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    सरायकेला के 1082 स्कूलों में सुरक्षा राम भरोसे: बिना चारदीवारी पढ़ रहे बच्चे, मवेशी और आवारा कुत्तों का मंडरा रहा खतरा

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 08:00 AM (IST)

    सरायकेला-खरसावां जिले के 1082 स्कूलों में चारदीवारी न होने से बच्चों की सुरक्षा खतरे में है, जहां आवारा पशु और जहरीले जीव परिसर में घुस आते हैं। ...और पढ़ें

    स्‍कूल की प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

    स्‍कूल की प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

    HighLights

    1. आवारा पशु, सांप-बिच्छू से बच्चों की सुरक्षा खतरे में।

    2. शाम को स्कूल परिसर बनते हैं असामाजिक तत्वों का अड्डा।

    गुरदीप राज, सरायकेला। सुबह की घंटी बजते ही स्कूल परिसर बच्चों की चहल-पहल से गुलजार हो उठता है। कोई प्रार्थना सभा में खड़ा है, तो कोई मैदान में दौड़ रहा है। 
     
    लेकिन इन मासूम चेहरों के बीच एक ऐसा खतरा हर दिन चुपचाप मौजूद रहता है, जिसे देखकर अभिभावकों की चिंता बढ़ रही है।
     
    स्कूलों के चारों ओर चारदीवारी न होने से खुले परिसर में कभी आवारा कुत्ते और मवेशी घुस आते हैं, तो बरसात के दिनों में झाड़ियों से निकलकर जहरीले सांप बच्चों के खेलने वाले मैदान तक पहुंच जाते हैं। 
     
    यह किसी एक स्कूल की तस्वीर नहीं, बल्कि सरायकेला-खरसावां जिले के 1082 प्राथमिक, मध्य और उच्च विद्यालयों की कड़वी हकीकत है।
     

    जिले के 76% से अधिक स्कूल असुरक्षित 

    जिले के नौ प्रखंडों में कुल 1,421 प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। इनमें से 1,082 विद्यालय बिना चारदीवारी के चल रहे हैं, जहां हजारों बच्चे रोज जोखिम उठाकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। 
     
    जिले में केवल 339 विद्यालय ऐसे हैं, जहां पक्की दीवार, मरम्मत योग्य दीवार या तारबंदी के माध्यम से परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।
     
    चारदीवारी निर्माण की मांग वर्षों से उठ रही है, लेकिन विभागीय उदासीनता, बजट के अभाव और अधिकारियों के लगातार तबादलों के कारण प्रस्ताव फाइलों में दबे पड़े हैं।
     

    शाम ढलते ही शराबियों का अड्डा बनते हैं स्कूल परिसर

    जिन विद्यालयों में चारदीवारी नहीं है, वहां शाम होते ही असामाजिक तत्वों का जमावड़ा शुरू हो जाता है। शराब की महफिलें सजती हैं। 
     
    सुबह जब बच्चे और शिक्षक स्कूल पहुंचते हैं, तो परिसर में शराब की बोतलें, सिगरेट के रैपर और अन्य आपत्तिजनक सामान बिखरे मिलते हैं।
     

    बारिश के मौसम में जहरीले जीवों का बना रहता है खौफ

    लगातार हो रही बारिश के कारण स्कूल परिसरों में घास और झाड़ियां उग आई हैं। खेतों और झाड़ियों से निकलकर सांप, बिच्छू व अन्य विषैले जीव आसानी से कक्षाओं तक पहुंच जाते हैं। 
     
    शिक्षकों का कहना है कि बच्चों को मैदान में भेजने से पहले पूरे परिसर की जांच करनी पड़ती है और कई बार सांप दिखने पर पढ़ाई रोकनी पड़ती है।
        

    नई शिक्षा नीति में सुरक्षित वातावरण पर जोर दिया गया है। बिना चारदीवारी के स्कूल चलाना इस नीति के विपरीत है। यदि समय रहते बाउंड्री वॉल नहीं बनी, तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

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    ललित चौधरी, अभिभावक

    बच्चे पढ़ने जाते हैं, लेकिन सुरक्षा के बिना हर दिन अनहोनी का डर बना रहता है। चारदीवारी बनने से सुरक्षा के साथ-साथ असामाजिक गतिविधियों पर भी लगाम लगेगी।

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    सुमित चौधरी, अभिभावक

     जिले भर के स्कूल प्रबंधकों से स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। विद्यालयों में चारदीवारी के लिए फंड राज्य स्तर से आता है। प्रस्ताव तैयार कर संबंधित विभाग को भेजा जा रहा है।

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    अमित कुमार, जिला शिक्षा अधीक्षक, सरायकेला-खरसावां