रांची में पटाखों से झुलसने पर तत्काल मिलेगा इलाज, रिम्स में 18 और सदर में 10 बेड तैयार
राजधानी रांची के रिम्स और सदर अस्पताल दीपावली पर पटाखों से होने वाली दुर्घटनाओं के लिए अलर्ट पर हैं। दोनों ...और पढ़ें

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HighLights
रिम्स में 18 बेड का बर्न वार्ड, सदर में 10 बेड तैयार।
डाक्टर और स्वास्थ्यकर्मी आपातकालीन ड्यूटी पर तैनात रहेंगे।
जागरण संवाददाता, रांची। दीपावली पर आतिशबाजी के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं से निपटने के लिए राजधानी के अस्पताल अलर्ट मोड में हैं। पटाखों से जलने या झुलसने की स्थिति में मरीजों को तत्काल इलाज उपलब्ध कराने के लिए रिम्स और सदर अस्पताल में विशेष व्यवस्था की गई है।
रिम्स में 18 बेड का बर्न वार्ड तैयार रखा गया है, जबकि सदर अस्पताल में 10 बेड की व्यवस्था की गई है। दोनों अस्पतालों में आपातकालीन ड्यूटी पर डाक्टर और स्वास्थ्यकर्मी तैनात रहेंगे।
राज्य के सरकारी अस्पतालों में रिम्स ही एकमात्र ऐसा संस्थान है, जहां बर्न यूनिट की सुविधा उपलब्ध है। यहां 40 से 50 प्रतिशत तक जले मरीजों के इलाज की तैयारी की गई है। रिम्स के सर्जरी विभागाध्यक्ष डा. पंकज बोदरा ने बताया कि बर्न वार्ड में जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं।
नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की 24 घंटे तैनाती रहेगी। पटाखों से झुलसकर आने वाले मरीजों को पहले ट्रामा सेंटर में प्राथमिक उपचार दिया जाएगा। इसके बाद कैजुअल्टी आपरेशन थियेटर में ड्रेसिंग की जाएगी। मरीज की स्थिति के अनुसार उसे बर्न वार्ड में भर्ती किया जाएगा।
प्लास्टिक सर्जनों की कमी बनी चुनौती
बर्न वार्ड में एक प्लास्टिक सर्जन उपलब्ध हैं, लेकिन मरीजों की जरूरत के हिसाब से विशेषज्ञों की संख्या अधिक होनी चाहिए। पिछले कुछ माह में तीन प्लास्टिक सर्जनों ने रिम्स छोड़ दिया है।
ऐसे में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी चुनौती बन सकती है। गंभीर रूप से जले मरीजों के उपचार में प्लास्टिक सर्जन की भूमिका अहम होती है। इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने उपलब्ध संसाधनों के आधार पर आपात स्थिति से निपटने की तैयारी की है।
संक्रमण से बचाव के लिए सख्त नियम
बर्न वार्ड में भर्ती मरीजों को संक्रमण से बचाना इलाज का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके लिए वार्ड में साफ-सफाई और हाइजीन का विशेष ध्यान रखा जाता है। यहां जूते-चप्पल पहनकर प्रवेश की अनुमति नहीं है। डाक्टरों और मरीजों के परिजनों को भी इस नियम का पालन करना होता है। एक मरीज के साथ केवल एक परिजन को रहने दिया जाता है। गंभीर रूप से झुलसे मरीजों को संक्रमण से बचाने के लिए विशेष तरीके से ढंककर रखा जाता है।
डॉ. बोदरा के अनुसार, 20 से 30 प्रतिशत तक जले मरीजों को प्राथमिक उपचार और ड्रेसिंग के बाद स्थिति के अनुसार एक-दो दिन अस्पताल में रखने की जरूरत पड़ सकती है। वहीं, अधिक गंभीर मामलों में लगातार निगरानी और विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है।
सदर अस्पताल में भी तैयारियां पूरी
सदर अस्पताल में 10 बेड का बर्न वार्ड तैयार रखा गया है। सिविल सर्जन के अनुसार, दीपावली के दौरान किसी भी आपात स्थिति में ड्यूटी पर तैनात डाक्टर मरीजों का उपचार करेंगे। अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों के साथ स्वास्थ्यकर्मियों को अलर्ट रहने को कहा गया है।
पटाखे जलाते समय बरतें सावधानी
डॉक्टरों की सलाह है कि दीपावली पर पटाखे खुले और सुरक्षित स्थान पर ही जलाएं। ढीले या सिंथेटिक कपड़े पहनकर आतिशबाजी न करें। बच्चों को अकेले पटाखे जलाने न दें। पानी की बाल्टी और प्राथमिक उपचार का सामान पास रखें। पटाखा जलाते समय चेहरा और हाथ उससे दूर रखें। जले हुए या नहीं फूटे पटाखे को दोबारा जलाने की कोशिश न करें।
जलने पर क्या करें
- जलने वाले स्थान को तत्काल बहते पानी के नीचे करीब 20 मिनट तक रखें।
- जले हुए हिस्से टूथपेस्ट, घी या तेल न लगाएं।
- त्वचा से चिपके कपड़े को खींचकर न हटाएं।
- जले हुए हिस्से को साफ, सूखे और बिना रोएं वाले कपड़े या साफ ड्रेसिंग से ढंकें।
- फफोले न फोड़ें और गंभीर रूप से जलने पर घरेलू उपचार में समय गंवाए बिना अस्पताल पहुंचें।
- चेहरे, हाथ, पैर, आंख या निजी अंगों के जलने अथवा सांस लेने में परेशानी होने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लें।
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