खर्राटों से परेशान हैं? फिजियोथेरेपी से 6 महीने में मिल सकती है राहत, रिम्स में मिल रहा उपचार
Jharkhand खर्राटे एक गंभीर समस्या हो सकती है, जिससे नींद में बाधा आती है। रांची के RIMS में फिजियोथेरेपी विभाग द्वारा विशेष व्यायामों से इसका प्रभावी ...और पढ़ें

नियमित अभ्यास से छह माह में खर्राटे समाप्त हो सकते हैं। रिम्स में हो रहा उपचार।
HighLights
फिजियोथेरेपी से खर्राटों का प्रभावी उपचार संभव है।
जीभ, मुंह, गले के व्यायाम मांसपेशियों को मजबूत करते हैं।
जागरण संवाददाता, रांची। रात में आने वाले खर्राटे न केवल स्वयं की नींद में व्यवधान डालते हैं, बल्कि साथ सोने वाले व्यक्ति के लिए भी परेशानी का कारण बनते हैं। कई लोग इसे सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्वास्थ्य से जुड़ा एक गंभीर संकेत भी हो सकता है।
रिम्स में हर दिन खर्राटे की समस्या को लेकर 10 से 15 लोग पहुंच रहे हैं, जिन्हें या तो सांस की समस्या लेकर फेफड़ा रोग विशेषज्ञ के पास जाना पड़ता है या तो इएनटी विशेषज्ञ या न्यूरोलाजिस्ट के पास जाना पड़ता है।
लेकिन इसका सबसे आसान उपचार फिजियोथैरेपी विभाग में किया जा रहा है। अभी कुछ दिन पहले से ही यहां यह सुविधा मिल रही है। रिम्स के फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. देवेंद्र मुंडा बताते हैं कि फिजियोथेरेपी आधारित विशेष व्यायामों के माध्यम से खर्राटों की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
अगर लगातार फिजियोथैरेपी करवाई जाए तो छह माह में खर्राटा समाप्त हो सकता है। उन्होंने बताया कि खर्राटे तब आते हैं, जब नींद के दौरान वायुमार्ग आंशिक रूप से अवरुद्ध हो जाता है।
इससे हवा का प्रवाह बाधित होता है और कंपन की आवाज के रूप में खर्राटे सुनाई देते हैं। 30 से 60 वर्ष की आयु के लगभग 44 प्रतिशत व्यस्क नियमित रूप से खर्राटे लेते हैं, जबकि लगभग हर व्यक्ति जीवन में कभी न कभी इस समस्या से गुजरता है।
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खर्राटों के प्रमुख कारण
डॉक्टरों के अनुसार खर्राटों के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें सोने की गलत स्थिति (विशेषकर पीठ के बल सोना), नाक बंद होना या एलर्जी, स्लीप एपनिया जैसी स्थिति, शराब या कुछ दवाओं का सेवन, बढ़ती उम्र के कारण मांसपेशियों में शिथिलता आदि शामिल हैं।
उम्र बढ़ने के साथ गले और मुंह की मांसपेशियां ढीली पड़ने लगती हैं। इससे नरम ऊतक वायुमार्ग में धंस सकते हैं और श्वास का रास्ता संकरा हो जाता है, जिससे खर्राटों की समस्या बढ़ जाती है।
फिजियोथेरेपी क्यों है कारगर
फिजियोथेरेपिस्ट के अनुसार मुंह, गले और ऊपरी श्वसन मार्ग की मांसपेशियों को मजबूत और सुदृढ़ बनाने वाले व्यायाम वायुमार्ग को खुला रखने में मदद करते हैं।
जब ये मांसपेशियां सक्रिय और मजबूत रहती हैं, तो नींद के दौरान उनके ढीले पड़ने की संभावना कम हो जाती है, जिससे खर्राटों की तीव्रता और आवृत्ति घटती है।
उन्होंने कहा कि प्रभावी परिणाम के लिए इन व्यायामों का नियमित अभ्यास आवश्यक है। प्रतिदिन 10 से 30 मिनट तक कम से कम तीन महीने तक अभ्यास करने पर सकारात्मक बदलाव देखा जा सकता है।
कौन-कौन से व्यायाम हैं लाभकारी
1. जीभ के व्यायाम
जीभ को मजबूत बनाने वाले अभ्यास सोते समय जीभ के पीछे गिरकर वायुमार्ग को अवरुद्ध करने से रोकते हैं। नियमित अभ्यास से जीभ की मांसपेशियां नियंत्रित रहती हैं और श्वसन मार्ग खुला रहता है।
2. मुंह के व्यायाम
गालों, होठों और नरम तालू की मांसपेशियों को लक्षित करने वाले व्यायाम मुंह को बंद रखने में सहायक होते हैं। इससे नींद के दौरान मुंह से सांस लेने की प्रवृत्ति कम होती है और वायुमार्ग खुला रहता है।
3. गले के व्यायाम एवं गायन अभ्यास
विशेषज्ञों का कहना है कि स्वर ध्वनियों का उच्चारण या नियमित गायन भी गले की मांसपेशियों के लिए प्रभावी व्यायाम है। रोजाना कुछ मिनट तक गाने या ‘आ, ई, ऊ’ जैसी ध्वनियों का अभ्यास करने से गले की मांसपेशियां मजबूत और सुदृढ़ होती हैं।
4. नाक से सांस लेने के अभ्यास
नाक से गहरी और नियंत्रित श्वास लेने का अभ्यास मुंह और गले की मांसपेशियों को सक्रिय करता है। इससे नाक से सांस लेने की आदत विकसित होती है और खर्राटों की समस्या में कमी आती है।
नियमितता से ही दिखता है असर
डॉक्टर देवेंद्र मुंडा ने बताया कि इन व्यायामों से तुरंत चमत्कारिक परिणाम की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। मांसपेशियों को मजबूत होने में समय लगता है। नियमित अभ्यास से धीरे-धीरे मांसपेशियों की कार्यक्षमता में सुधार होता है और खर्राटों की आवाज तथा तीव्रता में कमी आती है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि खर्राटे अत्यधिक हों या सांस रुकने जैसी समस्या हो तो चिकित्सकीय परामर्श अवश्य लें, क्योंकि यह स्लीप एपनिया जैसी गंभीर स्थिति का संकेत भी हो सकता है।
फिजियोथेरेपी आधारित सरल और सुरक्षित व्यायामों के माध्यम से बिना दवा के भी खर्राटों पर नियंत्रण पाया जा सकता है। नियमित अभ्यास और जीवनशैली में सुधार से बेहतर नींद और स्वस्थ जीवन संभव है। जो भी व्यायाम करें वो फिजियोथैरेपिस्ट से प्रशिक्षण लेने के बाद ही करें।