रांची के सीलबंद शराब फैक्ट्री से सारे सबूत गायब, अनियमितता उजागर होने के बावजूद संचालित होता रहा प्लांट
रांची के ओरमांझी स्थित तरंगनी लीकर्स प्लांट में अवैध शराब की बार-बार बरामदगी के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। पूर्व ...और पढ़ें

बिहार राजद के पूर्व एमएलसी के बाटलिंग प्लांट मेसर्स तरंगनी लीकर्स प्राइवेट लिमिटेड का मामला।
HighLights
रांची के तरंगनी प्लांट में अवैध शराब बरामदगी।
सीलबंद प्लांट से सबूत गायब, तीसरी FIR।
पूर्व राजद एमएलसी सुबोध कुमार राय का प्लांट।
राज्य ब्यूरो, रांची। रांची जिले के ओरमांझी थाना क्षेत्र के उकरीद स्थित विदेशी शराब के बाटलिंग प्लांट तरंगनी में अवैध शराब की बरामदगी के बावजूद उत्पाद विभाग की ओर से कोई कारगर कार्रवाई नहीं की जा सकी। यह बाटलिंग प्लांट बिहार राजद के पूर्व एमएलसी सुबोध कुमार राय की है। यह पहली बार नहीं है, जब वहां से अवैध शराब की बरामदगी हुई है।
जिस तरह की कार्रवाई अब तक हो चुकी है, यह केवल दिखावा मात्र है, मिलीभगत है, खानापूर्ति है या फिर कुछ और है, यह जांच का विषय है। जांच जारी है। उक्त बाटलिंग प्लांट के विरुद्ध ओरमांझी थाने में प्राथमिकियां दर्ज होती रहीं, उत्पाद विभाग व रांची जिला प्रशासन सक्रिय होने का दावा करता रहा, लेकिन बाटलिंग प्लांट की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा।
महज सवा महीने के भीतर इस प्लांट से जुड़ी दो प्राथमिकियां ओरमांझी थाने में दर्ज हो चुकी हैं। रांची के ओरमांझी थाने के अधीन उक्त प्लांट है, उसकी निगरानी ओरमांझी थाने की पुलिस के अलावा उत्पाद विभाग के अधीन भी है।
लेकिन इतनी कड़ी निगरानी के बावजूद सीलबंद प्लांट का ताला टूटना, वहां से सबूत गायब होना, चोरी हो जाना, सीसीटीवी का डीवीआर गायब हो जाना यह कहीं न कहीं पूरी व्यवस्था पर सवाल उठा रहा, जिसकी गंभीरता से निष्पक्ष जांच होने पर खुलासा हो सकेगा।
2023 में भी शराब पकड़ाया, कुछ दिन बंद रहने के बाद प्लांट फिर चल पड़ा
वर्ष 2023 में 19 मार्च को उत्पाद विभाग ने मेसर्स तरंगनी लीकर्स प्राइवेट लिमिटेड के प्लांट में छापेमारी की थी। तब अवैध शराब की बरामदगी हुई थी। छानबीन में अनियमितता की पुष्टि हुई थी। विदेशी शराब की बाटलिंग कर झारखंड से अवैध तरीके से शराब दूसरे राज्यों में भेजे जाने की पुष्टि हुई थी।
इस मामले में उस वक्त भी ओरमांझी थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उत्पाद विभाग ने भी छानबीन कर उक्त बाटलिंग प्लांट के विरुद्ध लाइसेंस रद करने की अनुशंसा की थी। प्लांट से उत्पाद कुछ माह तक बंद रहा। फिर, सबकुछ सामान्य हो गया और प्लांट फिर चल पड़ा। उत्पादन होने लगा और सबकुछ सामान्य हो गया।
30 जून 2026 की रात भी पड़ा छापा, फिर से अवैध शराब की हुई बरामदगी
उत्पाद विभाग ने 30 जून 2026 की रात फिर मेसर्स तरंगनी लीकर्स प्राइवेट लिमिटेड के प्लांट में छापेमारी की। वहां से फिर अवैध शराब की बरामदगी हुई। लाइसेंस झारखंड के लिए शराब के बाटलिंग की थी और वहां यूपी व दिल्ली के लिए शराब की बाटलिंग हो रही थी।
अवैध शराब बरामदगी में फिर से ओरमांझी थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई। इस बार एक जुलाई को प्लांट संचालक सुबोध कुमार राय सहित तीन जेल भेजे गए। प्लांट सील हुआ। कार्रवाई तेज हुई, लेकिन नतीजा कुछ न निकला।
सवा महीने के भीतर जेल से निकला संचालक, सीलबंद प्लांट से भी सबूत हो गए गायब
एक जुलाई 2026 को सीलबंद मेसर्स तरंगनी लीकर्स प्राइवेट लिमिटेड के प्लांट की निगरानी में ओरमांझी थाने की पुलिस के अलावा उत्पाद विभाग के तीन जवान व एक दारोगा लगाए गए थे। मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में प्लांट का सील खुलना था और जांच होनी थी।
रांची के उपायुक्त ने मजिस्ट्रेट बहाल भी कर दिया था। इसी बीच महज सवा महीने के भीतर सात अगस्त को प्लांट संचालक पूर्व एमएलसी सुबोध कुमार राय जमानत पर जेल से बाहर आ गए। 17 अगस्त को मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में प्लांट का ताला खुलना था।
जब पूरी टीम निरीक्षण को पहुंची तो ताला पहले से खुला था, प्लांट के शटर उखड़े थे, पीछे की दीवार टूटी थी और वहां जब्त सभी साक्ष्य गायब थे। वहां का दृश्य ऐसा था, जैसे चोरी की पूरी पटकथा लिखी गई हो और सबकुछ सुनियोजित हो।
निगरानी में तैनात दारोगा रूपेश कुमार ने ओरमांझी थाने में एक और प्राथमिकी दर्ज कराई और इस बार प्लांट संचालक सुबोध कुमार राय व अन्य के विरुद्ध एक सोची समझी साजिश के तहत सबूत गायब कराने का आरोप लगाया। ओरमांझी थाने में दर्ज यह तीसरी प्राथमिकी है, जिसकी जांच चल रही है।
