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    इंडोनेशिया में गूंजेगी सरायकेला छऊ की पहचान: इंटरनेशनल फेस्टिवल में शामिल होंगे गुरु मलय साहू

    Updated: Mon, 03 Aug 2026 09:51 PM (IST)

    सरायकेला के गुरु मलय कुमार साहू और उनके पुत्र अमित कुमार साहू इंडोनेशिया में इंटरनेशनल सेमिनार एंड फेस्टिवल ऑफ ओरल ट्रेडीशन्स में सरायकेला छऊ नृत्य का ...और पढ़ें

    सरायकेला के गुरु मलय कुमार साहू और अमित कुमार साहू जकार्ता, इंडोनेशिया में छऊ की प्राचीन परंपरा का प्रतिनिधित्व करेंगे।

    सरायकेला के गुरु मलय कुमार साहू और अमित कुमार साहू जकार्ता, इंडोनेशिया में छऊ की प्राचीन परंपरा का प्रतिनिधित्व करेंगे।

    HighLights

    1. गुरु मलय साहू और अमित साहू करेंगे सरायकेला छऊ का प्रतिनिधित्व।

    2. जकार्ता में इंटरनेशनल फेस्टिवल ऑफ ओरल ट्रेडीशन्स में भागीदारी।

    3. विश्व मंच पर सरायकेला छऊ की पहचान और विरासत को बढ़ाना।

    जागरण संवाददाता, सरायकेला। सरायकेला की विश्वप्रसिद्ध सरायकेला छऊ नृत्य शैली एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन करने जा रही है। 
     
    श्री केदार आर्ट सेंटर, सरायकेला के गुरु मलय कुमार साहू और उनके पुत्र अमित कुमार साहू सोमवार शाम इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता के लिए रवाना हो गए।
     
    वे 5 से 8 अगस्त, 2026 तक जकार्ता में आयोजित होने वाले इंटरनेशनल सेमिनार एंड फेस्टिवल ऑफ ओरल ट्रेडीशन्स में सरायकेला छऊ की प्राचीन और समृद्ध परंपरा का प्रतिनिधित्व करेंगे।
     

    वैश्विक विद्वान और कलाकार होंगे शामिल

    इस अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम का आयोजन एसोसिएशन ऑफ ओरल ट्रेडीशन्स द्वारा जकार्ता की स्थानीय सरकार और इंडोनेशिया के शिक्षा, संस्कृति, अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से किया जा रहा है। 
     
    इसमें दुनिया भर के प्रख्यात विद्वान, शोधकर्ता और पारंपरिक कलाकार अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural Heritage) को संरक्षित करने और उसका उत्सव मनाने के लिए एकत्र हो रहे हैं।
     

    पद्मश्री स्वर्गीय गुरु केदारनाथ साहू की विरासत को बढ़ा रहे आगे

    पद्मश्री एवं संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित स्वर्गीय गुरु केदारनाथ साहू द्वारा स्थापित इस कलात्मक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए गुरु मलय कुमार साहू और अमित कुमार साहू सरायकेला छऊ की अमूल्य धरोहर को प्रस्तुत करेंगे। 
     
    इस भागीदारी का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस सदियों पुरानी मुखौटा नृत्य शैली के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
     

    सरायकेला छऊ हमारी सांस्कृतिक आत्मा है


    इंडोनेशिया रवाना होने से पूर्व गुरु मलय कुमार साहू ने कहा कि सरायकेला छऊ केवल एक नृत्य रूप नहीं है। यह हमारी पहचान, हमारा इतिहास और हमारी सांस्कृतिक आत्मा है। अंतर्राष्ट्रीय मंच पर इसका प्रतिनिधित्व करना हमारे लिए अत्यंत गर्व की बात है।