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1000 करोड़ का झारखंड मेधा घोटाला, केंद्रीय मंत्री संजय सेठ का बड़ा आरोप, कहा- सीबीआई जांच जरूरी

Published: Sat, 22 Aug 2026 08:20 PM (IST)

केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने झारखंड में छात्रों पर हुए कथित हमले और लाठीचार्ज की निंदा करते हुए आरोप ...और पढ़ें

रक्षा राज्य मंत्री ने की छह वर्षों में हुई सभी परीक्षाओं की सीबीआइ जांच की मांग।

रक्षा राज्य मंत्री ने की छह वर्षों में हुई सभी परीक्षाओं की सीबीआइ जांच की मांग।

HighLights

  1. रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने झारखंड में छात्रों पर हमले की निंदा की।

  2. सरकार पर 1000 करोड़ में छात्रों के भविष्य से समझौता का आरोप।

  3. पिछले छह वर्षों की सभी भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच की मांग।

राज्य ब्यूरो, रांची। केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने राज्य भर में छात्रों पर झामुमो कार्यकर्ताओं द्वारा कथित हमला किए जाने तथा लाठीचार्ज का आरोप लगाते हुए उसकी निंदा की है। शनिवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रेसवार्ता कर संजय सेठ ने आरोप लगाया कि सरकार ने एक हजार करोड़ में छात्रों के भविष्य से समझौता किया है।

उन्होंने पिछले छह वर्षों में जेपीएससी, जेएसएससी सीजीएल सहित सभी आयोजित भर्ती परीक्षा की जांच सीबीआइ से कराने की मांग की है।
सेठ ने कहा कि जिस प्रकार से निर्दोष छात्रों पर रांची, हजारीबाग, गिरिडीह, गढ़वा में झामुमो कार्यकर्ताओं द्वारा मारपीट, छेड़छाड़ और पुलिस के द्वारा लाठियां बरसाई गई, वह निंदनीय है।

बच्चे जब इलाज के लिए अस्पताल गए तो वहां भी छात्रों को पीटा गया और वहां से भगाया गया। अस्पताल के निदेशक और सिविल सर्जन पर घायल छात्रों को बिना इलाज के ही छोड़ देने का दबाव बनाया गया।

उन्होंने कहा कि बच्चे संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके से पिछले 25 दिनों से अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ आमरण अनशन पर रहे। लेकिन सरकार ने उनकी एक न सुनी। जब पूरे देश में इस आंदोलन को समर्थन मिलने लगा तो सरकार ने फूट डालो और राज करो की नीति को अपनाते हुए छात्रों को धोखा दिया।

एक षड्यंत्र के तहत परीक्षा को रद किया, लेकिन उसके बचाव में कोर्ट में दलील देने के लिए राज्य के महाधिवक्ता को नहीं भेजकर एक जूनियर अधिवक्ता को भेज दिया। संजय सेठ ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि झारखंड में भी खून बहा है, यहां भी छात्रों के हाथ पैर टूटे है, लेकिन उनके मुंह से उफ तक न निकला।

उन्होंने सवाल किया कि पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष नीलिमा केरकेट्टा के द्वारा वर्ष 2024 में सरकार को जेपीएससी में व्याप्त घोटाले एवं खामियों को लेकर जो पत्र लिखकर आगाह किया गया था, सरकार उस पत्र को क्यों दबा कर बैठी हुई है।

जेपीएससी में झामुमो के महासचिव की रिश्तेदार सदस्य रह चुकी हैं। कहीं सरकार सीबीआइ जांच का आदेश न देकर उन्हें बचाने की कोशिश तो नहीं कर रही है।