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    बंगाल में सत्ता बदलने पर भी पशु तस्करी जारी, तस्करों ने झारखंड में बदला सुरक्षित रूट

    Updated: Mon, 18 May 2026 01:34 PM (IST)

    पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बावजूद पशु तस्करी का धंधा जारी है, तस्कर पुलिस से बचने के लिए लगातार रूट बदल रहे हैं। ...और पढ़ें

    बंगाल में सत्ता बदलने पर भी पशु तस्करी जारी, तस्करों ने झारखंड में बदला सुरक्षित रूट

    बंगाल में सत्ता बदलने पर भी पशु तस्करी जारी, तस्करों ने झारखंड में बदला सुरक्षित रूट

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    संवाद सहयोगी, बोरियो (साहिबगंज)। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन का असर पशु तस्करी के धंधे पर नहीं दिख रहा है। यह पहले की तरह ही जारी है। हां, पशु तस्करों ने रूट जरूर बदल लिया है। वैसे भी पुलिस से बचने के लिए पशु तस्कर अक्सर रूट बदलते रहते हैं।

    इन दिनों बोरियो के जेटकेकुम्हारजोरी के रास्ते पशुओं को पश्चिम बंगाल भेजा जा रहा है। प्रत्येक रविवार को गोड्डा जिले के डुमरिया में पशु हाट लगता है। तस्कर वहां पशुओं की खरीदारी करते हैं तथा पैदल ही उसे लेकर भुंडा पहाड़ तक लाते हैं। वहां रुक कर सभी विश्राम करते हैं।ॉ

    खाना पीना करते हैं फिर रात में जेटकेकुम्हारजोरी, लोगाय (बरहेट), हिरणपुर (पाकुड़) के रास्ते बंगाल भेजते हैं। पशु तस्करों के लिए यह सेफ जोन है। इस रास्ते में आने वाले सभी पहाड़ी गांव हैं। गोड्डा एवं साहिबगंज जिले की सीमा यहां लगती है।

    इन इलाकों में पुलिस गश्ती न के बराबर होती है जिसका फायदा पशु तस्कर उठाते हैं। पूर्व में बोरियो-बरहेट मुख्य मार्ग से ही वाहनों से पशुओं की तस्करी की जाती थी, लेकिन कई बार पशु तस्कर पकड़े गए। इसे देखते हुए पशु तस्करों ने रूट बदल लिया है।

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    बताया जाता है कि तस्कर पशुओं को हांकने के लिए स्थानीय लोगों को रखते हैं। उन्हें आठ सौ से एक हजार रुपये तक मिलता है। आगे-आगे ग्रामीण पैदल पशुओं को ले जाते हैं और पीछे से तस्कर किसी वाहन से जाता है। रविवार को पशुओं को अक्सर ले जाते लोग देखते हैं।

    मार्च में तीनपहाड़ में हुआ था खुलासा:

    20 मार्च को तीनपहाड़ थाना क्षेत्र के सरयपुरा गांव होते हुए पशु तस्करी की बात सामने आयी थी। बिना नंबर की पिकअप वैन रात में कीचड़ में फंस गयी। पशु तस्कर उसे निकालने की कोशिश कर रहे थे तभी कुछ गांव वाले जग गए। यह देखकर पशु तस्कर वाहन को छोड़कर भाग निकले।

    ग्रामीणों ने उक्त वाहन की जांच पड़ताल की तो उसमें दो गाय तथा तीन सांढ़ लदा पाया। तीनों सांढ़ बेहोशी की हालत में थे। उस समय यह बात आयी थी कि गो तस्कर पुलिस ने बचने के लिए ग्रामीण सड़कों का उपयोग करते हैं।

    पूर्व में भी आते रहे हैं पशु तस्करी के मामले:

    जिले में पूर्व में भी पशु तस्करी के मामले सामने आ चुके हैं। छह फरवरी 24 को प्रशिक्षु डीएसपी सह तत्कालीन थाना प्रभारी रूपक कुमार सिंह के निर्देश पर बोरियो थाने की पुलिस ने 13 पशु लदे एक पिकअप वैन को जब्त किया तथा चालक पाकुड़ निवासी कैलाश साह को गिरफ्तार किया था।

    रूपक कुमार सिंह को ग्रामीणों ने पशु तस्करी की सूचना दी थी। इससे पहले 18 दिसंबर 2023 को बोआरीजोर इमलीगाछ के पास सड़क हादसे में वृद्धा संझली टुडू की मौत हो गई थी। चालक वाहन छोड़कर भाग गया था। पुलिस जब वहां पहुंची तो पाया कि उक्त वाहन में 16 मवेशी लदा हुआ था।

    सभी पशुओं का पैर बांधकर रखा गया था। 17 नवंबर 2022 को मोरंग नदी के पास चार तस्करों को 14 मवेशी के साथ पकड़ा गया था। 12 दिसंबर 2022 की देर रात चसगांवा के पास 32 मवेशियों को जब्त किया गया था।