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    भारत में बढ़ रही है नेचुरल डायमंड ज्वेलरी की मांग, जानें क्यों बदल रही है लोगों की पसंद

    Updated: Wed, 29 Jul 2026 06:24 PM (IST)

    भारत में प्राकृतिक हीरे के आभूषणों की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिसमें टियर-2 और टियर-3 शहरों का योगदान महत्वपूर्ण है। बदलती जीवनशैली, बढ़ती आय और डिजि ...और पढ़ें

    भारत में प्राकृतिक हीरे के आभूषणों की बढ़ती मांग (Picture Credit- AI Generated)

    भारत में प्राकृतिक हीरे के आभूषणों की बढ़ती मांग (Picture Credit- AI Generated)

    HighLights

    1. प्राकृतिक हीरे की मांग में टियर-2, टियर-3 शहरों का योगदान

    2. महिलाएं अब रोजमर्रा के लिए खरीद रही हैं हीरे के आभूषण

    3. डिजिटल पहुंच और बढ़ती आय ने बदला उपभोक्ताओं का व्यवहार

    ब्रांड डेस्क, नई दिल्ली। समय के साथ बदलाव होता रहता है और हाल के वर्षों में यह बदलाव भारत के ज्वेलरी सेक्टर में साफ तौर पर देखा गया है। प्राकृतिक हीरे के आभूषणों की बढ़ती मांग देश भर में उपभोक्ताओं के बदलते व्यवहार का एक स्पष्ट प्रमाण है। 

    'डी बीयर्स ग्रुप' के 2025 इंडिया डायमंड एक्विजिशन स्टडी के अनुसार, ‘भारत का नेचुरल डायमंड मार्केट साल 2030 तक लगभग ₹1.5 लाख करोड़ (करीब 14 बिलियन पाउंड) तक पहुंचने का अनुमान है। इस स्टडी में उपभोक्ताओं के व्यवहार में एक बड़ा बदलाव सामने आया है कि महिलाएं अब आभूषणों को केवल शादियों या खास मौकों के लिए नहीं, बल्कि रोजमर्रा पहनने के लिए खरीद रही हैं।

    पारंपरिक रूप से हीरों की खरीदारी ज्यादातर बड़े महानगरों तक ही सीमित थी। हालांकि, अब टियर-2 और टियर-3 शहरों के उपभोक्ता  प्राकृतिक हीरे की मार्केट में ग्रोथ के बड़े ड्राइवर बनकर उभर रहे हैं। छोटे शहरों में बढ़ती आमदनी, बेहतर डिजिटल पहुंच और बदलती जीवनशैली की आकांक्षाओं ने उपभोक्ताओं की पसंद को काफी हद तक प्रभावित किया है। इसके अलावा, सोने की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने भी इस बदलाव में मदद की है। जैसे-जैसे सोने के आभूषण महंगे होते जा रहे हैं, उपभोक्ता एक मूल्यवान और आकर्षक विकल्प के रूप में प्राकृतिक हीरों के आभूषणों को तरजीह दे रहे हैं।

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    (Picture Credit-Anmol Accents)

    लग्जरी के प्रति नया आकर्षण

    यह बदलाव छोटे शहरों के बदलते आर्थिक परिदृश्य से गहराई से जुड़ा हुआ है। छोटे व्यवसायों, स्टार्टअप्स, नौकरी के बेहतर अवसरों और बेहतर कनेक्टिविटी के कारण लोगों की आमदनी बढ़ी है।

    इसके साथ ही, लोगों की जीवनशैली और उम्मीदें भी बदली हैं। युवा प्रोफेशन्सल्स और बिजनेस कम्युनिटी अब अपनी सफलताओं का जश्न मनाने के लिए प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर खर्च करने की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इस संदर्भ में, प्राकृतिक हीरे से बने आभूषण अब सिर्फ एक स्टेटस सिंबल नहीं रह गए हैं, बल्कि यह एक व्यापक जीवनशैली और भावनात्मक अभिव्यक्ति का हिस्सा बनते जा रहे हैं।

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    शादियों और त्योहारों से आगे का सफर

