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गिरिडीह से कैबिनेट तक…पर्यटन मंत्री सुदिव्य सोनू, जिन्होंने कहा था- ‘झारखंड के हर मोड़ पर है एक कहानी’

Published: Sun, 06 Sep 2026 08:31 AM (IST)Updated: Sun, 06 Sep 2026 09:03 AM (IST)

झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता और कैबिनेट मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का निधन हो गया। उन्होंने पर्यटन मंत्री के रूप ...और पढ़ें

संघर्ष से कैबिनेट तक सुदिव्य सोनू का सफर।

संघर्ष से कैबिनेट तक सुदिव्य सोनू का सफर।

HighLights

  1. सुदिव्य कुमार सोनू झारखंड मुक्ति मोर्चा के समर्पित नेता थे।

  2. उन्होंने पर्यटन मंत्री के रूप में राज्य में कई पहल कीं।

  3. इको-टूरिज्म, स्काईवॉक और होमस्टे नीति पर काम किया।

डिजिटल डेस्क, रांची। दिशोम गुरु शिबू सोरेन के शिष्य रहे सुदिव्य कुमार सोनू ने जमीनी कार्यकर्ता से मंत्री तक का सफर संघर्षपूर्ण तरीके से पूरा किया था। झारखंड के पर्यटन को उन्होंने नई दिशा दी। सुदिव्य सोनू (26 जुलाई 1970 – 6 सितंबर 2026) झारखंड मुक्ति मोर्चा के समर्पित नेता, गिरिडीह के दो बार के विधायक और हेमंत सोरेन सरकार के कैबिनेट मंत्री थे।

उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, नगर विकास, पर्यटन, कला-संस्कृति, खेल एवं युवा मामलों के प्रभारी रहे सुदिव्य सोनू का 6 सितंबर को हार्ट अटैक से निधन हो गया। झामुमो समर्थकों में शोक की लहर है। पूरे राज्य से अपने नेता को श्रद्धांजली देने गिरिडीह पहुंच रहे हैं।

गिरिडीह के बेटे का राजनीतिक संघर्ष

गिरिडीह में जन्मे सुदिव्य ने 1989 में झामुमो जॉइन किया। शिबू सोरेन (गुरुजी) से गहरा रिश्ता था। गुरुजी ने उनके पिता से कहकर उन्हें अपने साथ रखा और बेटे की तरह पाला। झारखंड आंदोलन के दिनों में सक्रिय रहे और कई मुकदमों का सामना किया।

तीन दशक से अधिक समय तक पार्टी के प्रति वफादार रहे। 2019 और 2024 में गिरिडीह से विधायक चुने गए। दिसंबर 2024 में कैबिनेट मंत्री बने और गिरिडीह से 24 साल बाद झामुमो के पहले मंत्री का गौरव हासिल किया।

“झारखंड के हर मोड़ पर है एक कहानी”

वरिष्ठ पत्रकार राकेश परिहार कहते हैं, हेमंत का उनपर पूरा भरोसा था। राज्य पर पार्टी के हित में काम कर रहे थे। वे झारखंड मुक्ति मोर्चा के मजबूत स्तंभ थे। पर्यटन मंत्री के रूप में उन्होंने सिर्फ धार्मिक पर्यटन पर निर्भरता कम करने की कोशिश की।

बजट में असंतुलन (70% धार्मिक, 30% अन्य) को ठीक करने पर जोर दिया। पर्यटन को लेकर उनका विजन स्पष्ट था। वे कहते थे- झारखंड के हर मोड़ पर है एक कहानी, बस उसे सामने लाना है। वे झारखंड के हित में हमेशा बड़े निर्णय लेने वाले नेता थे।

पर्यटन विभाग में बड़ा काम

  • इको-टूरिज्म के लिए जेईटीए समिति को सक्रिय किया।
  • ट्राइबल टूरिज्म और माइंस टूरिज्म सर्किट बनाने के निर्देश दिए।
  • रजरप्पा, पंचघाघ और नेतरहाट में स्काई वॉक (ग्लास ब्रिज) की योजना आगे बढ़ाई।
  • नेतरहाट उत्सव (रण उत्सव से प्रेरित) की शुरुआत की तैयारी की।
  • कोलकाता में टूरिज्म रोड शो कर पश्चिम बंगाल के पर्यटकों को न्योता दिया।
  • कर्नाटक के पर्यटन मॉडल का अध्ययन करने गए।
  • होमस्टे पॉलिसी और नई पर्यटन नीति पर काम किया।
  • महेंद्र सिंह धोनी से मुलाकात कर खेल और पर्यटन को वैश्विक पहचान दिलाने की बात की।


सुदिव्य कुमार सोनू जमीनी कार्यकर्ता से मंत्री बने। उनका जीवन संघर्ष, वफादारी और झारखंड के विकास का प्रतीक था। पर्यटन क्षेत्र में उन्होंने राज्य को नए नक्शे पर लाने की कोशिश की। उनका जाना झामुमो और झारखंड दोनों के लिए बड़ी क्षति है।

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