रांची में दवा दुकानदारों की देशव्यापी बंदी का दिखा असर, मेडिकल स्टोर रहे बंद; मरीजों को हुई परेशानी
रांची समेत पूरे झारखंड में ऑनलाइन दवा बिक्री और ई-फार्मेसी द्वारा भारी छूट के विरोध में मेडिकल स्टोर बंद रहे। इससे मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेश ...और पढ़ें


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जागरण संवाददाता, रांची। ई-फार्मेसी और ऑनलाइन दवा कंपनियों द्वारा भारी छूट देकर दवाओं की बिक्री के विरोध में बुधवार को राजधानी रांची समेत पूरे झारखंड में मेडिकल स्टोर्स बंद रहे।
ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स तथा झारखंड केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन के संयुक्त आह्वान पर आयोजित इस राष्ट्रव्यापी बंद में राज्यभर के करीब 18 हजार छोटे-बड़े मेडिकल स्टोर्स बंद रहें।
राजधानी के मेन रोड, हरमू, कांके रोड, डोरंडा, लालपुर, बरियातू, अपर बाजार और रातू रोड समेत अधिकांश इलाकों में दवा दुकानें बंद रहने से मरीजों और उनके स्वजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

कई लोग जरूरी दवाओं के लिए एक दुकान से दूसरी दुकान भटकते नजर आए। विशेषकर बुजुर्ग, मधुमेह, ब्लड प्रेशर और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को अधिक दिक्कत हुई।
केमिस्ट्स संगठनों का कहना है कि ऑनलाइन दवा कंपनियां बिना डॉक्टर के वैध पर्चे के भी दवाओं की बिक्री कर रही हैं, जिससे मरीजों की सेहत पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
इसके अलावा बड़ी ई-फार्मेसी कंपनियां भारी डिस्काउंट देकर छोटे मेडिकल दुकानदारों की आजीविका पर असर डाल रही हैं। संगठनों ने सरकार से ऑनलाइन दवा बिक्री के लिए कड़े नियम बनाने और अनियमितताओं पर रोक लगाने की मांग की है।
संघ पदाधिकारियों ने कहा कि दवा कोई सामान्य उपभोक्ता वस्तु नहीं, बल्कि सीधे मरीजों के स्वास्थ्य से जुड़ा विषय है। ऐसे में बिना फार्मासिस्ट की निगरानी और उचित परामर्श के दवा उपलब्ध कराना खतरनाक साबित हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती है तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा।
हालांकि, बंद के दौरान सरकारी अस्पतालों, निजी अस्पतालों और इमरजेंसी सेवाओं से जुड़ी फार्मेसी दुकानों को इस हड़ताल से अलग रखा गया था, ताकि गंभीर मरीजों को तत्काल दवा उपलब्ध हो सके।

इसके बावजूद कई मरीजों को सामान्य दवाओं के लिए अस्पतालों की फार्मेसी पर निर्भर रहना पड़ा, जहां भीड़ बढ़ने से लंबी कतारें देखने को मिलीं। लेकिन भी कई दवाएं नहीं मिल सकी।
मालूम हो कि ऑनलाइन दवा बिक्री में पारदर्शिता और सुरक्षा मानकों का पालन बेहद जरूरी है। बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा सेवन से एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस, गलत दवा उपयोग और साइड इफेक्ट्स जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। वहीं दूसरी ओर डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव से पारंपरिक मेडिकल दुकानदारों के सामने रोजगार का संकट भी गहराता जा रहा है।