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    झारखंड गठबंधन में राजद को नहीं किया जा सकता नजरअंदाज, JMM-कांग्रेस में तनाव के बीच तेजस्वी यादव का शक्ति प्रदर्शन

    Updated: Sun, 05 Apr 2026 08:03 PM (IST)

    तेजस्वी यादव के झारखंड दौरे ने झामुमो-कांग्रेस के बीच शीतयुद्ध के दौरान राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। राजद को गठबंधन में नजरअंदाज न करने का संदेश देते हुए ...और पढ़ें

    कानिवल  में तेजस्वी यादव का सम्मान समारोह । जागरण

    कानिवल में तेजस्वी यादव का सम्मान समारोह । जागरण

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    प्रदीप सिंह, रांची। राज्य में सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और कांग्रेस के बीच शीतयुद्ध ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। इसी बीच राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव का दौरा कई मायनों में अहम माना जा रहा है।

    सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर बढ़ते तनाव के संकेतों के बीच तेजस्वी का यह दौरा महज औपचारिक नहीं, बल्कि रणनीतिक हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है। तेजस्वी यादव ने झारखंड पहुंचकर न सिर्फ जमीनी हालात का आकलन किया, बल्कि एक तीर से कई निशाने भी साधे। सम्मेलन के जरिए उन्होंने राजनीतिक शक्ति का प्रदर्शन किया।

    उन्होंने साफ तौर पर यह संदेश दिया कि राजद को गठबंधन में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह बयान उस पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण है, जब राज्य में गठबंधन के भीतर अंदरूनी खींचतान की चर्चाएं तेज हैं।

    Ranchi Tejasvi

    तेजस्वी ने अपने बयान में यह भी संकेत दिया कि आगामी चुनावों में राजद अधिक सीटों पर दावा पेश कर सकता है। वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में तालमेल के तहत राजद को छह सीटें मिली थीं, जिनमें से चार पर पार्टी ने जीत दर्ज की थी। इस प्रदर्शन को आधार बनाकर अब पार्टी अपने राजनीतिक कद के अनुरूप हिस्सेदारी चाहती है। उनका यह रुख आने वाले चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

    राजद को तोड़ने या कमजोर करने की साजिशों का भी जवाब

    तेजस्वी यादव ने पार्टी को कमजोर करने या तोड़ने की कोशिशों पर भी निशाना साधा। उन्होंने बिना नाम लिए विरोधी ताकतों पर आरोप लगाया कि वे गठबंधन की एकजुटता को कमजोर करना चाहती हैं।

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    इस बयान को झारखंड की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में एक स्पष्ट चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। उनका यह दौरा केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं, बल्कि इससे पार्टी के विधायकों और स्थानीय नेताओं को भी स्पष्ट संदेश गया।

    Tejasvi Jharkhand

    उन्होंने संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने और राजनीतिक रूप से सजग रहने पर जोर दिया। यह संकेत भी दिया गया कि आने वाले समय में राजद झारखंड की राजनीति में और अधिक आक्रामक भूमिका निभा सकता है।

    तेजस्वी यादव का यह दौरा झारखंड के सियासी परिदृश्य में नए समीकरणों की आहट दे रहा है। जहां एक ओर गठबंधन के भीतर संतुलन साधने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर सहयोगी दलों के बीच ताकत दिखाने की होड़ भी तेज होती नजर आ रही है।

    ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में यह सियासी संकेत किस दिशा में आगे बढ़ते हैं और गठबंधन की एकता पर इसका क्या असर पड़ता है?