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ना चीन, ना हॉन्गकॉन्ग! भारत के क्रिकेट क्लब में स्पेशल डिमांड पर ईजाद हुआ था ‘मंचूरियन’, अनोखा है डिश का इतिहास

Published: Mon, 07 Sep 2026 06:00 PM (IST)

आइए चीनी समझे जाने वाले भारतीय व्यंजन मंचूरियन की कहानी जानते हैं।

क्रिकेट मैच से जुड़ी है मंचूरियन के बनने की कहानी (Image Source: AI Generated)

क्रिकेट मैच से जुड़ी है मंचूरियन के बनने की कहानी (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। किसी रेस्टोरेंट में खाने की टेबल पर जो मेन्यू रखा होता है, उसमें अक्सर चाइनीज खाने का अलग सेक्शन होता है। हाका नूडल्स, मंचूरियन, मोमोज…जिन्हें देखकर लोगों को लगता है कि ये डिशेज चीन से भारत आईं हैं, जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। 

जी हां, हम बात कर रहे हैं मंचूरियन की, जिसे अक्सर हम एक चाइनीज डिश समझकर खाते हैं, पर उसकी उत्पत्ति की कहानी भारत से ही जुड़ी हुई है। आइए आपको मंचूरियन का दिलचस्प इतिहास बताते हैं। 

क्रिकेट मैच से जुड़ी है मंचूरियन के बनने की कहानी 

यह बात साल 1975 की है जब कोलकाता से संबंध रखने वाला नेल्सन वांग नाम का शेफ मुंबई में रोजगार के लिए आया। यहां क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया में वांग के बतौर शेफ नौकरी भी लग गई। कहते हैं कि एक बार शेफ से वहां आए किसी ग्राहक ने मेन्यू से हटकर एकदम अनोखी डिश बनाने को कहा। 

फिर क्या, वांग ने सबसे पहले चिकन के साथ अदरक, हरी मिर्च, लहसुन जैसे मसाले लिए। उसमें कुछ अलग स्वाद के लिए कॉर्न स्टार्च और सोया सॉस का इस्तेमाल कर एक अलग पर बेहद स्वादिष्ट डिश ईजाद कर डाली। इस तरह एक ग्राहक की फरमाइश पर शेफ ने नया व्यंजन बनाया, जो बाद में लोगों के बीच मंचूरियन नाम से खूब पॉपुलर होता चला गया। 

शेफ ने खोला था खुद का रेस्टोरेंट 

जब इस डिश की लोकप्रियता बढ़ती चली गई, तब वांग ने साल 1983 में में चाइना गार्डन नाम से अपना खुद का रेस्टोरेंट भी खोला। आज भारत के कई शहरों में इस रेस्टोरेंट की फूड चेन मौजूद हैं। 

फिर शुरू हुआ वेजिटेरियन मंचूरियन का दौर 

इस कहानी से हमें यह भी पता चलता है कि सबसे पहले नॉन-वेज मंचूरियन बनाए गए थे, जिसका बाद में वैरिएशन वेजिटेरियन गोभी से बने मंचूरियन के रूप में देखा गया। आज देखिए भारत के ज्यादातर रेस्टोरेंट्स और होटलों में मंचूरियन राइस और मंचूरियन नूडल्स लोग बेहद पसंद कर रहे हैं। 

हक्का चीनी व्यापरियों से था शेफ का संबंध

हां, मंचूरियन भले ही चाइनीज नहीं है, लेकिन इसे बनाने वाले का संबंध जरूर चीन से है। बता दें कि 17 वीं शताब्दी में ब्रिटिशकाल के दौरान कुछ हक्का चीनी व्यापारी कोलकाता में आए थे। इन व्यापारियों ने यहां के टेंगरा इलाके में बसेरा बना लिया और तब से यह जगह चाइनीज टाउन कहलाई। 

आपको शायद पता न हो पर इसी टाउन से इंडो-चाइनीज खाने की शुरुआत भी मानी जाती है। फिर आगे चलकर इसी हक्का चीनी समुदाय से संबंध रखने वाले नेल्सन वांग ने मंचूरियन की उत्पत्ति की। 

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