंतु मकर संक्रांति का पर्व ही इस बार गुरुवार को है। 

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    इसमें खिचड़ी का दान व भोजन करना ही महत्वपूर्ण व पुण्य फलदायी बताया गया है। ऐसे में पर्व के दिन गुरुवासरीय वर्जना की महत्ता नहीं रह जाती। लोग खिचड़ी बना सकते हैं, खा सकते हैं तथा दान भी कर सकते हैं। प्रोफेसर सुभाष के अनुसार संयोगवश इसी दिन तिल द्वादशी भी है।

    मान्यता है कि माघ मास के कृष्ण द्वादशी को ही भगवान विष्णु के शरीर से तिल की उत्पत्ति हुई थी। पर्व पर माघ मास तिल द्वादशी व वृद्धि योग की युति होने से इसका महात्म्य और भी फलदायी बताया जा रहा है। अतएव इस दिन को तिल का उपभोग व दान अत्यंत पुण्यदायी है।

    मकर संक्रांति पर्व किसी वर्ष पौष तो किसी वर्ष माघ में पड़ता है। माघ स्नान-दान का महत्वपूर्ण मास माना गया है। ऐसे में माघ मास में मकर संक्रांति का पड़ना अत्यंत शुभ फलदायी होगा। पर्व विशेष पर वृद्धि योग इसके पुण्यों का फल कई गुना बढ़ा देगा।

    15 जनवरी की प्रात:काल सूर्योदय से दोपहर बाद दोपहर 1.39 बजे तक स्नान-दान का पर्व होगा। इस अवधि में गंगा आदि पुण्य नदियों में स्नान करके तिल, कंबल, घृत आदि का दान करना तथा तिलयुक्त खिचड़ी खाना शुभ व पुण्य फलदायक माना गया है।

    14 को भी मनेगी खिचड़ी

    रांची विवि के ज्योतिष विभाग के सहायक अध्यापक डा एसके घोषाल ने बताया कि मकर संक्रांति 14 जनवरी को ही है। संपूर्णानंद संस्कृति विवि के द्रिक पंचांग में भी इसी दिन बताया गया है। इसके अनुसार सूर्य की राशि परिवर्तन का समय 3.13 अपराह्न है। सूर्य धनु से मकर में 3.13 में आते ही मकर संक्रांति का समय प्रारंभ हो जाता है।

    पुण्यकाल मुहूर्त चिंतामणि के श्लोक के अनुसार संक्रांति काल से 16 घटी अर्थात छह घंटा 24 मिनट पूर्व ही प्रारंभ हो जाता है एवं 16 घटी बाद की अवधि तक रहता है। स्नान का शुभ समय सुबह 8.49 से प्रारंभ। विशेष पुण्यकाल 3.13 से 5.23 तक है।