JPSC गड़बड़ी पर विपक्ष का सरकार पर दबाव बढ़ा, सीबीआई जांच की मांग तेज
जेपीएससी परीक्षाओं में गड़बड़ी और उत्तर प्रदेश की ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को काम देने के मामले में विपक्ष ने सीबीआई जांच की मांग को लेकर राज्य सरकार पर दब ...और पढ़ें

सुदेश महतो या जयराम महतो। (फाइल फोटो)
HighLights
विपक्ष ने जेपीएससी गड़बड़ी की सीबीआई जांच मांगी।
ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को काम देने पर सवाल उठे।
ओएमआर कॉपी वायरल, परिणाम पर भी संदेह।
राज्य ब्यूरो, रांची। जेपीएससी की परीक्षाओं में गड़बड़ी तथा उत्तर प्रदेश में ब्लैक लिस्टेड एजेंसी को काम देने के मामले की सीबीआई जांच को लेकर विपक्ष ने राज्य सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है।
आजसू के अध्यक्ष सुदेश महतो ने सीआईडी की छापेमेारी को 'डैमेज कंट्रोल' की कवायद बताते हुए इसकी सीबीआई जांच की मांग की। वहीं, जेएलकेएम के विधायक जयराम महतो ने भी मुख्यमंत्री से मिलकर मामले की सीबीआई जांच की मांग की।
सुदेश ने कहा कि सरकार के अधीन काम करने वाली एजेंसी की कार्रवाई से पूरे मामले की निष्पक्ष सच्चाई सामने आने की उम्मीद नहीं की जा सकती। जेपीएससी की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर प्रारंभ से ही अभ्यर्थियों ने गंभीर सवाल उठाए हैं।
परीक्षा परिणाम, चयन प्रक्रिया और प्रशासनिक निर्णयों पर लगातार संदेह व्यक्त किया गया है। ऐसे में सरकार के अधीनस्थ जांच एजेंसी की कार्रवाई युवाओं का भरोसा बहाल करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
वहीं, जयराम महतो ने जेपीएससी 14वीं सिविल सेवा की परीक्षा में विसंगतियों के प्रति ध्यान आकृष्ट कराते हुए उसकी सीबीआई जांच कराने और परीक्षा को स्थगित करने की मांग की।
जयराम ने मुख्यमंत्री को पत्र सौंपकर बताया कि सिविल सेवा पीटी परीक्षा पेपर-एक का एक ओएमआर कार्बन कॉपी वायरल है, जिसमें मात्र 48 प्रश्नों के उत्तर अंकित हैं। इसकी जांच जरूरी है।
आयोग के सदस्यों के बिना हस्ताक्षर के पीटी का परिणाम जारी करना अवैधानिक है। साथ ही ज्ञात एजेंसी के क्रियाकलाप से असंतुष्ट होकर आयोग के सदस्यों ने हस्ताक्षर करने से मना कर दिया है।
भारतीय जनता युवा मोर्चा करेगा घेराव
इधर, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अशोक बड़ाईक ने कहा कि बुधवार को भारतीय जनता युवा मोर्चा का जेपीएससी घेराव ऐतिहासिक होगा। उन्होंने कहा कि यदि झामुमो-कांग्रेस सरकार के दामन पर कोई दाग नहीं है तो वह जेपीएससी को लेकर उठ रहे सवालों से भाग क्यों रही है?
14वीं जेपीएससी का परिणाम आधी रात में, वह भी आयोग के सक्षम हस्ताक्षर के बिना क्यों जारी किया गया? कटऑफ सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?