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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 09, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    आदेश के बाद भी जवाब नहीं देने पर RIMS डायरेक्टर हाईकोर्ट में तलब, अदालत ने जताई कड़ी आपत्ति

    Updated: Tue, 09 Apr 2024 09:20 PM (GMT+05:30)

    Jharkhand High Court झारखंड हाईकोर्ट में रिम्स में बेहतर चिकित्सा सुविधा की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। इस दौरान आदेश के बाद ...और पढ़ें

    आदेश के बाद भी जवाब नहीं देने पर RIMS डायरेक्टर हाईकोर्ट में तलब (फाइल फोटो)
    आदेश के बाद भी जवाब नहीं देने पर RIMS डायरेक्टर हाईकोर्ट में तलब (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. हाई कोर्ट ने पूछा था- रिम्स में कितनी मशीनें खराब, कब तक बनेगी
    2. बुधवार को रिम्स निदेशक को कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया

    राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस आर मुखोपाध्याय व जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ में रिम्स में बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। आदेश के बाद भी रिम्स निदेशक की ओर से जवाब दाखिल नहीं किए जाने पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई।

    इसके बाद अदालत ने बुधवार को रिम्स निदेशक को कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। 13 मार्च को सुनवाई के बाद अदालत ने इस मामले में रिम्स निदेशक से कई बिंदुओं पर जवाब मांगा था।

    अदालत ने पूछा था कि रिम्स में एमआरआइ मशीन सहित कितनी चिकित्सा मशीन कार्य कर रही हैं। कितनी मशीनें अभी खराब हैं, मशीनों को चलाने के लिए तकनिशियन है या नहीं। खराब मशीनों को बनाने में कितना समय लगेगा। अदालत ने इन बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी मांगी थी, लेकिन रिम्स निदेशक की ओर से इस पर कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया था।

    ज्योति शर्मा की ओर से हाई कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल

    इस संबंध में ज्योति शर्मा की ओर से हाई कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका में कहा गया है कि बेहतर चिकित्सा सुविधा दिलाने, चिकित्सकीय उपकरण को चालू रखने और रिम्स की व्यवस्था में सुधार का आग्रह किया गया है।

    याचिका में कहा गया है कि रिम्स के चिकित्सक नन प्रैक्टिसिंग अलाउंस लेते हैं, लेकिन वे बाहर क्लीनिक में भी प्रैक्टिस करते हैं। रिम्स में एबीजी मशीन लगाने की संविदा निकाली जाती है, लेकिन चार साल बाद भी इसे पूरा नहीं किया जाता है। आउटसोर्स कंपनी के जरिए इसका काम हो रहा है। रिम्स में एमआरआइ मशीन भी खराब है, तकनीशियन की भी कमी है। बर्न यूनिट ठीक से काम नहीं करता है।

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