रांची यूनिवर्सिटी के 63 साल में पहली बार PhD नामांकन में मिलेगा आरक्षण का लाभ
रांची विश्वविद्यालय में 63 साल में पहली बार पीएचडी नामांकन में आरक्षण लागू किया गया है। पीएचडी रेगुलेशन 2022 के ...और पढ़ें

रांची विश्वविद्यालय में पीएचडी दाखिले में अब मिलेगा आरक्षण का लाभ।
HighLights
रांची विवि में पहली बार पीएचडी में आरक्षण।
331 पीएचडी सीटों पर लागू होगा आरक्षण रोस्टर।
वंचित वर्गों को शोध में मिलेगा समान अवसर।
दिवाकर सिंह, रांची। रांची विश्वविद्यालय में यूजी और पीजी में नामांकन प्रक्रिया में आरक्षण का पालन किया जाता है। लेकिन 63 वर्षों में पहली बार ऐसा होगा कि पीएचडी के नामांकन में भी आरक्षण रोस्टर का पालन किया जाएगा। विद्यार्थियों को आवेदन देने के बाद इसे आरक्षण रोस्टर के अनुसार शार्टलिस्ट किया जाएगा।
वहीं अब तक यूजीसी जेआरएफ, नेट या प्रवेश परीक्षा पास अभ्यर्थी सीधे शोध करा रहे शिक्षकों से संपर्क कर पीएचडी में दाखिला ले लेते थे, जिससे आरक्षण नीति का पालन स्पष्ट रूप से नहीं हो पाता था। लेकिन पीएचडी रेगुलेशन को लागू होने के बाद आरक्षण रोस्टर के अनुसार सीटों की संख्या तय की गयी है।
पीएचडी की 331 सीटों पर आरक्षण रोस्टर लागू
रांची विश्वविद्यालय में शोध की बेहतर गुणवत्ता के लिए सबसे पहले विवि में पीएचडी रेगुलेशन 2022 को लागू किया गया। वहीं शोध में सबसे बराबर भागीदारी मिले इसके लिए आरक्षण रोस्टर के अनुसार सीटें तय की गयी। इसके तहत रांची विश्वविद्याल के 30 पीजी विभागों के अंतर्गत 331 सीटें जारी की गयी है, जिसे आरक्षण रोस्टर के अनुसार बांटा गया है।
इसमें कुल 153 सीटें सामान्य वर्ग के लिए 16 सीटैं इडब्ल्यूएस के लिए , 85 सीटें एसटी वर्ग के लिए, 34 सीटें एससी वर्ग के लिए, 30 सीटें बीसी वन वर्ग के लिए और 13 सीटें बीसी टू वर्ग के लिए आरक्षित की गयी हैं।
इन विषयों में ऐसे किया है आरक्षण रोस्टर का पालन (प्रमुख विषयों का आंकड़ा)
| विषय | सामान्य | ईडब्ल्यूएस | एसटी | एससी | बीसी वन | बीसी टू |
| जूलाजी | 13 | 02 | 08 | 03 | 02 | 02 |
| बाटनी | 12 | 02 | 07 | 03 | 02 | 02 |
| इंग्लिश | 11 | 02 | 06 | 03 | 02 | 01 |
| फिलासफी | 10 | 02 | 06 | 03 | 02 | 01 |
| ज्योग्राफी | 08 | 01 | 05 | 02 | 01 | 01 |
| केमेस्ट्री | 08 | 01 | 05 | 02 | 01 | 01 |
| हिंदी | 09 | 01 | 05 | 02 | 01 | 01 |
| इकोनामिक्स | 05 | 01 | 03 | 01 | 01 | 01 |
| फिजिक्स | 07 | 01 | 04 | 02 | 01 | 01 |
आरक्षण रोस्टर लागू होने से क्या होगा फायदा
पीएचडी की सीटों पर आरक्षण लागू होने से वंचित और पिछड़े वर्गों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा तथा शोध के क्षेत्र में समान अवसर और उचित प्रतिनिधित्व मिलता है। एससी, एसटी, ओबीसी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के छात्रों के लिए सीटें आरक्षित होती हैं, जिससे वे भी उच्च स्तरीय शोध कर पाते हैं।
आरक्षण रोस्टर के तहत नामांकन होने से गाइड अपनी पसंद के बजाय नियमों के अनुसार छात्र चुनते हैं। इसके अलावा पीएचडी पूरी करने के बाद विश्वविद्यालयों या कालेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने और अन्य उच्च पदों की पात्रता में आसानी होती है।
क्या कहता है विवि
पीएचडी में आरक्षण का उद्देश्य सिर्फ सीटें भरना नहीं, बल्कि रिसर्च में सामाजिक विविधता लाना है। अलग-अलग पृष्ठभूमि के छात्र आएंगे तो शोध का दायरा व्यापक होगा। ये पहली बार रांची विश्वविद्यालय में लागू किया जा रहा है।
-डॉ. परवेज हसन, सोशल साइंस डीन व शोध निदेशक, रांची विवि
