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रांची एयरपोर्ट के पैरेलल टैक्सी ट्रैक को मिली नई रफ्तार, 108 करोड़ से बढ़ेगी क्षमता

Published: Thu, 03 Sep 2026 07:30 AM (IST)

रांची एयरपोर्ट पर लंबे समय से अटकी पैरेलल टैक्सी ट्रैक (पीटीटी) और रैपिड एग्जिट टैक्सीवे (आरईटी) परियोजना को अब गति ...और पढ़ें

सुरक्षा मंजूरी के कारण अटकी परियोजना अब फिर पटरी पर।

सुरक्षा मंजूरी के कारण अटकी परियोजना अब फिर पटरी पर।

HighLights

  1. परियोजना के लिए 108 करोड़ का नया टेंडर जारी।

  2. सुरक्षा मंजूरी के कारण अटकी योजना अब फिर शुरू।

  3. पीटीटी से एयरपोर्ट की परिचालन क्षमता में होगी वृद्धि।

अमित सिंह, रांची। झारखंड में एविएशन सेक्टर तेजी से विस्तार की ओर है। नए विमान और नए एयरपोर्ट तैयार करने की योजनाओं के बीच रांची का बिरसा मुंडा एयरपोर्ट भी भविष्य की बढ़ती हवाई आवाजाही के लिए तैयार हो रहा है। लंबे समय से अटकी पैरेलल टैक्सी ट्रैक (पीटीटी) और रैपिड एग्जिट टैक्सीवे (आरईटी) परियोजना को अब फिर गति मिलेगी।

एयरपोर्ट अथारिटी आफ इंडिया (एएआई) ने इसके लिए 107.98 करोड़ रुपये का नया टेंडर कर एजेंसी का चयन कर लिया है। काम पूरा करने की अवधि 365 दिन रखी गई है। चयनीत एजेसीं ने रांची एयरपोर्ट पर काम शुरू कर दिया है।

खास बात यह है कि रांची एयरपोर्ट पर इस योजना की शुरुआत की कवायद नई नहीं है। पीटीटी-आरईटी परियोजना वर्ष 2022 में ही एएआई के पूंजीगत बजट में शामिल की गई थी। इसके बाद निर्माण के लिए प्रक्रिया आगे बढ़ी और काम की निर्धारित शुरुआत 5 जनवरी 2024 रखी गई थी। मूल रूप से इसे जनवरी 2025 तक पूरा किया जाना था।

जरूरी सुरक्षा मंजूरी नहीं मिलने के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। बाद में समयसीमा बढ़ाई गई, लेकिन ठेकेदार ने काम वापस लेने का अनुरोध किया। अब एएआई ने नए सिरे से टेंडर कर परियोजना को आगे बढ़ाने की पहल की है।

90 करोड़ से 108 करोड़ की परियोजना

पहले पीटीटी-आरईटी की अनुमानित लागत करीब 90.20 करोड़ रुपये थी। अब नए टेंडर में अनुमानित लागत बढ़कर 107.98 करोड़ रुपये हो गई है। यानी परियोजना की लागत बढ़ी है, लेकिन उससे भी महत्वपूर्ण यह है कि एएआई ने इस काम को छोड़ा नहीं है।

नए सिरे से टेंडर जारी होना बताता है कि रांची एयरपोर्ट की भविष्य की क्षमता बढ़ाने के लिए पीटीटी-आरईटी को अभी भी महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है।

रनवे जल्दी होगा खाली

पीटीटी-आरईटी का सबसे बड़ा फायदा एयरपोर्ट की परिचालन क्षमता बढ़ाने में होगा। रैपिड एग्जिट टैक्सीवे विमान को लैंडिंग के बाद रनवे से जल्दी बाहर निकलने में मदद करेगा। पैरेलल टेक्सी ट्रैक विमान को रनवे के समानांतर टैक्सी के लिए अतिरिक्त मार्ग उपलब्ध कराएगा।

