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Jharkhand SIR: वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने में नहीं चलेगी चालाकी, झारखंड में अलग से प्रमाणपत्र बनाने पर रोक

By Pranesh KumarEdited By: Krishna Bahadur Singh Parihar
Published: Sun, 06 Sep 2026 01:09 PM (IST)

झारखंड में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (SIR) के लिए विशेष जाति व निवास प्रमाणपत्र जारी करने पर रोक लगा ...और पढ़ें

HighLights

  1. SIR के लिए विशेष प्रमाणपत्र जारी करने पर रोक।

  2. मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की नाराजगी के बाद निर्णय।

  3. साहिबगंज में 2000 से अधिक प्रमाणपत्रों की वैधता संदिग्ध।

डॉ. प्रणेश, साहिबगंज। अब सिर्फ मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (SIR ) के लिए राज्य में जाति व निवास प्रमाणपत्र नहीं बनेगा। राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार की नाराजगी के बाद जिले में इस तरह का प्रमाणपत्र निर्गत करना बंद कर दिया गया है।

जिले के विभिन्न प्रखंडों में इस तरह के अब तक दो हजार से अधिक प्रमाणपत्र निर्गत किए जा चुके हैं। सैकड़ों लोगों ने SIR की सुनवाई के दौरान उसका उपयोग भी कर लिया।

हालांकि, अब उन दस्तावेजों का जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त के स्तर से सत्यापन होना बाकी है। उक्त प्रमाणपत्र के अमान्य होने की स्थिति में संबंधित लोगों से दूसरा प्रमाणपत्र मांगा जा सकता है।

वैसे आगे क्या होगा यह बताने के लिए कोई तैयार नहीं है। जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त दीपक दूबे व उप निर्वाचन पदाधिकारी कुमुदिनी टूडू से उनके मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने काल रिसीव नहीं किया।

बरहड़वा में जांच के दौरान आया मामला

राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार फर्जी दस्तावेज के आधार पर मतदाता बनने की कोशिश की शिकायतों की जांच के लिए शनिवार को यहां आए थे।

इस क्रम में जांच पड़ताल के बाद चार मतदाता व दस्तावेज बनाने वाले कॉमन सर्विस सेंटर के संचालक पर प्राथमिकी दर्ज कराने का उन्होंने निर्देश दिया।

इसी दौरान यह बात आयी कि केवल SIR के लिए प्रखंड में जाति व निवास प्रमाणपत्र बनाया जा रहा है। इस पर उन्हाेंने वहां के सीओ को फटकार लगायी और केवल SIR के लिए जाति व प्रमाणपत्र निर्गत करने को गलत बताया। इसके लिए सीओ पर कार्रवाई की बात भी कही।

अब यह बात सामने आ रही है कि जिले के अधिकतर प्रखंडों में इस तरह का प्रमाणपत्र निर्गत किया गया है। बरहड़वा अंचल में निर्गत प्रमाणपत्र पर SIR अंकित नहीं है, लेकिन सीआइ की रिपोर्ट में इसका उल्लेख है।

उधर, राजमहल, उधवा सहित अन्य प्रखंडों में निर्गत प्रमाणपत्र के उपर ही SIR लिख दिया गया है। बताया गया कि इस प्रमाणपत्रों की वैधता केवल तीन माह निर्धारित की गयी है। अन्य कार्यों में इसका उपयोग नहीं किया जा सकेगा।

अत्यधिक भीड़ के मद्देनजर सरकार ने लिया था निर्णय

राज्य में चल रहे SIR व राशन कार्ड के लिए बड़ी संख्या में लोगों ने जाति व निवास प्रमाणपत्र के लिए आवेदन दिया। ऑनलाइन प्रमाणपत्र निर्गत करने में ज्यादा समय लग रहा था। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने ऑफलाइन जाति व निवास प्रमाणपत्र निर्गत करने का निर्देश पिछले दिनों दिया था।

आदेश तो जिलों में भेज दिया गया लेकिन उसके साथ प्रमाणपत्र का कोई फार्मेट नहीं भेजा गया। ऐसे में अंचलाधिकारियों ने अपने-अपने विवेक के अनुसार प्रारूप बना लिया और उसी प्रारूप पर जाति व निवास प्रमाणपत्र निर्गत किया जा रहा था। ऐसा केवल साहिबगंज ही नहीं पूरे राज्य में हो रहा था।

सीईओ की आपत्ति के बाद अब क्या होगा यह बड़ा सवाल है। केवल साहिबगंज जिले में जाति प्रमाणपत्र के 86942 व निवास प्रमाणपत्र के 80417 ऑनलाइन आवेदन लंबित हैं।

इसके अलावा हजारों ऑफलाइन आवेदन भी आए हैं। अगर समय पर उनका प्रमाणपत्र नहीं बना तो मतदाता सूची से उनका नाम कट सकता है।

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