झारखंड में जलसंकट का बढ़ा खतरा, मानसून के 20 दिन बाद भी नहीं भर पाए डैम
राजधानी रांची में मानसून के 20 दिन बाद भी प्रमुख डैमों का जलस्तर पिछले साल की तुलना में काफी कम है, जिससे शहर में जलसंकट का खतरा बढ़ गया है। झारखंड मे ...और पढ़ें

डैम का जलस्तर पिछले वर्ष से काफी कम। फोटो जागरण
HighLights
रांची के प्रमुख डैमों का जलस्तर पिछले साल से काफी कम।
मानसून के 20 दिन बाद भी डैम लबालब नहीं भर पाए।
झारखंड में 42% कम बारिश, गेतलसूद में गाद भी समस्या।
जागरण संवाददाता, रांची। राजधानी रांची में मानसून सक्रिय होने के बावजूद जलस्रोतों की स्थिति पूरी तरह संतोषजनक नहीं है। मानसून आगमन के लगभग 20 दिन बीत चुके हैं, लेकिन शहर को पेयजल उपलब्ध कराने वाले प्रमुख डैम अब तक लबालब नहीं भर पाए हैं। गेतलसूद, हटिया और गोंदा डैम का जलस्तर पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम है।
यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो राजधानी को जलसंकट की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। रांची की जलापूर्ति का सबसे बड़ा स्रोत गेतलसूद डैम है। वर्तमान में इसका जलस्तर करीब 19 फीट तक पहुंचा है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह लगभग 31 फीट था।
बीते 15 दिनों में डैम का जलस्तर केवल 16 फीट से बढ़कर 19 फीट तक पहुंच पाया है। जलस्तर में यह बढ़ोतरी अपेक्षा से काफी कम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई और अगस्त में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो पेयजल संकट की आशंका बढ़ सकती है।
हटिया व गोंदा डैम की स्थिति भी चिंताजनक
हटिया डैम और गोंदा डैम की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। पिछले वर्ष 6 जुलाई तक हटिया डैम में लगभग 32 फीट पानी था, जबकि इस बार जलस्तर केवल 25 फीट के आसपास है। वहीं गोंदा डैम का जलस्तर पिछले वर्ष 23 फीट था, जो इस बार घटकर 17.6 फीट रह गया है।
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इन दोनों जलाशयों का जलस्तर भी सामान्य से कम होने के कारण संबंधित विभागों की चिंता बढ़ गई है। जल संसाधन विभाग तथा पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सभी प्रमुख डैमों के स्कावर और रेडियल गेट की तकनीकी जांच कर ली गई है।
आवश्यकता पड़ने पर गेट खोले जा सकते हैं, लेकिन फिलहाल डैमों में जलस्तर कम होने के कारण पानी का संरक्षण प्राथमिकता बना हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश स्थिति को बेहतर बना सकती है, लेकिन यदि वर्षा का यही क्रम जारी रहा तो परेशानी बढ़ सकती है।
राज्य में 42 प्रतिशत कम हुई अबतक बारिश, गढवा, गोड्डा में सबसे कम बारिश
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार रांची में अब तक अपेक्षाकृत संतोषजनक बारिश हुई है, लेकिन पूरे झारखंड की स्थिति चिंताजनक है। राज्य में अब तक सामान्य से 42 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है।
गढ़वा जिले में सबसे अधिक 89 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज हुई है, जबकि गोड्डा में 79 प्रतिशत कम बारिश हुई है। दूसरी ओर रांची, सिमडेगा और दुमका अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में हैं, जहां सामान्य से केवल 10 से 15 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
गेतलसूद डैम के कार्यपालक अभियंता प्रदीप भगत ने बताया कि गेतलसूद डैम में लगातार बढ़ रही गाद को भी जलसंकट का एक बड़ा कारण मान रहे हैं। डैम का अधिकतम जलस्तर 36 फीट है, लेकिन अनुमानतः करीब 14 फीट तक गाद जमा हो चुकी है।
डैम निर्माण के बाद से अब तक व्यापक स्तर पर गाद की सफाई नहीं की गई है। विभाग द्वारा केवल किनारों पर सीमित सफाई कर औपचारिकता निभाई गई है। गाद जमा होने से कैचमेंट एरिया और जल भंडारण क्षमता दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार डैम से गाद हटाने को लेकर डिवीजन कार्यालय से लेकर मंत्रालय तक कई बार प्रस्ताव और पत्र भेजे जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में राजधानी की जलापूर्ति व्यवस्था काफी हद तक मानसून की मेहरबानी पर टिकी हुई है।
हटिया व गोंदा डैम पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के पास है। गेतलसूद डैम सिर्फ हमारे पास है। गेतलसूद डैम के स्कावर व रेडियल गेट दोनों को खोलने की तैयारी की गई है। हालांकि बारिश अबतक अच्छी नहीं होने से चिंता बनी हुई है। - मोतीलाला पिंगुआ, अभियंता प्रमुख, जल संसाधन विभाग, रांची