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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 16, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    ये कैसी ममता! दुधमुंही बच्ची को अस्पताल में छोड़ भागी महिला, तीसरी बार बेटी पैदा होना परिवार को नागवार गुजरा

    By Jagran NewsEdited By: Arijita Sen
    Updated: Thu, 16 Feb 2023 01:24 PM (GMT+05:30)

    महिला को पहले से दो बेटियां थीं और अब तीसरी बार बेटी पैदा होने से घर के लोग नाराज हो गए। ऐसे में बुधवार को पैदा हुई बच्‍ची को वह अस्‍पताल में ही छोड़क ...और पढ़ें

    दुधमुंही बच्ची को अस्पताल में छोड़ भागी महिला
    दुधमुंही बच्ची को अस्पताल में छोड़ भागी महिला

    संवाद सहयोगी, तालझारी (साहिबगंज)। राजमहल अनुमंडलीय अस्पताल में बुधवार को एक महिला ने बेटी को जन्म देने के बाद नवजात को अस्पताल में ही छोड़कर घर चली गई। इसके बाद महिला को काफी ढूंढा गया, लेकिन वह आसपास कहीं नहीं मिली। इसके बाद महिला के घर का पता लगने के बाद वहां संपर्क कर महिला को बुलाया गया, लेकिन वह नहीं आई। अस्पताल प्रशासन की ओर से जब दबाव बनाया गया, तो महिला के स्वजन अस्पताल आए और नवजात को घर ले गए।

    तीसरी बार बेटी होने से परेशान परिवार

    दरअसल, राजमहल प्रखंड के सरकंडा के निकट पचकठिया गांव की एक महिला को बुधवार की दोपहर राजमहल अनुमंडलीय अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कुछ देर बाद उन्होंने एक बेटी को जन्म दिया। इससे उनके स्वजनों में मायूसी छा गई। महिला को पहले से ही दो बेटी है और अब तीसरी बेटी होने से स्वजनों में नाराजगी हो गई। इस कारण महिला नवजात को अस्पताल में ही छोड़कर घर आ गई।

    महिला ने बच्‍ची को अपना बताने से किया इंकार

    अस्पताल की एक स्टाफ ने शिशु को बरहरवा इलाके की एक महिला को सौंप दिया। इसकी जानकारी अस्‍पताल कर्मियों को लगी। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक महिला ने बच्ची को अपना बताने से इंकार कर रही है। सीएस रामदेव पासवान से इस संबंध में अनभिज्ञता जाहिर की।

    स्‍टेशन में बच्‍चों को छोड़ गायब हुई मां

    कुछ ऐसी ही घटना बीते दिन धनबाद से सामने आई, जिसमें एक महिला अपने दो मासूम बच्‍चों को स्‍टेशन पर छोड़कर कहीं चली गई। बच्‍चे गहरी नींद में थे और जब ये उठे तो अपनी मां की तलाश में इधर-उधर चक्‍कर काटते रहे। इन्‍हें देखकर धनबाद स्टेशन पर हर आने-जाने वाले का दिल पसीज गया। रेल पुलिस ने बच्‍चों को रेलवे चाइल्ड लाइन की मदद से बाल कल्याण समिति के पास भेजा, जहां से उन्हें फिलहाल भुईफोड़ के आश्रय गृह में रखा गया है।

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