अजब रांची का गजब थाना: ED की जब्ती के बाद 2 साल से बिना फोन नंबर के चल रहा तुपुदाना ओपी, मुंशी के भरोसे जनता!
तुपुदाना ओपी पिछले दो साल से बिना सरकारी संपर्क नंबर के चल रहा है, क्योंकि ईडी ने पूर्व प्रभारी मीरा सिंह के आवास पर छापे के दौरान नंबर जब्त कर लिया थ ...और पढ़ें

तुपुदाना थाना: दो साल से सरकारी नंबर गायब, जनता परेशान, अवैध कारोबारियों की मौज। (तस्वीर: सांकेतिक)
HighLights
तुपुदाना ओपी दो साल से बिना सरकारी नंबर के।
ईडी ने पूर्व प्रभारी के आवास से नंबर जब्त किया था।
जनता को संपर्क में दिक्कत, अवैध धंधे फल-फूल रहे।
जागरण संवाददाता, तुपुदाना (रांची)। डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहां पुलिसिंग को हाई-टेक और चुस्त-दुरुस्त बनाने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं झारखंड की राजधानी रांची में एक ऐसा थाना भी है जो पिछले दो साल से पूरी तरह 'संपर्क विहीन' है।
हम बात कर रहे हैं रांची-खूंटी सीमा पर स्थित तुपुदाना ओपी (आउटपोस्ट) की, जिसके पास आम जनता से जुड़ने के लिए कोई आधिकारिक या सार्वजनिक सरकारी मोबाइल नंबर ही नहीं है।
वजह बेहद दिलचस्प और उतनी ही हैरान करने वाली है—थाने का सरकारी मोबाइल नंबर दो साल पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जब्त कर लिया था, जो आज तक वापस नहीं मिल सका है।
जब प्रभारी के घर पड़ी ED की रेड और जब्त हो गया सरकारी नंबर
इस अजब-गजब कहानी की शुरुआत साल 2023 में हुई थी। तुपुदाना ओपी की तत्कालीन प्रभारी मीरा सिंह पर बालू और जमीन के अवैध कारोबार में लिप्त होने के गंभीर आरोप लगे थे।
भ्रष्टाचार की यह सूचना जब ईडी तक पहुंची, तो एजेंसी ने मीरा सिंह के आवास पर छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान ईडी ने तुपुदाना ओपी का आधिकारिक सरकारी मोबाइल नंबर (94317 06167) सहित कुल 8 मोबाइल फोन जब्त कर लिए थे।
उस छापेमारी के बाद से आज तक इस थाने को नया सरकारी नंबर नसीब नहीं हो पाया। इस दो साल के कार्यकाल में शशिकांत, दुलाल महतो और सिद्धांत कुमार के रूप में तीन नए थाना प्रभारी आए और चले गए।
लेकिन किसी ने भी जनता की सुविधा के लिए एक स्थाई सार्वजनिक नंबर की व्यवस्था नहीं की। हद तो तब हो गई जब साल 2020 में ही बकाया बिल का भुगतान न होने के कारण इस थाने का लैंडलाइन फोन भी डिस्कनेक्ट कर दिया गया था।
खबरें और भी
घटना-दुर्घटना में 'चहेतों' का सहारा लेने को मजबूर जनता
पूर्व में उग्रवाद प्रभावित रहा तुपुदाना क्षेत्र भौगोलिक रूप से काफी संवेदनशील है। किसी भी आपातकालीन स्थिति, दुर्घटना या अपराध की सूचना पुलिस को देने के लिए यहां की स्थानीय जनता के पास कोई सीधा माध्यम नहीं है।
इस समस्या से निपटने के लिए थाने में तैनात पुलिसकर्मियों ने अपने-अपने करीबियों और चहेतों को अपने पर्सनल मोबाइल नंबर बांट रखे हैं। नतीजतन, अगर क्षेत्र में कोई बड़ी वारदात या दुर्घटना होती है, तो आम नागरिक सीधे पुलिस से संपर्क नहीं कर पाता।
उन्हें पहले पुलिस के मददगारों या चहेतों को ढूंढना पड़ता है, फिर उनके जरिए पर्सनल नंबरों पर सूचना पहुंचाई जाती है। यह पूरी व्यवस्था किसी सरकारी तंत्र के बजाय एक निजी सिंडिकेट की तरह काम कर रही है।
मुंशी साकेत कुमार के 'रिमोट कंट्रोल' से चलता है पूरा थाना!
सरकारी नंबर न होने के कारण इस समय तुपुदाना ओपी का पूरा दारोमदार साक्षर मुंशी साकेत कुमार के कंधों पर टिक गया है। क्षेत्र से आने वाली तमाम सूचनाएं, शिकायतें और मामले सबसे पहले मुंशी साकेत कुमार तक ही पहुंचते हैं।
मुंशी ही सारे संपर्कों और मामलों की समीक्षा करता है और उसके बाद वहां से हरी झंडी मिलने या निर्देश मिलने के बाद ही कोई जांच अधिकारी या पुलिस टीम घटना स्थल के लिए रवाना होती है। एक तरह से देखा जाए तो मुंशी ही इस समय पूरे थाने को निर्देशित कर रहा है।
हालांकि, पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर सरकार द्वारा सभी अनुसंधान पदाधिकारियों (IO) को केस डायरी और जांच के लिए एक-एक मोबाइल फोन उपलब्ध कराया गया है, लेकिन वो नंबर व्यक्तिगत जांच के लिए हैं, न कि आम जनता की शिकायतें सुनने के लिए।
पुलिसवालों पर ही मुखबिरी का आरोप, अवैध कारोबारी हो जाते हैं सतर्क
तुपुदाना क्षेत्र में इस अव्यवस्था का सबसे बुरा असर कानून व्यवस्था पर पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि थाने में कोई भी सूचना अब गोपनीय नहीं रह गई है।
यदि कोई जागरूक नागरिक क्षेत्र में चल रहे किसी अवैध धंधे या अपराध की जानकारी किसी पुलिस पदाधिकारी को देता है, तो वह सूचना थाने के ही कुछ कर्मियों द्वारा तुरंत अवैध कारोबारियों तक लीक कर दी जाती है। सूचना लीक होने के कारण अपराधी और तस्कर पहले ही सतर्क हो जाते हैं और पुलिस के पहुंचने से पहले गायब हो जाते हैं।
यही वजह है कि क्षेत्र में बालू और जमीन का अवैध खेल पूरी तरह फल-फूल रहा है, जबकि थाने के अधिकारी इन सब मामलों से पूरी तरह बेखबर बने हुए हैं। आम जनता अब इस डर से पुलिस को सूचना देने से भी कतराने लगी है।