रनिंग रूम की शिकायतें अब 'चालक दल एप' पर, यात्री सुरक्षा होगी मजबूत; ट्रेन ड्राइवरों को नहीं आएगी झपकी!
रेलवे बोर्ड ने लोको पायलट और रनिंग स्टाफ की थकान से जुड़ी शिकायतों के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब रनिंग रूम से संबंधित सभी शिकायतें केवल 'चालक दल एप' क ...और पढ़ें

रनिंग रूम की शिकायतें अब 'चालक दल एप' से दर्ज होंगी।
HighLights
यात्री सुरक्षा मजबूत होगी, क्रिस द्वारा विकसित की गई है एप।
पारदर्शिता, जवाबदेही बढ़ेगी, स्टाफ को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
जागरण संवाददाता, रांची। ट्रेन चलाने वाले लोको पायलट और अन्य रनिंग स्टाफ की थकान सीधे तौर पर यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए रेलवे बोर्ड ने बड़ा फैसला लिया है।
अब रेलवे के रनिंग रूम से जुड़ी किसी भी तरह की शिकायत केवल ‘चालक दल एप’ के जरिए ही दर्ज की जाएगी। बोर्ड के संज्ञान में यह बात आई है कि कई जोन और मंडलों में अब भी शिकायतें केवल रजिस्टरों में लिखी जा रही हैं।
कुछ जगहों पर अलग-अलग, स्व-विकसित शिकायत प्रणालियों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे शिकायतें उच्च स्तर तक नहीं पहुंच पातीं और उनका असर कम हो जाता है।
इसी कारण रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे को निर्देश दिया है कि वे रनिंग स्टाफ को जागरूक करें और उन्हें प्रोत्साहित करें कि रनिंग रूम से जुड़ी हर समस्या को अनिवार्य रूप से चालक दल एप के माध्यम से ही दर्ज किया जाए।
बोर्ड का मानना है कि इससे शिकायतों की पारदर्शिता बढ़ेगी, जवाबदेही तय होगी और रनिंग स्टाफ को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, रनिंग स्टाफ को बेहतर आराम और सुविधाएं मिलने से न सिर्फ उनकी कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि ट्रेन परिचालन और यात्री सुरक्षा भी और मजबूत होगी।
रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे को जारी निर्देश में कहा है कि लोको पायलट, असिस्टेंट लोको पायलट और ट्रेन मैनेजर जब रनिंग रूम में ठहरते हैं, तो उन्हें आरामदायक और सुरक्षित माहौल मिलना बेहद जरूरी है।
अच्छी नींद और सही सुविधाएं मिलने से ट्रेन संचालन सुरक्षित रहता है और यात्रियों की जान की सुरक्षा सुनिश्चित होती है। रेलवे बोर्ड के अनुसार, रनिंग रूम से जुड़ी शिकायतें दर्ज करने के लिए क्रिस द्वारा विकसित चालक दल एप में पहले से सुविधा मौजूद है।
इस एप के माध्यम से दर्ज शिकायतें सीधे सीएमएस (कंप्लेंट मैनेजमेंट सिस्टम ) में पहुंचती हैं, जिससे अधिकारियों को समस्या की पूरी जानकारी मिलती है और उसका समाधान जल्दी किया जा सकता है।
यह निर्देश रेलवे बोर्ड के निदेशक (विद्युत अभियान्त्रिकी – पावर ट्रैक्शन) विकास आनंद द्वारा जारी किया गया है।