झारखंड की 4 जातियों को OBC में शामिल करने की मांग, सांसद विष्णु दयाल ने लोकसभा में उठाया आरक्षण का मुद्दा
पलामू सांसद विष्णु दयाल राम ने लोकसभा में बनिया कमलापुरी, जायसवाल, कसौधन और बरनवाल समुदायों को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल करने की मांग उठाई। ...और पढ़ें

लोकसभा में अपनी बात रखते सांसद विष्णु दयाल राम। सौजन्य अलख दुबे
HighLights
सांसद विष्णु दयाल राम ने लोकसभा में मुद्दा उठाया।
बनिया कमलापुरी, जायसवाल, कसौधन, बरनवाल को ओबीसी में करें शामिल।
केंद्रीय योजनाओं और आरक्षण का लाभ मिलेगा इन जातियों को।
संवाद सहयोगी, गढ़वा। पलामू सांसद विष्णु दयाल राम ने लोकसभा में नियम 377 के तहत बनिया कमलापुरी, जायसवाल, कसौधन और बरनवाल समाज को केंद्रीय अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की सूची में शामिल करने का मुद्दा उठाया।
सांसद ने कहा कि इन समुदायों के लोग लंबे समय से सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हुए हैं। इसके बावजूद केंद्रीय ओबीसी सूची में नाम शामिल नहीं होने के कारण उन्हें केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
सांसद ने सदन में कहा कि झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में इन समुदायों को ओबीसी वर्ग का दर्जा प्राप्त है। इसके बावजूद केंद्रीय सूची में नाम नहीं होने से इन वर्गों के युवाओं को केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा है। इसके अलावा केंद्र सरकार की कई कल्याणकारी योजनाओं से भी वे वंचित रह जाते हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार प्रधानमंत्री के नेतृत्व में समाज के सभी वर्गों के विकास के लिए काम कर रही है। सरकार का लक्ष्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की किरण पहुंचाना है। ऐसे में इन समुदायों की स्थिति पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
शिक्षा-रोजगार और सरकारी योजनाओं का मिलेगा लाभ
सांसद ने केंद्र सरकार से मांग की कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग और संबंधित राज्य सरकारों से विस्तृत प्रतिवेदन प्राप्त कर इन समुदायों की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति का निष्पक्ष मूल्यांकन कराया जाए। यदि निर्धारित मानकों के अनुरूप इन समुदायों की स्थिति पाई जाती है, तो उन्हें केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल करने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि इससे इन वर्गों के लोगों को शिक्षा, रोजगार और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में आसानी होगी। साथ ही सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के सशक्तीकरण को भी बढ़ावा मिलेगा।
सांसद की ओर से उठाए गए इस मुद्दे को संबंधित समुदायों के लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लोगों को उम्मीद है कि केंद्र सरकार इस दिशा में सकारात्मक पहल करेगी और लंबे समय से लंबित मांग पर जल्द फैसला लिया जाएगा।