बिहार के सत्तू से लेकर गोवा के कोकम तक, भारत के इन 5 देसी ड्रिंक्स के आगे सब हैं फेल
पीढ़ियों से चले आ रहे भारत के पारंपरिक शीतल पेय आज बड़े-बड़े रेस्त्रां के मेन्यू में भी शामिल हैं। इनके बारे में बता रहे हैं होटल क्राउन प्लाजा, नई दि ...और पढ़ें

90 के दशक के देसी समर ड्रिंक्स (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में शीतल पेय सिर्फ प्यास बुझाने का जरिया नहीं रहे- ये हमेशा से जीवनशैली, मौसम और क्षेत्रीय समझ का हिस्सा रहे हैं। हर पेय अपने साथ एक कहानी लेकर आता है- कहीं बचपन की दोपहर, कहीं रसोई की खुशबू, तो कहीं सफर के बीच मिली राहत।
कच्चे आम का आनंद
आम पन्ना उत्तर भारत की गर्मियों का सबसे भरोसेमंद साथी रहा है। कच्चे आम को उबालकर या भूनकर बनाया गया यह पेय खटास और मिठास का संतुलन लिए होता है, जिसमें पुदीना और भुना जीरा इसे ठंडी तासीर देते हैं। बचपन में अक्सर इसे मिट्टी के घड़े में ठंडा करके रखा जाता था और बाहर खेलकर लौटने के बाद एक गिलास आम पन्ना पूरे दिन की थकान मिटा देता था। मीठे और खुशबूदार स्वाद के लिए गुलाब शरबत हमेशा खास रहा है। इसकी हल्की सुगंध और ठंडक भरा स्वाद इसे अलग पहचान देता है। बचपन में मेहमानों के लिए इसे खास तौर पर परोसा जाता था, जो इसे और भी यादगार बनाता है।
सागर किनारे का स्वाद
कोकम शरबत, जो मुख्य रूप से गोवा और महाराष्ट्र से आता है, अपने गहरे रंग और हल्की खटास के लिए जाना जाता है। इसे बनाने के लिए कोकम को भिगोकर उसका रस निकाला जाता है और गुड़ या चीनी के साथ मिलाया जाता है। उमस भरे मौसम में यह शरीर को हल्का महसूस कराता है और स्वाद में भी बेहद सुकून देता है। यह पेय स्थानीय मेहमाननवाजी का भी अहम हिस्सा है।
सदाबहार है शिकंजी और शरबत
नींबू शिकंजी भारत के हर कोने में अपनी जगह बनाए हुए है। नींबू, नमक और चीनी का संतुलन इसे हर उम्र के लोगों का पसंदीदा बनाता है। तो वहीं बेल का शरबत गाढ़े और सुकून देने वाले स्वाद के लिए जाना जाता है। बेल के गूदे को पानी और गुड़ के साथ मिलाकर तैयार शरबत शरीर को ठंडा रखने में मदद करता है और एक अलग संतुष्टि देता है।
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इन पारंपरिक स्वादों को केवल परोसा नहीं जाता, बल्कि उन्हें संपूर्ण अनुभव के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। ये समय के साथ बदले नहीं, बल्कि हर पीढ़ी के साथ और गहरे होते गए। आज जब हम इन्हें नए अंदाज में परोसते हैं, तो कोशिश यही रहती है कि उनका असली स्वाद वैसा ही रहे- जो हर घूंट के साथ अपनापन जोड़े।
उत्तर से दक्षिण तक की ठंडक
सत्तू शरबत, जो बिहार और पूर्वी भारत में लोकप्रिय है, सादगी में भी गहराई लिए होता है। भुने चने से बना सत्तू पानी में घोलकर नमक, जीरा और नींबू के साथ तैयार किया जाता है। यह ठंडक के साथ लंबे समय तक ऊर्जा भी बनाए रखता है- इसलिए इसे अक्सर सफर या काम के बीच पिया जाता था। तो वहीं दक्षिण भारत का नीर मोर छाछ का ही एक सुगंधित रूप है। इसमें दही और पानी के साथ करी पत्ता, अदरक और राई का हल्का तड़का मिलाया जाता है। यह पेय साधारण होते हुए भी बेहद संतुलित है- खाने के बाद पाचन को सहज करता है और शरीर को ठंडक देता है।