    खरीदारी के मौकों में भी यह बदलाव साफ नजर आ रहा है। पारंपरिक रूप से भारत में ज्वेलरी की खरीदारी शादियों और त्योहारों से जुड़ी रही है, जिसमें हमेशा सोने का दबदबा रहा है। लेकिन अब यह चलन बदल रहा है। कानपुर, प्रयागराज और दरभंगा जैसे शहरों में भी नेचुरल डायमंड्स तेजी से ब्राइडल कलेक्शंस में अपनी जगह बना रहे हैं। डी बीयर्स ग्रुप की हालिया 2025 की स्टडी बताती है कि टियर-2 और टियर-3 शहर नेचुरल डायमंड सेगमेंट, खासकर प्रीमियम और लग्जरी कैटेगरी में नई मांग पैदा कर रहे हैं। अब डायमंड नेकलेस, रिंग्स और ईयररिंग्स शादी के लहंगे और कपड़ों का अहम हिस्सा बन रहे हैं।

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    (Picture Credit-Anmol)

    सबसे खास बात यह है कि यह बदलाव अब सिर्फ महानगरों के उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है। छोटे शहरों के उपभोक्ताओं की यह सोच एक व्यापक सांस्कृतिक बदलाव को दर्शाती है, जहां उपहार देने की पसंद अब और अधिक आधुनिक तथा व्यावहारिक होती जा रही है।

    डिजिटल क्रांति का असर

    इस बदलाव में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने एक बड़े उत्प्रेरक की भूमिका निभाई है। सोशल मीडिया, ई-कॉमर्स वेबसाइटों और ऑनलाइन ज्वेलरी प्लेटफॉर्म्स ने छोटे शहरों के उपभोक्ताओं के लिए नए डिजाइनों, कीमतों की जानकारी, सर्टिफिकेशन और क्वालिटी तक पहुंचना आसान बना दिया है, जो चीजें पहले केवल बड़े शहरों तक सीमित थीं।

    आज उपभोक्ता आसानी से ऑनलाइन डिजाइन देख सकते हैं, कीमतों की तुलना कर सकते हैं और क्वालिटी के मानकों को समझ सकते हैं। डिजिटल पेमेंट की सुविधा ने खरीदारी की प्रक्रिया को और भी सरल बना दिया है, जिससे ग्राहक अपने घरों से ही ज्वेलरी देख और खरीद सकते हैं। छोटे शहरों के ग्राहक अब केवल स्थानीय दुकानों पर निर्भर नहीं हैं, वे कहीं से भी हीरों के लेटेस्ट कलेक्शन ब्राउज और परचेज कर सकते हैं।

    ब्रैंड्स ने भांप लिया यह बदलाव

    ज्वेलरी ब्रैंड्स ने इस बदलते ट्रेंड को तुरंत पहचान लिया है। इससे डायमंड ज्वेलरी की पहुंच आसान हुई है, खासकर मिडिल क्लासके लिए, जिससे पहली बार हीरा खरीदने वाले ग्राहकों की संख्या में इजाफा हुआ है।

    इसके साथ ही, कई ब्रैंड्स नए स्टोर खोलकर और स्थानीय प्राथमिकताओं, त्योहारों व शादी के सीजन के अनुसार अपने कलेक्शंस को तैयार करके टियर-2 और टियर-3 शहरों में अपना विस्तार कर रहे हैं। इस टारगेटेड अप्रोच से इन क्षेत्रों में हीरे की  मार्केट की ग्रोथ को और रफ्तार मिलने की उम्मीद है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले सालों में यह सेगमेंट काफी तेजी से बढ़ेगा।

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    (Picture Credit-Gehna)

    आभूषण से विरासत तक

    शायद सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह आया है कि लोग अब आभूषणों को किस नजरिए से देखते हैं। आज के खरीदार सिर्फ गहने नहीं खरीद रहे हैं, वे भावनात्मक मूल्य, विरासत और दीर्घकालिक मूल्य की तलाश में हैं। युवा उपभोक्ता ज्वेलरी को एक ऐसी सदाबहार संपत्ति के रूप में देख रहे हैं जो पीढ़ियों तक अपनी भावनात्मक और वित्तीय वैल्यू बनाए रखती है।

    यही वजह है कि प्राकृतिक हीरे  लोगों के दिलों में गहराई से उतर रहे हैं। इन्हें सिर्फ इनके लुक के लिए नहीं, बल्कि इस बात के लिए सराहा जाता है कि ये स्थायित्व, भावना और निरंतरता जैसी चीजों का प्रतीक हैं। कई परिवारों के लिए, ज्वेलरी का मतलब समय के साथ किसी सार्थक चीज को संजो कर रखना है।

    इस लिहाज से, भारत में प्राकृतिक हीरे की  ज्वेलरी अब सिर्फ एक खरीदारी नहीं रह गई है। यह एक कहानी, एक मील का पत्थर और कई लोगों के लिए एक बनती हुई विरासत है।