'JPSC परीक्षा में हुआ बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार', SC में मनन मिश्रा ने उठाई रिटायर जज से जांच की मांग
सुप्रीम कोर्ट ने जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा में कथित धांधली को लेकर केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। ...और पढ़ें

'JPSC परीक्षा में हुआ बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार', SC में मनन मिश्रा ने उठाई रिटायर जज से जांच की मांग
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने जेपीएससी धांधली पर केंद्र-राज्य को नोटिस दिया।
याचिका में सीबीआई जांच या रिटायर्ड जज से जांच की मांग।
मनन मिश्रा ने कहा, पहले भी हुई थी अनियमितताएं, परीक्षा रद्द हुई।
एजेंसी, रांची। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की प्रारंभिक परीक्षा में कथित धांधली को लेकर दायर एक याचिका पर केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। इस याचिका में मामले की स्वतंत्र और समयबद्ध सीबीआई (CBI) जांच की मांग की गई है।
इस मामले पर वकील मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि जेपीएससी और कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और अनियमितताएं हुई हैं।
सीआईडी की जांच में इस बात का खुलासा हुआ था, जिसके बाद कई गिरफ्तारियां भी की गईं। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने संज्ञान लिया और परीक्षा रद कर दी।
#WATCH | Delhi | Advocate Manan Kumar Mishra says, "There were numerous corrupt practices and irregularities in the Jharkhand JPSC and Staff Selection Commission exams. A CID investigation revealed this, and numerous arrests were made. The state government took notice and… https://t.co/eT2Z1jE8XJ pic.twitter.com/8X3eb9nz6X
— ANI (@ANI) August 24, 2026
उन्होंने आगे बताया कि हमने सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया कि इस मामले में याचिका एक ही दिन में दायर की गई, मेंशन की गई और उसी दिन उस पर स्टे (रोक) भी लगा दिया गया। यही वजह है कि हमने एक रिटायर्ड जज की अगुवाई में सीबीआई जांच की मांग की है।
मनन मिश्रा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले की बारीकियों को समझने के लिए विस्तृत जांच का आदेश दिया है और इसी के चलते एक नोटिस भी जारी किया है।
बता दें कि सीबीआई या फिर सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व जज से जांच कराने को लेकर जनहित याचिका सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन द्वारा वकील सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से दायर की गई है। कोर्ट में उनका पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा ने रखा।
याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया है कि इस मामले की जांच या तो सीबीआई से कराई जाए या सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व जज को सौंपी जाए।
इसके अलावा, सरकारी अधिकारियों और परीक्षा एजेंसियों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए वर्तमान में चल रही राज्य सीआईडी की जांच को सीबीआई को ट्रांसफर करने की अपील भी की गई है।
क्या है पूरा विवाद?
संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस याचिका में 19 अप्रैल 2026 को आयोजित 'झारखंड संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा 2025' (विज्ञापन संख्या 01/2026) की सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर चिंताएं व्यक्त की गई हैं।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि परीक्षा के आयोजन में भारी अनियमितताएं हुई हैं, जिसके लिए छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट के तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है। अब सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को लेकर केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।
