सुदिव्य कुमार को उनके पिता से मांगने पहुंचे थे शिबू सोरेन, साधारण कार्यकर्ता से मंत्री बनने तक की पूरी कहानी
सुदिव्य कुमार दिशोम गुरु शिबू सोरेन के प्रिय और हेमंत सोरेन के करीबी थे, जिन्होंने गुरुजी के कहने पर झामुमो ...और पढ़ें

दिशोम गुरू और सुदिव्य कुमार। (फाइल फोटो)
HighLights
गुरुजी शिबू सोरेन ने सुदिव्य को झामुमो में शामिल कराया।
सामान्य कार्यकर्ता से मंत्री पद तक का सफर तय किया।
गिरिडीह में झामुमो को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।
राज्य ब्यूरो, रांची। सुदिव्य कुमार न केवल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के काफी नजदीक थे, बल्कि दिशोम गुरू शिबू सोरेन के भी प्रिय थे।
गुरुजी के कहने पर ही सुदिव्य झामुमो में शामिल होकर झारखंड आंदोलन से जुड़े थे। उन्होंने झामुमो में एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की थी।
उनकी यह यात्रा मंत्री बनने तक जारी रही। झामुमो संगठन में उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती थी। उन्हें केंद्रीय महासचिव की भी जिम्मेदारी मिली थी।
खासकर गिरिडीह जिले के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी को मजबूत बनाने में उनका पूरा योगदान रहा। उनके निधन से पार्टी को बड़ी क्षति पहुंची है।
बताया जाता है कि मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले सुदिव्य कुमार के परिवार का राजनीति से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं था। उनकी राजनीतिक करियर की शुरुआत तब हुई थी जब वर्ष 1989 में उनकी मुलाकात दिशोम गुरु शिबू सोरेन से हुई।
सुदिव्य स्वयं बताते थे कि उस समय गुरुजी ने उनसे कहा था कि झारखंड आंदोलन में उनके जैसे पढ़े-लिखे युवाओं की जरूरत है। शुरू में परिवार के लोगों ने उन्हें को राजनीति में जाने से रोका, लेकिन बाद में शिबू सोरेन स्वयं उनके गिरिडीह स्थित घर पहुंचे।
वहां उन्होंने सुदिव्य के पिता शंभूनाथ विश्वकर्मा से कहा कि वे उनके बेटे को मांग के ले जा रहे हैं, कुछ बना कर देंगे। सुदिव्य कुमार का कहना था कि गुरु जी ने बिना कहे उनके पारिवारिक तनाव को भांप लिया था और उस दिन के बाद उनके पिता ने कभी उनके राजनीति में रहने पर सवाल नहीं उठाया।
पार्टी के लिए दीवार लेखन तक किया था कार्य
सुदिव्य कुमार का राजनीतिक जीवन लंबे संघर्ष और संगठन के प्रति समर्पण से भरा रहा। उन्होंने एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में राजनीतिक सफर शुरू करते हुए धीरे-धीरे पार्टी के मजबूत संगठनकर्ता के रूप में अपनी पहचान बनाई।
झामुमो के लोग बताते हैं कि उन्होंने शुरुआती दौर में पार्टी के लिए दीवार लेखन तक किया। पार्टी संगठन के प्रति उनकी सक्रियता को देखते हुए वर्ष 1992 में उन्हें गिरिडीह नगर कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया।
बाद में वर्ष 2003 में झामुमो के गिरिडीह जिलाध्यक्ष बने। वर्ष 2003 से 2010 तक उन्होंने जिलाध्यक्ष के रूप में संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वर्ष 2009 में पहली बार लड़ा विधानसभा चुनाव
सुदिव्य कुमार ने वर्ष 2009 में पहली बार गिरिडीह विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। इसमें उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी और वे छठे स्थान पर रहे थे।
वर्ष 2014 में झामुमो ने एक बार फिर उनपर भरोसा जताते हुए अपना प्रत्याशी बनाया। इस चुनाव में भी वह भाजपा के निर्भय कुमार शाहाबादी से हार गए। हालांकि इसमें उनका प्रदर्शन बेहतर रहा और वे दूसरे स्थान पर रहे।
वर्ष 2019 में निर्भय शाहाबादी को हराकर साबित की अपनी क्षमता
वर्ष 2019 में उन्हें फिर पार्टी का टिकट मिला, जिसमें उन्हें पहली बार जीत हासिल हुई। उन्होंने भाजपा के निर्भय शाहाबादी को हराया। वर्ष 2024 में उन्होंने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। इस बार उन्हें न केवल मंत्री पद की जिम्मेदारी मिली, बल्कि महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी दी गई।
