सफेद जामदानी साड़ी में कंगना रनौत का दिखा खूबसूरत अंदाज, जानिए क्या है इस बंगाली साड़ी की खासियत
बंगाल चुनाव प्रचार के दौरान कंगना रनौत सफेद रंग की जामदानी साड़ी में दिखीं। यह साड़ी बंगाल की संस्कृति का अहम हिस्सा है। ...और पढ़ें

क्यों इतनी खास है जामदानी साड़ी? (Picture Courtesy: Instagram)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बंगाल में चुनाव प्रचार के लिए एक्ट्रेस और मंडी सांसद कंगना रनौत एक रोड शो के दौरान सफेद रंग की जामदानी साड़ी में नजर आईं। कंगना इस साड़ी में बेहद खूबसूरत दिख रही थीं और उनकी साड़ी ने सभी का ध्यान भी खूब खींचा।
जामदानी साड़ी का बंगाल की संस्कृति से गहरा नाता है। इसलिए चुनाव प्रचार के दौरान कंगना का इस साड़ी में दिखना महज इत्तेफाक नहीं है। चलिए जानते हैं क्या है जामदानी साड़ी का बंगाल से नाता और क्यों यह साड़ी इतनी खास मानी जाती है।
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(Picture Courtesy: Instagram)
क्यों स्पेशल है जामदानी?
जामदानी साड़ी हाथ से की जाने वाली बुनाई की दुनिया में सबसे एडवांस्ड और मुश्किल कला का नमूना है। अपनी शीयर बनावट और मखमली डिजाइनों के लिए मशहूर जामदानी, बंगाल की सांस्कृतिक पहचान का गौरव है। साल 2013 में यूनेस्को द्वारा इसे अमूर्त सांस्कृतिक विरासत घोषित किया गया, जो इस कला को और भी खास बना देता है।
जामदानी की शुरुआत और इतिहास
ऐतिहासिक रूप से, इस कला का केंद्र बांग्लादेश की राजधानी ढाका और उसके आसपास के क्षेत्र रहे हैं। इसलिए यह साड़ी बंगाल की संस्कृति से बेहद जुड़ी हुई है। मुगल काल में इस कला को शाही संरक्षण मिला, जिससे इसकी बारीकी और गुणवत्ता अपने चरम पर पहुंच गई।
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शुरुआत में जामदानी के नमूने प्रकृति से प्रेरित होते थे, लेकिन उनकी बनावट ज्योमेट्रिक होती थी। इसके पीछे एक दिलचस्प कारण यह है कि बुनकर किसी मशीन का नहीं, बल्कि धागों की गिनती का इस्तेमाल करते थे, जिससे आकृतियां कोणीय और सटीक बनती थीं।

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जामदानी की क्या खासियत है?
जामदानी को दूसरी साड़ियों से जो अलग बनाता है, वह है इसकी डिस्कंटीन्यूअस वेफ्ट तकनीक।
- हाथ से बुनाई- इसमें डिजाइन बनाने के लिए किसी प्रिंट या एम्ब्रॉयडरी मशीन का इस्तेमाल नहीं होता। बुनकर करघे पर मुख्य धागे के बीच में दूसरे धागों को जोड़कर मोटिफ्स तैयार करता है।
- हल्का और हवादा- यह बारीक मलमल या सूती कपड़े पर बनाई जाती है, जिससे यह बेहद हल्की और पहनने में आरामदायक होती है।
- पारंपरिक मोटिफ्स- चमेली, पन्ना हजार और फूलवार इसके कुछ मशहूर डिजाइन हैं।
- सामुदायिक कला- जामदानी केवल एक बुनकर की मेहनत नहीं, बल्कि रंगरेज, कताई करने वाले और करघा सजाने वाले पूरे समुदाय की एकता का प्रतीक है।
इसे बनाने में कितना समय लगता है?
एक जामदानी साड़ी बनाने में बुनकरों को महीनों से सालों तक का समय लग जाता है । इसकी बुनाई में लगने वाला समय डिजाइन पर निर्भर करता है। एक कुशल कारीगर आमतौर एक दिन में केवल एक चौथाई इंच से एक इंच तक ही कपड़ा बुन पाता है। इस हिसाब से एक साधारण जामदानी साड़ी तैयार होने में कम से कम 6 महीने का समय लेती है।
अगर डिजाइन बहुत बारीक और घना है, तो दो बुनकरों की जोड़ी को 10-10 घंटे रोज काम करके एक साड़ी पूरी करने में 3 साल तक का समय लग सकता है।
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(Picture Courtesy: Instagram)
सदियों की विरासत है जामदानी
आज के दौर में जहां मशीनें मिनटों में सैकड़ों साड़ियां तैयार कर देती हैं, वहीं जामदानी अपनी बारीकी के कारण आज भी बेशकीमती बनी हुई है। यह साड़ी केवल एक कपड़ा नहीं, बल्कि उन बुनकर परिवारों की विरासत है जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस कला को जीवित रखे हुए हैं।