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    रिम्स के कर्मी की दोहरी नियुक्ति मामले में विभाग सख्त, झारखंड हाईकोर्ट को भेजी जाएगी पूरी रिपोर्ट

    Updated: Tue, 04 Aug 2026 09:10 PM (IST)

    रिम्स के पूर्व निदेशक के पुत्र ऋषभ कुमार की कथित दोहरी नियुक्ति मामले में स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। रिम्स प्रबंधन विस्तृत रिपोर्ट तैया ...और पढ़ें

    रिम्स कर्मी ऋषभ कुमार की कथित दोहरी नियुक्ति मामला।

    रिम्स कर्मी ऋषभ कुमार की कथित दोहरी नियुक्ति मामला।

    HighLights

    1. रिम्स कर्मी ऋषभ कुमार की कथित दोहरी नियुक्ति।

    2. बिना इस्तीफा दिए लखनऊ में दूसरी नौकरी ज्वाइन की।

    जागरण संवाददाता, रांची। रिम्स के पूर्व निदेशक डॉ. राजकुमार के पुत्र ऋषभ कुमार की कथित दोहरी नियुक्ति के मामले में अब स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी है। रिम्स प्रबंधन पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहा है, जिसे जल्द ही झारखंड हाईकोर्ट में प्रस्तुत किया जाएगा।

    विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में बिना इस्तीफा दिए दूसरे संस्थान में योगदान देने की पुष्टि होती है तो सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। मालूम हो कि डॉ. राजकुमार ने इंटरनेट मीडिया में अपने पुत्र की नई नियुक्ति को लेकर जानकारी साझा की है।

    जानकारी के अनुसार, ऋषभ कुमार रिम्स के मास्टर ऑफ हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन (एमएचए) विभाग में ट्यूटर के पद पर कार्यरत थे।

    रिम्स के अपर अधीक्षक ने बताया कि कि उन्होंने रिम्स से औपचारिक रूप से इस्तीफा दिए बिना ही छुट्टी लेकर लखनऊ के एक निजी मेडिकल कॉलेज में सहायक प्राध्यापक एवं डिप्टी मेडिकल सुपरिटेंडेंट के रूप में योगदान दे दिया।

    रिम्स प्रबंधन के अनुसार, अब तक उनका इस्तीफा स्वीकृत नहीं हुआ है। ऐसे में यह मामला सरकारी सेवा नियमों के उल्लंघन से जुड़ा माना जा रहा है। विभागीय स्तर पर उनकी सेवा से संबंधित सभी दस्तावेजों, अवकाश, उपस्थिति और नियुक्ति से जुड़े रिकार्ड की जांच की जा रही है।

    सूत्रों के अनुसार, मामला पहले से ही झारखंड हाईकोर्ट में लंबित है। इसलिए रिम्स प्रबंधन अब पूरे घटनाक्रम और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर अदालत को अवगत कराने की तैयारी में है।

    रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि कर्मचारी की वर्तमान सेवा स्थिति क्या है और प्रबंधन की ओर से अब तक क्या कार्रवाई की गई है।

    स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार विभागीय कार्रवाई, सेवा से पृथक्करण सहित अन्य कानूनी कदम भी उठाए जा सकते हैं। अब पूरे मामले पर सभी की नजर विभाग की जांच रिपोर्ट और हाईकोर्ट में दाखिल किए जाने वाले जवाब पर टिकी है।

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