इससे रनवे पर विमान के रहने का समय कम हो सकता है और अगले विमान के लिए रनवे जल्दी उपलब्ध कराया जा सकेगा। अभी पीटीटी के नहीं होने से हर उड़ान में 5 से 10 मिनट की देरी हो रही है। लैंडिंग के बाद विमानों को रनवे से ही पार्किंग जोन तक जाना पड़ रहा है। इस वजह से अराइवल व डिपार्चर के बीच समय ज्यादा लग रहा है।

चार साल पुरानी योजना से नई उम्मीद

रांची एयरपोर्ट की क्षमता बढ़ाने की योजना में पीटीटी-आरईटी के साथ टर्मिनल भवन के पुनर्गठन और अतिरिक्त पार्किंग एप्रन जैसी परियोजनाएं भी शामिल हैं। ऐसे में करीब 108 करोड़ रुपये की यह परियोजना सिर्फ टैक्सी ट्रैक का निर्माण नहीं, बल्कि रांची की भविष्य की हवाई कनेक्टिविटी की आधारशिला है।

2022 में शुरू हुई कवायद अब 2026 में नए टेंडर के साथ फिर रफ्तार पकड़ रही है। उम्मीद है कि परियोजना समय पर पूरी हुई तो आने वाले वर्षों में रांची के यात्रियों को उड़ानों के ज्यादा विकल्प मिलेंगे और एयरपोर्ट देश के बढ़ते एविएशन नेटवर्क में अपनी भूमिका और मजबूत करेगा।

यात्रियों को मिलेंगे ज्यादा विकल्प

रांची एयरपोर्ट से हर साल लाखों यात्री सफर करते हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में यहां करीब 27 लाख यात्रियों का आवागमन हुआ। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता और पुणे जैसे शहरों के लिए बड़ी संख्या में यात्री रांची एयरपोर्ट पर निर्भर हैं।

पीटीटी-आरईटी बनने के बाद एयरपोर्ट की एयरसाइड क्षमता बढ़ने पर भविष्य में नए रूट और मौजूदा रूट पर अतिरिक्त उड़ानों की संभावना मजबूत हो सकती है।

यात्रियों को पांच बड़े संभावित फायदे

1. अधिक उड़ानों की गुंजाइश : रनवे का बेहतर उपयोग होने से पीक आवर में अतिरिक्त उड़ानों के संचालन की क्षमता बढ़ सकती है।
2. नए रूट की उम्मीद : एयरपोर्ट की परिचालन क्षमता बढ़ने पर एयरलाइनों के लिए नए शहरों को जोड़ने का आधार मजबूत होगा।
3. मौजूदा रूट पर बढ़ सकती है फ्रीक्वेंसी : दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद जैसे व्यस्त रूट पर अतिरिक्त उड़ानों की संभावना बढ़ सकती है।
4. रनवे पर कम समय : आरईटी विमान को लैंडिंग के बाद तेजी से रनवे से बाहर निकलने में मदद करेगा।
5. भविष्य में बेहतर कनेक्टिविटी : झारखंड के यात्रियों को दूसरे शहरों के लिए ज्यादा विकल्प मिलने की उम्मीद होगी।

108 करोड़ की परियोजना क्यों खास?

  • 107.98 करोड़ — नए पीटीटी-आरईटी टेंडर की अनुमानित लागत
  • 365 दिन — काम पूरा करने की निर्धारित अवधि
  • 90.20 करोड़ — पिछली परियोजना की अनुमानित लागत

एएआई ने पैरेलल टेक्सी ट्रैक निर्माण के लिए एजेंसी का चयन कर कार्य आवंटित कर दिया है। एजेंसी ने रांची एयरपोर्ट पर निर्माण कार्य को लेकर गतिविधियां शुरू कर दिया है। एक वर्ष में पीटीटी-आरईटी का काम पूरा हो जायेगा। जिसके बाद विमानों के परिचालन अवधि में कमी आएगी। विमान लैंड करने के साथ पीटीटी से एप्रन पर तुरंत आ जाएंगे। अभी लैंड होने के बाद विमान रनवे की मदद से ही एप्रन तक आते है। जिस वजह से रनवे तकरीबन 10 मिनट के लिए बाधित हो जाता है।
-विनोद कुमार, निदेशक, रांची एयरपोर्ट