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रांची रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में टोकरियां खुलीं तो निकले दुर्लभ दोमुंहे सांप; फन पर चश्मा, विष बेहद खतरनाक

Published: Thu, 13 Aug 2026 06:19 PM (IST)

रांची रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ ने दो व्यक्तियों को पांच सांपों के साथ पकड़ा, जिनमें दो दुर्लभ रेड सैंड बोआ ...और पढ़ें

पांच सांपों के साथ दो व्यक्ति हिरासत में, दो रेड सैंड बोआ और तीन चश्माधारी नाग बरामद।

पांच सांपों के साथ दो व्यक्ति हिरासत में, दो रेड सैंड बोआ और तीन चश्माधारी नाग बरामद।

HighLights

  1. रांची स्टेशन पर आरपीएफ ने पांच सांप पकड़े।

  2. दो दुर्लभ रेड सैंड बोआ, तीन जहरीले कोबरा बरामद।

  3. वन्यजीव संरक्षण अभियान के तहत दो व्यक्ति हिरासत में।

जागरण संवाददाता, रांची। बांस की टोकरियां बाहर से सामान्य थीं, लेकिन इनके भीतर छिपा था दुर्लभ वन्यजीवों का संसार। रांची रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या एक पर नियमित जांच के दौरान आरपीएफ की नजर इन टोकरियों पर पड़ी।

जांच हुई तो इनके भीतर दो दुर्लभ रेड सैंड बोआ यानी दोमुंहे सांप और तीन चश्माधारी नाग (इंडियन कोबरा) मिले। पांच सांपों के साथ दो व्यक्तियों को आरपीएफ ने हिरासत में लिया। इनमें खास बात यह रही कि बरामद चश्माधारी नागों में से कुछ के दांत टूटे हुए पाए गए। आरपीएफ को आशंका है कि विष निकालकर बेचने के लिए ऐसा किया गया था।

वन्यजीवों की अवैध तस्करी और शोषण के खिलाफ चलाए जा रहे आपरेशन डब्ल्यूआइएलइपी (वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन) के तहत आरपीएफ रांची पोस्ट की टीम ने यह कार्रवाई की। पूछताछ में दोनों की पहचान आनंद नाथ और अर्जू के रूप में हुई।

आरपीएफ के अनुसार, दोनों सांपों को जंगल से पकड़कर सार्वजनिक प्रदर्शन के माध्यम से पैसे कमाने के उद्देश्य से ले जा रहे थे। उनके पास रखी बांस की टोकरियों की तलाशी में दो रेड सैंड बोआ और तीन चश्माधारी नाग बरामद किए गए।

snake on station

दोमुंहा दिखता है, लेकिन मुंह एक ही

रेड सैंड बोआ को दोमुंहा या मटिया सांप कहा जाता है। इसका शरीर मोटा और लाल-भूरे रंग का होता है। इसकी पूंछ का हिस्सा भी आगे के सिर की तरह गोल और मोटा दिखाई देता है। इसी वजह से यह दूर से दोमुंहा नजर आता है, जबकि इसका मुंह एक ही होता है। यह विषहीन सांप है और सूखी, रेतीली तथा ढीली मिट्टी वाले इलाकों में पाया जाता है।

इसकी लंबाई करीब ढाई फीट तक होती है। वन विभाग के अनुसार, इसके किसी औषधीय उपयोग का प्रमाण नहीं है। इसके बावजूद तस्कर कैंसर के इलाज, पारंपरिक दवाओं और यौन शक्ति बढ़ाने में इसके शरीर के अंगों के इस्तेमाल की झूठी अफवाह फैलाकर इसकी तस्करी करते हैं।

फन पर चश्मा, विष बेहद खतरनाक

बरामद तीनों चश्माधारी नाग भारतीय नाग की प्रजाति के हैं। फन के पीछे चश्मे जैसा निशान होने के कारण इन्हें चश्माधारी नाग कहा जाता है। यह विषैला सांप है। इसके विष में ऐसे तत्व होते हैं, जो तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं।

काटने पर गंभीर स्थिति में मांसपेशियों में कमजोरी और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। समय पर उपचार और एंटीवेनम मिलने से पीड़ित की जान बचाई जा सकती है। इसके विष का उपयोग एंटीवेनम तैयार करने के साथ चिकित्सा अनुसंधान में भी किया जाता है।

संरक्षण कानून के तहत संरक्षित

रेड सैंड बोआ और चश्माधारी नाग संरक्षित वन्यजीव हैं। इन्हें पकड़ना, रखना या इनका अवैध व्यापार करना कानूनन अपराध है। आरपीएफ ने आवश्यक कानूनी और विभागीय प्रक्रिया पूरी करने के बाद दोनों व्यक्तियों, बरामद पांचों सांपों और संबंधित दस्तावेजों को आगे की कार्रवाई के लिए वन परिक्षेत्र पदाधिकारी, टिम्बर डिपो रेंज, रांची को सौंप दिया।

कार्रवाई में निरीक्षक शिशुपाल कुमार, उपनिरीक्षक कमल दास, सहायक उपनिरीक्षक शक्ति सिंह तथा बल सदस्य सुचंद अहीर और आरएल मुंडा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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