सीजीएल परीक्षा रद होने से झारखंड के कई जिलों में सरकारी कामकाज ठप, अधिकारियों का भविष्य अधर में
सीजीएल और टीडीपीएल की परीक्षाओं को रद होने से साहिबगंज में 50 से अधिक अधिकारी प्रभावित हुए हैं, जिससे जिले का कामकाज ठप होने की नौबत है। प्रभावित अधिक ...और पढ़ें

साहिबगंज जिले में करीब पांच दर्जन पदाधिकारी कार्यरत।
HighLights
राज्य सरकार ने सीजीएल और टीडीपीएल परीक्षाएं रद्द कीं।
साहिबगंज में 50 से अधिक अधिकारी हुए प्रभावित, चिंतित।
निसार अहमद जैसे मेहनती अधिकारी न्याय की मांग कर रहे।
जागरण संवाददाता, साहिबगंज। राज्य सरकार की ओर से सीजीएल परीक्षा व टीडीपीएल द्वारा ली गयी सभी परीक्षाओं को रद करने का जिले में व्यापक प्रभाव पड़ेगा। इन परीक्षाओं के माध्यम से नियुक्त 50 से अधिक पदाधिकारी जिले में कार्यरत हैं। झारखंड के दूसरे जिलों का भी यही हाल है। इसका असर सभी विभागों में पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद कार्मिक विभाग से परीक्षाओं को रद करने का नोटिफिकेशन जारी हो चुका है। जिले के कई अधिकारी राजधानी रांची निकल चुके हैं। कुछ अधिकारी जिले में ही हैं, लेकिन उनके कार्यालय में ताला लटक रहा है।
अधिकारी अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उनकी निगाहें अब सरकार के आदेश पर टिकी है। मंगलवार दोपहर तक इस संबंध में किसी प्रकार का आदेश जिले में नहीं पहुंचा था। जिले में जेपीएससी के आठ परीक्ष्यमान उपसमाहर्ता विभिन्न विभागों में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
करीब छह माह पूर्व सभी नौ प्रखंडों में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारियों की पोस्टिंग हुई थी। इनमें से बरहड़वा के प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी घूस लेते पकड़े गए थे जिसकी वजह से उन्हें जेल भेज दिया गया था। बरहड़वा, पतना, बोरियो व मंडरो में प्रखंड कल्याण पदाधिकारी की नियुक्ति हुई थी। राजमहल, बरहड़वा, तालझारी, बरहेट व बोरियो में एक-एक सीआइ की नियुक्ति की गयी थी।
इसके अलावा 24 महिला सुपरवाइजर की दो-तीन माह पूर्व बहाली हुई थी। सभी अपने अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। बोरियो अंचल में पदस्थापित सीआइ सुधीर कुमार सरकार के निर्णय से नाखुश हैं। उनका कहना है कि बिना जांच किए बहाली को रद कर देना गलत है।
1975 अधिकारी व कर्मचारी सरकार के इस निर्णय से प्रभावित होंगे। कहा कि सरकार को जेनुइन स्टूडेंट की बात भी सुननी चाहिए। इस निर्णय से कई लोगों की जिंदगी तबाह हो सकती है। मंगलवार को बोरियो प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के कार्यालय में ताला लटका रहा। एमओ सुभाष कुमार कार्यालय नहीं आए। उन्होंने कॉल भी रिसीव नहीं किया।

साइकिल की दुकान से सचिवालय तक का सफर, अब सदमें में
संघर्ष, मेहनत और लगन से लिखी गई सफलता की एक कहानी पर सरकारी फैसले ने ग्रहण लगा दिया। जेएसएससी सीजीएल रद होने के बाद इस परीक्षा से चयनित होकर पतना के कल्याण पदाधिकारी बने पाकुड़ जिले के हिरणपुर निवासी निसार अहमद गहरे सदमे में हैं।
सरकार के इस फैसले के बाद करीब दो हजार चयनित अभ्यर्थियों की नौकरी पर तलवार लटक गई है। सफल अभ्यर्थी सड़क पर उतर कर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और न्याय के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की बात कही है।
निसार अहमद की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं। हिरणपुर में साइकिल की छोटी सी दुकान चलाने वाले मो. कुर्बान अंसारी के चार बेटों में दूसरे नंबर के निसार अहमद का जन्म एक बेहद साधारण परिवार में हुआ। बड़े भाई पिता के कार्य में हाथ बंटा रहे हैं। दो छोटे भाई पढ़ाई कर रहे हैं। निसार ने हार नहीं मानी। नौकरी की शुरुआत लिट्टीपाड़ा प्रखंड में कंप्यूटर ऑपरेटर के तौर पर की।
फिर केंद्र और राज्य सरकारी के विभिन्न विभाग में नौकरी की। साथ-साथ पढ़ाई जारी रखी। इसी निरंतर मेहनत का फल था कि जेएसएससी सीजीएल 2023 में चयनित होकर वे प्रखंड कल्याण पदाधिकारी बने। वे सरकारी नौकरी जुलाई 2019 से कर रहे हैं।
उनका चयन पहली बार जुलाई 2019 में आइआरबी में हुआ। गोड्डा के पौड़ैयाहाट में पोस्टिंग थी। करीब तीन माह नौकरी करने के बाद रेलवे के ग्रुप डी की परीक्षा पास की। ओड़िशा में उन्होंने ट्रैक मैन पद पर ज्वाइन किया। फिर दो माह बाद रेलवे के ग्रुप सी परीक्षा पास कर टाटानगर में एसी टेक्नेशियन पद पर योगदान किया।
करीब ढाई साल यहां सेवा देने के बाद उनका चयन जुलाई 2023 में पंचायत सचिव पद पर हुआ। उन्होंने पाकुड़ जिले के लिट्टीपाड़ा प्रखंड में पंचायत सचिव पद पर सेवा दी। उन्होंने तैयारी जारी रखते हुए सितंबर 2024 में जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में सफलता हासिल की।
प्रखंड कल्याण पदाधिकारी बने, परंतु कोर्ट में मामला चला गया। दिसंबर 2025 में कोर्ट के निर्देश के बाद ही उनकी ज्वाइनिंग पतना प्रखंड में प्रखंड कल्याण पदाधिकारी के रूप में हुई।
घर बिखर जाएगा, दोषी और निर्दोष में फर्क करे सरकार
परीक्षा रद करने की खबर मिलते ही निसार मर्माहत हैं। उन्होंने कहा अगर कोई धांधली की है तो उसे पकड़ कर उसकी नियुक्ति रद करें, जेल भेजें। हम उसका समर्थन करते हैं लेकिन पूरी परीक्षा रद कर देना कहां का इंसाफ है? हमने कोई धांधली नहीं की।
हमने पसीने से, रात-रात भर जाग कर ये मुकाम हासिल किया था। साइकिल मिस्त्री का बेटा प्रखंड कल्याण पदाधिकारी बनना क्या गुनाह हो गया? उन्होंने सरकार से मांग की कि वह दोषी और निर्दोष में फर्क करे।एक-दो सौ लोगों की गलती की सजा दो हजार ईमानदार परिवारों को क्यों? सरकार सीबीआई जांच करा ले। जो फर्जी है उसे बाहर कर दे लेकिन हम जैसे गरीब बच्चों का भविष्य बर्बाद न करे।
