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सुरदा ग्रिड सब-स्टेशन बनकर तैयार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जल्द करेंगे लोकार्पण; एक लाख की आबादी को सीधा लाभ

Published: Wed, 13 May 2026 11:38 PM (GMT+05:30)

पूर्वी सिंहभूम के सुरदा में 44.22 करोड़ रुपये की लागत से 132/33 केवी ग्रिड सब-स्टेशन का निर्माण पूरा हो गया ...और पढ़ें

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

HighLights

  1. सुरदा में 132/33 केवी ग्रिड सब-स्टेशन का निर्माण पूरा।

  2. घाटशिला और आसपास के क्षेत्रों में बिजली संकट होगा दूर।

राज्य ब्यूरो, रांची। पूर्वी सिंहभूम जिले के बिजली ढांचे को मजबूती देने के लिए झारखंड ऊर्जा संचरण निगम लिमिटेड (जेयूएसएनएल) ने सुरदा में निर्मित 132/33 केवी ग्रिड सब-स्टेशन का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। 
 
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तैयार होने के साथ ही क्षेत्र के हजारों परिवारों की बरसों पुरानी बिजली संकट की समस्या दूर होने वाली है। संचरण निगम के प्रबंध निदेशक केके वर्मा ने ऊर्जा सचिव के. श्रीनिवासन को औपचारिक पत्र लिखकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस परियोजना के उद्घाटन के लिए समय मांगा है। 
 

मुख्यमंत्री से समय का आग्रह  

विभाग को उम्मीद है कि जल्द ही मुख्यमंत्री इसका लोकार्पण करेंगे, जिससे करीब एक लाख की आबादी को गुणवत्तापूर्ण और निर्बाध बिजली मिलने लगेगी। लगभग 44.22 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना में आधुनिक तकनीक का समावेश किया गया है। 
 
सुरदा में 50-50 एमवीए के दो पावर ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं, जिससे ग्रिड की कुल क्षमता 100 एमवीए हो गई है। 132 केवी धालभूमगढ़-जादूगोड़ा संचरण लाइन को लूप इन-लूप आउट (LILO) के माध्यम से ग्रिड से जोड़ा गया है।  
 

लो-वोल्टेज की समस्या से मिलेगी मुक्ति  

इस ग्रिड के चालू होने से क्षेत्र में 30 से 40 मेगावाट तक निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।  इस ग्रिड सब-स्टेशन का सबसे बड़ा लाभ सुरदा, घाटशिला, और आसनबनी समेत आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को मिलेगा। 
 
वर्तमान में ये इलाके लो-वोल्टेज और बार-बार होने वाली बिजली कटौती की समस्या से जूझ रहे हैं। नई परियोजना शुरू होने के बाद बिजली आपूर्ति व्यवस्था अधिक मजबूत और स्थिर हो जाएगी। 
 
इससे घरेलू उपभोक्ताओं, किसानों और छोटे कारोबारियों को सीधा लाभ होगा। पूर्वी सिंहभूम अपनी खनन और औद्योगिक गतिविधियों के लिए विख्यात है। 
 
अधिकारियों के अनुसार, बेहतर बिजली आपूर्ति से लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) के संचालन में सहूलियत होगी और खनन कार्यों को भी गति मिलेगी। यह परियोजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय बिजली ढांचे के आधुनिकीकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगी।  

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